बांग्लादेश में गेहूं पर फंगल संक्रामक बीमारी के फैलने के संकेत से भारत सतर्क

बांग्लादेश में गेहूं पर फंगल संक्रामक बीमारी के फैलने के संकेत से भारत सतर्क
व्हीट ब्लास्ट के खतरे के लिए विभिन्न उत्पादक देशों में मची हड़कम्प 
 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । व्हीट ब्लास्ट जैसी संक्रामक बीमारी से दुनिया के गेहूं उत्पादक देशों में हड़कंप मची हुई है।जिसको लेकर फंगस यानि फफूंद से फैलने वाले इस रोग से निपटने की तैयारियां वैश्विक स्तर पर शुरु हो चुकी है।जिसके तहत यूजी-99 रस्ट के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा खतरा गेहूं जैसी प्रमुख फसल के लिए पैदा हुआ है।जिसके तहत पडेसी देश बंगलादेश तक वहीट ब्लास्ट के फफूंद मैगनापोर्ट ओरिजे के पहुंच जाने के संकेतों के बाद भारत सरकार और कृषि वैज्ञानिक सतर्क हो गए है।जिसके तहत बंगलादेश की सीमा से सटे इस किलोमीटर तक के क्षेत्र में गेहूं की खेती पर पाबंदी लगा दी गई है।ऐसी किसी भी बीमारी की चुनौती से निपटने को लेकर सीमा से लगे जिलों में इस किलोमीटर भीतर तक इसकी कड़ी निगरानी की जा रही है।जिसके चलते पश्चिम बंगाल के पांच जिलों में गेहूं की बोआई पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।वहीं देश के पूर्वी छोर के अन्य राज्यों में गेहूं की खेती नहीं होती है बहरहाल छिटपुट किसान गेहूं की फसल उगाते है।ऐसे में किसानों को वैकल्पिक और अधिक फायदा देने वाली फसलों को लगाने को लेकर मदद दी जा रही है।ऐसे किसानों को वित्तीय मदद देने को लेकर केद्र सरकार की तरफ से 90 करोड़ रुपए की सहायता देने का फैसला किया गया है।जिसको लेकर भारत सरकार की तरफ से बंगलादेश को भी यह सुझाव दिया उगया है कि वह भी अपनी सीमा से इस किलोमीटर अंदर तक गेहूं की खेती करने पर प्रतिबंध लगा दें।जिसको लेकर वहां के किसानों को उचित बीज और अन्य मदद भी देने का प्रस्ताव रखा गया है।
दरअसल व्हीट ब्लास्ट जैसे फंगल यानि फफूंदी से होने वाला संक्रामक रोग आमतौर पर धान में होता रहा है।बहरहाल इसका असर पहली बार ब्राजील में देखा गया जहां से बोलीविया और पराग्वे में इसके फफूंद पहुंच गए।जिसको लेकर कृषि वैज्ञानिकों की तरफ से कहा गया है कि गर्म और नमी वाले क्षेत्रों में इस फफूंद के तेजी से पनपने की संभावना रहती है।जिसको लेकर पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सकते में आ गए।जिसको लेकर वैज्ञानिकों की कोशिश इस घातक बीमारी की प्रतिरोधी प्रजाति जल्द ही विकसित करने की है।इसके साथ ही रोग प्रभावित क्षेत्रों को सीमित कर दिया जाए ताकि इसका प्रसार नहीं हो सके। जिसको लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक प्रोफेसर एन.के.सिंह ने कहा कि इस चुनौती का सामना करने को लेकर मेक्सिको स्थित नार्मन बोरलॉग गेहुं अनुसंधान संस्थान (सीमिट) अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय कर रहा है।जिसको लेकर वैज्ञानिकों का एक दल व्हीट ब्लास्ट प्रभावित क्षेत्रों में रोग प्रतिरोधी प्रजाति विकसित करने में जुट गया है।चूंकि यूजी-99 की बीमारी युगांडा से शुरु हुई थी जिसको लेकर वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिकों ने उल्लेखनीय कार्य किया था।यह रस्ट अफगानिस्तान तक पहुंच गया था जिसको लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने तत्परता बरती और देश मुं इसकी प्रतिरोधी प्रजाति का बीज भारी मात्रा में तैयार कर लिया।भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका को पूरी दुनिया में सराहा भी गया है।गेहूं को लेकर पैदा इस रोग से बचाव की तैयारियां भी शुरु कर दी गई है।जिसको लेकर वैज्ञानिकों की कोशिश इस तरह की प्रतिरोधी बीज को विकसित करने की है।

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