बीपीसीएल को खरीदने की दौड़ में वेदांता समूह भी शामिल

बीपीसीएल को खरीदने की दौड़ में वेदांता समूह भी शामिल
किसी भी सरकारी उपक्रम को नहीं मिलेगा मौका
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार की विनिवेश नीति अब अपनी राह पर लौटती दिख रही है।ऐसे में अब इस बात की संभावना मजबूत हुई है कि सरकारी क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) में विनिवेश प्रक्रिया जोर पकड़ चुकी है। जिसको लेकर अनिल अग्रवाल नियंत्रित वेदांता समूह भी देश की इस दूसरी सबसे बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनी को खरीदने की दौड़ में शामिल हो चुका है।ऐसे में चुनिंदा बड़ी कंपनियों और फंड्स की तरफ         भी इस सरकारी कंपनी के अधिग्रहण में रुचि दिखाने की सूचना है।बीपीसीएल की विनिवेश प्रक्रिया के तहत कंपनियों से 16 नवम्बर 2020 तक प्रस्ताव मंगाए गए थे।वहीं केद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सरकारी कंपनी की बीसीसीएल में बोली लगाने की इजाजत नहीं होगी।ऐसा कुछ मीडिया में इस तरह की खबरें चल रही थी।
दरअसल केद्र सरकार की तरफ से कहा गया है कि बीपीसीएल में विनिवेश प्रक्रिया में कई कंपनियों की तरफ से रुचि दिखाने के बाद प्रक्रिया दूसरे चरण में पहुंच गई है।अब इन प्रस्तावों की जांच की जाएगी।वहीं वेदांता की तरफ से यह सूचना दी गई है कि बीपीसीएल में बोली लगाने के लिए उसने एक विशेष कंपनी (एसपीवी) गठित की है और इस कंपनी की तरफ से केद्र सरकार के समक्ष प्रस्ताव दाखिल किया गया है।वहीं विशेष कंपनी में भारतीय कानून के तहत पंजीकृत वेदांता पंजीकृत कंपनी वेदांता सर्विसेज की संयुक्त हिस्सेदारी होगी।जिसके तहत वेदांता भारत में पेट्रोलियम व खनन क्षेत्र की सर्वप्रमुख कंपनियों में से एक है।ऐसे में यदि यह बीपीसीएल में सरकारी हिस्सेदारी खरीदने में सफल रहता है तो मुकेश अंबानी नियंत्रित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआइएल) के पेट्रोलियम कारोबार के समक्ष एक मजबूत प्रतिद्वंदी के तौर पर स्थापित हो सकता है।चूंकि लगभग एक दशक पहले वेदांता ने देश की दूसरी सबसे बॐाy तेल उत्पादक कंपनी केयर्न एनर्जी का अधिग्रहण किया था।वहीं केद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए विनिवेश से 2.1 लाख करोड़ रुपए हासिल करने का लक्ष्य रखा हुआ है।हालांकि कोरोना महामारी के चलते केद्र सरकार की सभी विनिवेश प्रक्रिया ही लगभग ठप हो गई थी।यद्यपि अब बीपीसीएल में केद्र सरकार की पूरी की पूरी 52.98 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया चल रही है।ऐसे में देखना यह होगा कि बीपीसीएल से केद्र सरकार की कितना राजस्व हासिल होता है।हालांकि इस कंपनी के विनिवेश की पहली बार घोषणा 2009 में की गई थी जिसके बाद से इसके शेयरों की कीमत एक चौथाई घट चुकी है।इस समय बाजार भाव के हिसाब से केद्र सरकार अपनी इक्विटी के बदले 44,000 करोड़ रुपए हासिल करने की उम्मीद लगा सकती है।इसके बावजूद विनिवेश लक्ष्य के पूरा होने की संभावना कम है।ऐसे में केद्र सरकार की कोशिश एयर इंडिया की विविनेश प्रक्रिया भी इसी वर्ष पूरी करने की है।

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