कपास निर्यात में वृद्धि कायम

कपास निर्यात में वृद्धि कायम
अग्रिम निर्यात सौदे में दुगुने से अधिक वृद्धि
 
रमाकांत चौधरी  
नई दिल्ली । पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस वर्ष अब तक कपास के अग्रिम निर्यात सौदे में दोगुने से अधिक की वृद्वि हो गई है।ऐसे में ताजा हालात के मद्देनजर रखते हुए चालू वित्त वर्ष में कपास के निर्यात में आगे वृद्वि की रफ्तार कायम रहने की उम्मीद बनी हुई है।ऐसी स्थिति में एक तरफ कपास के निर्यात बढने से सीधे तौर पर किसानों को कपास उपज के उचित मूल्य प्राप्त हुए है जिससे उनके  समक्ष प्रसन्नता का माहौल बना हुआ है।वहीं कपास के निर्यात से संबंधित कारोबारियों के समक्ष उत्साहजनक महौल है जिससे स्वभाविक है कि कपास के कारोबार के समक्ष सकारात्मक रुख बन रखा है।
दरअसल घरेलू स्तर पर कीमत कम रहने,रुपए की मंदी और चीन की मांग के चलते पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में अब तक कपास के अग्रिम निर्यात सौदे दोगुने से अधिक हो गए है।जिसके तहत पिछले वर्ष सितम्बर में कपास के अग्रिम निर्यात सौदे लगभग सात लाख गांठ के आसपास ही थे जो कि इस बार अब तक सोलह लाख गांठ पर पहुंच गए है।ऐसे में चालू वित्त वर्ष में कपास के निर्यात सौदे में आगे  तेजी का रुख कायम रहने के आसार नजर आ रहे है।जिसको लेकर कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अध्यक्ष श्री अतुल गनात्रा ने कहा कि इस वर्ष कपास के अग्रिम निर्यात सौदे सोलह गांठ किए है।जिसमें से लगभग पिछत्तर प्रतिशत कपास के अग्रिम सौदे चीन को निर्यात करने को लेकर किया गया है।वैसे तो  पिछले वित्त वर्ष में आपूर्ति अपेक्षाकृत कम रहने क चलते भारत कपास का अधिक अग्रिम सौदा नहीं हो पाया था।बहरहाल इस बष्र कपास का निर्यात चीन को अधिकाधिक  किए जाने की उम्मीद है।इस समय वैश्विक बाजार में भारत के कपास की कीमत अपेक्षाकृत सस्ता है।उन्होंने कहा कि अमेरिका से कपास के आयात पर चीन की तरफ से पतीस प्रतिशत शुल्क लगा रखा है। जिससे चीन को भारतीय कपास आयात करना अपेक्षाकृत सस्ता पड़ेगा।जिससे इस वर्ष चीन को भारतीय कपास का कुल निर्यात 30/40 लाख गांठ होने की संभावना है जो कि पिछले वर्ष में सिर्फ 8-9 लाख गांठ का निर्यात किया गया था।यद्यपि चीन के अतिरिक्त बंगलादेश,वियतनाम और चुनिंदा अन्य देशों ने भी भारतीय कपास के अग्रिम सौदे किए है।यद्यपि आमतौर पर भारतीय निर्यातकें की तरफ से नवम्बर से लेकर दिसम्बर के बीच अधिकाधिक तादाद में कपास के निर्यात करने को प्राथमिकता देते है। इसीबीच इस वर्ष गुजरात में कपास की बोआई विलंबित हुई है।वहीं महाराष्ट्र और तेलंगाना में कपास की फसलों पर कीटों के हमले हुए है।ऐसी कारकों को देखते हुए चालू खरीफ फसल मौसम के तहत कपास के रकबे में लगभग 2 प्रतिशत की कमी जताई जा रही है।ऐसे में देश में कपास की खपत बढने जैसे कारकों के चलते निर्यात की कुल मात्रा प्रभावित होने की आशंका भी है।
बहरहाल कपास के निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली स्थितियां भी उपलब्ध है।इस समय देश में कपास की कीमत लगभग 48000 रुपए प्रति कडी के आसपास है जो कि 350 किलोग्राम होता है।
केद्र सरकार की तरफ से 2018-19 के विपणन वर्ष को लेकर न्यूनतम समर्थन मूल्न्य (एमएसपी) 28.10 प्रतिशत बढाकर 5150 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है।
ऐसे में इस बार कपास के निर्यात में व्यापक बढोतरी होने से कपास किसानों के चेहरे पर खुशहाली छाई हुई है।वहीं कपास के निर्यात व्यापार से संबंधित व्यापारियों के समक्ष सकारात्मक रुख बना हुआ है।  

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