व्यापार युद्ध के बीच दिशा की तलाश में रुई बाजार

काटन बाजार की 3 प्रमुख घटनाएं और उनका प्रभाव
गत 15 दिनों में `काटनगुरु' ने 3 अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में हाजिर रह कर जैसे 3 अलग-अलग दुनिया का अनुभव किया। `काटनगुरु' खुदको अत्यंत भाग्यशाली समझता है कि इन 3 बैठकों-घटनाओं का भागीदार बनने का अवसर प्राप्त हुआ।
यह 3 बैठक-क्या थी? वे भारत के कपास-रुई उद्योग एवं सूती कपड़ा उद्योग के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों थी? जिला कृषि महोत्सव, अमरावती: इस विशाल कृषि महोत्सव में करीब 20,000 किसान शामिल हुए थे। महाराष्ट्र सरकार, कृषि विभाग और `आत्मा' संस्था द्वारा आयोजित कृषि महोत्सव में `काटनगुरु' को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था। `काटनगुरु' ने `लाभदायक खेती' विषय पर अपने सुझाव और रोडमैप किसानों के सामने प्रस्तुत किए और भारत में कपास की खेती हजारों वर्ष़ों से लाभदायक थी और अभी भी किस तरह बना सकती है इसके प्रमाण किसानों को दिए। काटनगुरु प्रदर्शन खेतों में हमने ऐसे मॉडल खेत बनाए हø जिनमें उपज दुगना या तीन गुना हो गया है और स्मार्ट मार्केटिंग से किसानों को मुनाफा मिल रहा है। महाराष्ट्र के विदर्भ जिले में अंबोडा, कारंजा और गिरड गांव में इस तरह के माडल खेत इस वर्ष ` काटनगुरु' ने किसानों के साथ मिलकर अमृत पैटर्न प्रणाली से खेती करके बनाए हø।
विदर्भ महाराष्ट्र में कपास खेती का केद्र है और अमरावती में कई सदियों से किसान कपास की खेती से जुड़े हø। कपास की खेती में कुछ वर्ष़ों से `आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया' वाली स्थिति रहने से किसान परेशान है। कम बारीश, गुलाबी इल्ली और बहुत ऊंचे मजूरी खर्च से उपज और आवक दोनों पर विपरीत असर हो रहा है। जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो आनेवाले वर्ष़ों में कपास का बोआई क्षेत्र कम होने का भय है। कमिशन फार एग्रीकल्चरल कोस्ट्स एंड प्राइसिस (सीएसीपी) की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुझाव, नई दिल्ली सीएसीपी की तरफ से काटन एसोसिएशन आफ इन्डिया को इस बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक में आमंत्रण दिया गया था। सीएआई के अध्यक्ष अतुलजी गणात्रा के निवेदन पर ` काटनगुरु' को केद्र सरकार द्वारा आयोजित बैठक में अपने सुझाव देने का अवसर मिला। सुरेशभाई कोटक अतुलभाई गणात्रा जैसे रुई उद्योग के दिग्गजों से चर्चा करके और लाभदायक खेती के लिए हजारों किसानों को प्रशिक्षण के गत 10 वर्ष़ों के अपने व्यवहारिक अनुभव के आधार पर ` काटनगुरु' ने केद्र सरकार को कई व्यावहारिक और कम लागत के सुझाव दिए। इसमें मुख्य सुझाव इस प्रकार है:
सीएसीपी के रोल को सिफारिशों से ऊपर ले जाकर रवेन्यू मॉडल बनाना आवश्यक है।
किसानों को किमतों के कुए से निकालकर मूल्य एवं मूल्य वर्धन के विशाल समुद्र में ले जाना।
एमएसपी को मामूली रूप से बढ़ाएं (ताकी टेक्सटाइल उद्योग को नुकसान न हो) लेकिन इसे गुणवत्ता के अनुरूप वित्तीय रूप से प्रोत्साहनों से जोड़ दें ताकि ऊंचे जिनिंग आऊट-टर्न और कम कचरे/पानी वाले कपास को ज्यादा मूल्य मिले।
