पाकिस्तान के उद्योग और जनता त्राहिमाम् करेगी

पाकिस्तान के उद्योग और जनता त्राहिमाम् करेगी
भारत से रुई-चीनी का आयात न करने की जिद से
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से चीनी और कपास के आयात का  निर्णय लिया और फिर राजनीतिक दबाव में आकर तुरंत यूटर्न ले लिया। इसके खराब परिणाम इस देश के उद्योगों और उपभोक्ताओं को सहन करना होगा। ऐसी जानकारी व्यापारिक सूत्रों ने दी।
पाकिस्तान में चीनी का भाव इस समय भारत की तुलना में काफी ऊंचा चल रहा है। रमजान महीना आ रहा है तो इसकी मांग बढ़ने से भाव चरमसीमा पर पहुंचेगा, ऐसी जानकारी वहां के व्यापारी सूत्रों ने नाम न देने की शर्त पर बताया।
पाकिस्तान ने बुधवार को स्थानीय में बढ़ते हुए भाव को नियंत्रण में लेने के लिए भारत से पांच लाख टन सफेद चीनी के आयात की मंजूरी दी थी वहां के वित्तमंत्री हमाद अजहर ने कहा कि पड़ोसी देश भारत में चीनी का भाव पाकिस्तान की तुलना में काफी कम होने से पाकिस्तान सरकार ने निजी क्षेत्र में भारत के साथ चीनी व्यापार को खुला रखा है। जून महीने के अंत तक भारतीय रुई के आयात पर प्रतिबंध उठा लिया जाएगा, उक्त जानकारी अजहर ने दी।
पाकिस्तान में फिलहाल रुई की भारी मांग है। गत वर्ष पाकिस्तान का टेक्सटाइल निर्यात बढ़ा था और रुई की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई। इसलिए संपूर्ण विश्व से रुई आयात को मंजूरी दी गयी थी, लेकिन भारत से आयात पर प्रतिबंध होने के कारण उनके देश के छोटे और मध्यम इकाइयों  को सीधा असर हो रहा है। पाकिस्तान के टेक्सटाइल मेन्युफैक्चरर्स की लंबे समय से मांग थी कि भारत से रुई आयात को मंजूरी दी जाय, क्योंकि यह विकल्प उन्हें सस्ता पड़ रहा है।
वर्तमान पाकिस्तान का रुई मौसम (अगस्त 2020 से जुलाई- 2021) उत्पादन 24 प्र.श. घटकर 50.19 लाख गांठ होने से भाव बढ़ रहा है।
नायमेक्स रुई वायदा में फिलहाल भाव 79 से 80 सेंट प्रति पाउंड (454 ग्राम) यानी की 256 किलो की प्रतिखंडी 45800 रु. बोला जा रहा है। इसकी तुलना में भारत निर्यात क्वालिटी बेंचमार्क शंकर-63 का भाव 45000 से 45200 रु. बोला जा रहा है। आयात छूट मिले तो चीनी का भाव जो प्रति किलो और जो रुई का भाव बढ़ रहा था वह घट सकता था।
राजकोट के एक व्यापारी पोपट ने कहा कि पाकिस्तान में इस वर्ष कपास की भारी तंगी है। वहां के उद्योगों द्वारा भारत से कपास का आयात करने के दबाव के कारण वहां की सरकार तैयार हुई थी। वहां के मिल मालिकों ने सरकार को समझाया कि भारतीय काटन तथा यार्न का भाव दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कम है। भारत से भेजे गए कपास पाकिस्तान में उसे 3 से 4 दिन में पहुंच सकते हø। अन्य देशों से आयात करने पर ऊंचा खर्च और पाकिस्तान पहुंचने में एक से दो महीना लगता है। इससे भारत से आयात करना व्यावहारिक है।
पाकिस्तान की वार्षिक काटन की खपत 120 लाख गांठ है जबकि उत्पादक 77 लाख गांठ का ही है जिससे यहां कपास की कमी 60 लाख गांठ की  मानी जा रही है। पाकिस्तान ने अन्य देशों से आयात करने के बाद भी इस समय लगभग 35 लाख गांठ की कमी होने का अनुमान है जिसे सिर्फ आयात द्वारा ही पूरा किया जा सकता है।
पाकिस्तान में रुई का भाव चालू मार्केटिंग वर्ष में तेजी से बढ़ा है। व्यापारी जगत का मानना है कि भारत से आयात की संभावना फिलहाल न दिखने से भाव में उछाल आएगा।
पाकिस्तान के व्यापारियों ने अफगानिस्तान के लिए दुबई के मार्फत भारत से 50000 टन चीनी के आयात के लिए पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार में दो निविदाएं भी निकाली थी। थाइलैंड के आफर की तुलना में भारत का भाव काफी नीचा है।
व्यापारियों ने कहा कि पाकिस्तान में चीनी का भाव प्रति टन 694 डॉलर है जबकि भारतीय व्यापारियों ने सफेद चीनी फ्री आन बोल्ड 410 से 420 डॉलर में आफर किया।
आल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रफुल्ल विठलानी ने व्यापार को बताया कि पाकिस्तान में चीनी का भाव इस समय भारत की तुलना में ऊंचा चल रहा है। भारत सरकार चीनी के निर्यात पर प्रति टन 4000 रु. की सब्सिडी देती है। जहाजी मार्ग से पाकिस्तान पहुंचने का खर्च 6000 रु. होता है।     

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