तेल व गैस खोज को लेकर वेदांता व ओएनजीसी के बीच समझौता

हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरा करने के बाद राजग सरकार तेल व गैस खोजने का पहला समझौता कर पाई है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से पहली अक्टूबर को प्रस्तावित 55 तेल व गैस ब्लॉकों में पेट्रोलियम उत्पाद खोजने और उत्पादन करने को लेकर विभिन्न कंपनियों के साथ समझौते किए गए।
इन कंपनियों ने खुली निविदा के तहत ये ब्लॉक हासिल किए थे।जिसके तहत 55 ब्लॉकों में से 41 ब्लॉकों को लेकर प्रमुख उद्योगपति अनिल अग्रवाल समूह को वेदांता ने कुछ वर्ष पहले केयर्न एनर्जी का अधिग्रहण किया था।जिसको लेकर केद्र सरकार की इस कोशिश को कितनी सफलता मिलेगी यह तो भघ्ॅद्घय में पता चलेगा बहरहाल इसता स्पष्ट है कि अधिकांश पेट्रोलियम कंपनियों को इस पर बहुत भरोसा नहीं है क्योंकि न तो देश की प्रमुख पेट्रोलियम कंपनी रिलायंस कोई ब्लॉक हासिल कर पाइढ और न ही किसी विदेशी तेल कंपनी ने भारत के तेल ब्लॉकों में रुचि दिखाई।ऐसे में सरकारी क्षेत्र की अग्रणी पेट्रोलियम कंपनी ओएनजीसी ने हिस्सा तो लिया लेकिन सिर्फ दो ब्लॉक हासिक कर पाई जबकि एक दूसरी तेल कंपनी ऑयल इंडिया को भी नौ ब्लॉक मिले।जिन कंपनियों ने इसमें हिस्सा लिया जिनमें कोई भी विदेशी कंपनी शामिल नीं थी जबकि उन्हें आमंत्रित करने को लेकर सरकार की तरफ से कई रोड शो भी किए गए थे।बहरहाल जिन कंपनियों को ब्लॉक दिए गए है जिन्हौनें फिलहाल 5900 करोड़ रुपए निवेश करने की बात कही है।जिसको लेकर केद्रीय पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि इन 55 ब्लॉकों में कुल 1.45 लाख करोॐ रु1पए के पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार होने के आसार है।दूसरे राउंड में 14 और ब्लॉकों को लेकर निविदाएं जारी होनी है।बहरहाल इस प्रगति को देखतु हुए ऐसा लगता नहीं है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की तरफ से 2022 तक तेल आयात बिल में 10 प्रतिशत कमी करने का लक्ष्य हासिल हो सकेगा।अभी भारत अपनी जरुरत का 81 प्रतिशत तेज आयात करता है।

© 2018 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer