पी.सी. कपड़े में सुधार

सातवा महीना जुलाई का पूरा हुआ। आठवा महीना अगस्त यानी क्रांति का आजादी का महीना होता है। नवा महीना यानी सितम्बर टेक्सटाइल के लिए बड़ा भारी पड़ता है यानी सितमगर होता है। कोरोना ने मार्च एण्ड के साथ ही एण्ड - बेन्ड कर दिया। फिलहाल बढ़ते आंकड़े चिंता का विषय है। लोकडाउन खुलने के बाद कई शहरों में लोक डाउन ही चल रहा है। बरसात का मौसम पांच राज्यों में बाढ़ की कहानी सुना रहा है। पूर्णिमा तक महाराष्ट्र-गुजरात में भी क्या रंग खिलता है। राजस्थान में राजनीतिक संकट बना हुआ है। महाराष्ट्र भी वेटिंग लिस्ट में है। फिलहाल `राफेल' का आगमन चर्चा का विषय है। टेक्सटाइल इण्डस्ट्रीज में पावरलूम सेक्टर काफी रुटीन में आया है। फिर भी अंदर पूरी चिन्ता अभी मिटी नहीं है।
मालेगांव में जो 60x50 पापलीन की क्वालिटी खुब रंग जमाया अब नरम पड़ती नजर आ रही है। केम्ब्रिक में कोई विशेष हलचल नहीं है और रोटो रुका हुआ है। सिर्फ पी.सी. में कुछ सुधार हुआ है। मालेगांव के युवा व्यवसायी `मनोज बाहेती (बाहेती ग्रुप) ने बताया कि अब व्यापार ऐसे ही चलता रहेगा। बाढ़ और कोरोना से व्यापार प्रभावित हो रहा है। मालेगांव में पूरे लूम्स चालू है। अब तो सभी साईझिंग चालू हो गई है। रोटो के कपड़े में लेवाली काफी कम है। काफी लूम पी.सी. और रोटो छोड़कर सूती धागा चलाने में उत्पादन कम तो होगा। फिर भी लेवाली नहीं होने से स्टाक भारी पड़ रहा है।
मालेगांव कपड़ापापलीन और केम्ब्रिक : 60x50x36 ने मालेगांव खूब धूम मचाई। लेकिन एक सप्ताह में लगभग 50 पैसा मीटर नीचे आ गई। उसका मुख्य कारण रोटो और पी.सी. के बुनकर इस ओर ज्यादा आये। केम्ब्रिक में कोई विशेष उतार-चढ़ाव नहीं है। 10 पैसा कम-ज्यादा में चल रही है। फिलहाल कपड़ा में पड़ता तो है, इसलिए कोई चिन्ता नहीं है। मालेगांव में त्योहार की वजह से 5 से 7 दिन लूम्स बंद रह सकते ह। उसका असर कपड़ा बाजार पर हो सकता है।
रोटो और पी.सी: रोटो के कपड़े में तीन सप्ताह से सुस्ती का माहौल बना हुआ है। पी.सी. में कुछ सुधार हुआ है। दलाल विजय मरदा ने बताया 60x42 को छोड़कर मुख्य क्वालिटी में 20 से 25 पैसा मीटर बढ़ने में कामकाज होने लगा है। वैसे बरसात में कपड़ा का मेन सीजन ऑफ रहता है। इस बार तो लम्बा ऑफ सीजन चल रहा है। व्यापार का सारा गणित दिपावली पर निर्भर रहेगा। अब कोरोना कब जाता, उस पर भी बहुत कुछ निर्भर है।

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