गेहूं में तेजी का रुख बरकरार

हमारे संवाददाता    
आम उपभोक्ता को गेहूं भाव से राहत नहीं है । सरकार द्वारा तय एमएसपी से निम्न क्वालिटी का गेहूं भी 1850 से 1950 रु. से नीचे तो नहीं मिल रहा है । गतृ् हप्ते भी गेहूं पर लगभग 50 रु. की वृद्धि हुई । सरकारी गेहूं भी 2030 रु. तक बिका बताते  है । त्योहारी सीजन के लगातार जारी रहने से आटा मैदा मिलो की मांग लगातार जारी रहने से भावों में वृद्धि  होना बताई जा रही है । शरबती अच्छे गेहूं की मांग सदा ऊंची सोसायटी की रही है । देश में इस वर्ष किसानों को हुई सरकारी सैगाते आगे क्या दिशा देगी यह तो वक्त ही बताएगा मगर आम धारणा है कि देश में बढ़ रही राजनैतिक बंदरबॉट भावना आम आदमी के लिये मुसीबतों का साधन नहीं बन जाए । शरबती गेहूं बढ़कर 3200 से 3300 तक हो गया था । सरकार को चाहिये कि आम जनता के स्वास्थ को मद्देनजर रखते हुए खाद्यवस्तुओं के बढ़ रहे बेतहाशा उपादन पर नकली और अधिक प्रिजरर्वर की उपयोगिता पर नजर रखे ।
आटा मैदा मिलों और ब्रेड उत्पादक कर्ताओं की कम मांग अनुसार पहले कम गेहूं बिकता था क्योंकि बाजार में ब्रेड की मांग कम थी तथा सस्ती थी । किंतु देश में बढ़ रही नई पौध की जनरेशन के पास गेहूं खरीदकर आटा बनवाने और रखने की फुर्सत नहीं है तथा उनकी मांग पैक बने आटा मटीरियल की रहती है । आटा मैदा मिलों को नया प्रोग्राम मिल गया होने ब्रेड के भाव कई गुने हो गये है तथा आटा मैदा में प्रिजर्वर की अधिक उपयोगिता बढ़ती जा रही है । इस क्षेत्र का भरपूर कारोबार फल फूल रहा है 

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