सीएआई की क्राप कमिटी मिटिंग, मुंबई: इस महत्वपूर्ण बैठक में हमने भारतभर के कई जिनर, स्पिनर और कपास-रुई के दलालों को फोन किया। उनके मत अनुसार और हाजिर कमिटी सभ्यों की राय अनुसार सीएआई ने 2018-19 रुई फसल को 335 लाख गांठ घटाकर 330 लाख गांठ का किया है। इस अनुमान के पीछे मुख्य कारण है कम नमी की वजह से कपास की उपज में गिरावट और कई रोगों के कारण पौधों को उखाड़ देने का सरकारी फरमान है। गत वर्ष के 365 लाख गांठ के क्राप रिपोर्ट के सामने इस वर्ष 10% गिरावट सीएआई ने दर्शाई है।
सीएआई भारत की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था है जिसमें किसान, जिनर, स्पिनर, निर्यातकार-आयातकार एवं ब्रोकरों का प्रतिनिधित्व है। सीएआई हर महीने अपना क्राप रिपोर्ट देती है जो भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में स्वीकार्य है। इस रिपोर्ट अनुसार भारत में कपास की फसल गत 10-15 वर्ष़ों में सबसे कम और कपास की उपज गत 10 वर्ष़ों में सबसे कम होने की आशंका है जो एक अत्यंत चिंता और विश्लेषण का विषय है।
घरेलू बाजार में मार्केट टोन नरम है। इसका मुख्य कारण आर्थिक तंगी है। बाजार में मांग बहुत सीमित होने कारण जिनर्स के पास रुई का स्टॉक बढ़ रहा है। बेपड़ते का व्यापार और लंबे पेमेन्ट टर्म्स से जिनर त्रस्त है। सूत और कपड़े की मंदी के कारण स्पिनर भी खुश नहीं है। अमेरिका-चीन के व्यापार युद्ध के कारण मानसिकता भी नकारात्मक हो गई है। यार्न-कपड़े में निर्यात के आंकड़े आकर्षक दिख रहे हø पर ज्यादातर मिलें नुकसान में चल रही है, खास करके वे जिनपे ब्याज का बोझ है। निर्यात में कामकाज हो रहे हø पर उनका प्रमाण गत वर्ष से कम है।
दैनिक कपास की आवक 1.25 से 1.50 लाख गांठ की हो रही है। जस्ट एग्री नाम की निजी संस्था के अनुसार इस सीजन में 5/2/2019 तक 166.83 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जो गत वर्ष इस समय तक 222.91 लाख गांठ की थी। सीएआई के अनुसार 31-1-2019 तक 170 लाख गांठ कपास की आवक हुई है। हाजिर रुई बाजार में गुजरात शंकर-6 41500 से 42300, महाराष्ट्र बन्नी 41000 से 42000 और तेलंगाना मि.मी. 39000 भाव से व्यापार हो रहे हø।
आंतरराष्ट्रीय बाजार में भी टोन सुस्त है। व्यापार युद्ध के रहते बाजार बढ़ नहीं रहा है। चीन ने अमेरिका से सोयाबीन बड़ी मात्रा में खरीदा है ऐसे रिपोर्ट हø पर रुई खरीदने के कोई समाचार नहीं है। अमेरिकी आईसीई वायदे में मार्च 72.81 और में 73.92 के भाव से 7-2-2019 को बंद हुए थे।
2018-19 सीजन के इस मंदी के दौर में एक ही आशा की किरण नजर आ रही है जो है हमारा तीसरा गेम चेंजर मांग। गत कई दिनों से अमेरिकी सरकार में `शटडाऊन' होने से रुई निर्यात के आंकड़े प्रकाशित नहीं हुए हø। आनेवाले दिनों में अगर इन आंकड़ों में अमेरिकी निर्यात में असाधारण बढ़ोत्तरी दिखती है (जिसकी हमें अपेक्षा है) और अमेरिका में बिना बिक्री की रुई में बड़ी कटौती होती है तो अमेरिकी वायदा अचानक बढ़ सकता है। इससे भारतीय रुई की कीमतों में भी सपोर्ट बढ़ेगा और भाव बढ़ेंगे। हम पहले ही देख चुके हø कि इस वर्ष भारत में कपास की फसल में भारी कमी होने की आशंका है।
किसानों के लिए `काटनगुरु' का सुझाव है कि अपने खर्च के हिसाब का कपास बाजार मूल्य पे बेच दें और बचे हुए कपास की बिक्री अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार करें। सक्षम किसान कपास का स्टॉक रख सकते हø। आनेवाले समय में एक तेजी का लाभ उन्हें मिलने की पूरी संभावना है। सभा के लिए काटनगुरु का सुझाव `खबर सिर्फ पढ़ें नहीं, उन्हे समझें'।

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