कृषि निर्यात नीति पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

कृषि निर्यात नीति पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित
सभी राज्य सरकारें कृषि नीति पर करें एक नोडल एजेंसी गठित 
रमाकांत चौधरी 
नई दिल्ली । हाल ही में केद्रीय कैबिनेट की तरफ से मंजूर की गई कृषि निर्यात नीति पर प्रथम राष्ट्रीय कार्यशाला 8 जनवरी 2019 को नई दिल्ली में आयोजित की गई थी। जिसमें सभी राज्य सरकारों से इस नीति के क्रियान्वयन को लेकर समर्पित एक नोडल एजेंसी गठित करने को कहा गया है।
दरअसल कृषि निर्यात नीति पर इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन केद्रीय वाणिज्य व उद्योग एवं नागरिक अड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु के कर कमलों द्वारा किया गया।जिनके साथ केद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सी.आर.चौधरी, केद्रीय वाणिज्य विभाग के सचिव डॉ.अनूप वधावन,केद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों,कृषि विशेषज्ञों और निर्यातकों ने शिरकत की थी।इस राष्ट्रीय कार्यशाला में कृषि निर्यात नीति के उद्देश्यों की पूर्ति करने को लेकर कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपिडा) और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के बीच एक सहमति पत्र यानि एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।इस मौके पर केद्रीय वाणिज्य एव उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि पहली बार कृषि निर्यात नीति तैयार की गई है और यह अत्यंत व्यापक है क्योंकि अनुसंधान एवं विकास (आरएण्डडी),कलस्टर,लॉजिस्टिक और परिवहन जैसे सभी संबंधित क्षेत्र (सेक्टर) इसमें शामिल है।उन्होंने कहा कि इस तरह की राष्ट्रीय कार्यशालाएं आयोजित करने से विभिन्न अवरोधों की पहचान करने और नीति की क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के बारे में आवश्यक जानकारियां एवं सुझाव प्राप्त करने में मदद मिलेगी।इस नीति का उद्देश्य 2022 तक कृषि निर्यात को वर्तमान 30 अरब डॉलर से दोगुना कर 60 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचाना और फिर इसे अगले कुछ वर्ष़ों में 100 अरब डॉलर के स्तर पर ले जाना है।जिसके तहत निर्यात वस्तुओं एवं गंतव्यों में विविधता लाना,शीघ्र खराब होने वाली वस्तुओं सहित अधिक कीमत और मूल्य वर्द्वित कwिष निर्यात को बढावा देना,अनूठे स्वदेशी,जैविक एवं गैर पारंपरिक कृषि उत्पादों को बढावा देना,बाजार पहुंच सुनिश्चित करने को लेकर संस्थागत व्यवस्था करना, तकनीकी बाधाओं,एसपीएस से निपटना,वैश्विक मूल्य श्रृंखला (जीवीसी) के साथ एकीकृत कर विश्व में कृषि निर्यात में भारत की हिस्सेदारी दोगुनी करना और किसानों को विदेशी बाजारों में निहित निर्यात अवसरों से लाभ उठाने में समर्थ बनाना भी कृषि निर्यात नीति के अन्य लक्ष्यों में शामिल है।इस नीति के तहत उपयुक्त नीतिगत उपायों के माध्यम से भारतीय कृषि निर्यात की संभावनाओं का दोहन करने,कृषि में भारत को एक वैश्विक शक्ति बनाने और 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने पर फोकस किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और इस सेक्टर में सुधारों पर तत्काल ध्यान देने की जरुरत है क्योंकि देश की 60 प्रतिशत आबादी कृषि पर ही निर्भर है।ऐसे में कृषि निर्यात से संबंधित वस्तुओं में विविधता लाना और उन बाजारों की तलाश करना समय की मांग है जहां निर्यात हो सकता है।ऐसे में उत्पादन की लागत कम करनी होगी ताकि भारत की कृषि उपज अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कर सकेगी।

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