दलहन में तेजी : दालों में ग्राहकी का अभाव

दलहन में तेजी : दालों में ग्राहकी का अभाव
हमारे संवाददाता  
इस वर्ष देश में रबि और खरीफ की फसल की पैदावार में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है । अच्छी आर कही अधिक बरसात होने से आगे रबि की नई सीजन की फसलों के भी बढ़ने की संभावनाएं बताई जा रही है । सरकार ने रबि की अगली फसल के उत्पादनों पर भी एमएसपी तय कर देने से गत् हप्ते दलहनों के भावें में भारी तेजी आ गई । एमएसपी में भाव बढ़ जाने से मूंग, सरसों, चना में स्टॉक से अछत बढ़ गई होने से भी तेजी बन गई बताया जा रहा है ।  चना गत हप्ते 4150-4200 का भाव था जिसमें 200 रु. की ताजा तेजी एमएसपी में तय भाव 4620 रु. के कारण  4300 रु. तक भाव में तेजी आ गई । मसूर का गत हप्ते भाव था 3600 रु. जो बढ़कर 3800 रु. तक होना बताई जा रही थी । मूंग 4600-4700 रु. बेस्ट में भाव बढ़कर 4900-5000 रु. तक भाव बताए जा रहे थे । काबुली चना में मांग निकलने से तेजी होकर भाव 6200-6400 रु. तक बेस्ट में भाव बताए जा रहे थे । अधिक आयातित स्टाक से उड़द स्थिर रही । दलहनों के समर्थन से दाले भी तेज हुई बताते है । चना दाल 5150 से उछलकर 5250 आर, तुवॉरदाल फूल 5600, मार्केवाली का भाव 6100-6200 रु. हो गया था । मूंगदाल में भी भारी तेजी होकर 6100 रु. बेस्ट में और 7200 रु. तक मार्केवाली बताई जा रही थी। विशेषज्ञों के अनुसार अब आगे सभी दलहन-दालों का भविष्य तेजी सूचक ही है।  कृषि विशेषज्ञों और सरकारी ऐजेंसियो के अनुसार इस वर्ष प्राकृतिक मौसमों का सहारा मिलने से दानों सीजन की पैदावार मे बढ़ोत्तरी हुई है । उनके अनुसार निर्यात होने के बावजूद देश में मौजूदा स्टाक से भी अनुमान लगाया जा सकता है  की देश में प्राकृतिक सौगातो की कमी नहीं है । शाक सब्जियों में भी आ रहा कृषि उत्पादन बढ़ रहा है हालांकि महंगाई के दौर में अब 40 रु. से नीचे कोई ग्रीन सब्जी का भाव नहीं है । टमाटर ने राहत दी है मगर आलू- प्याज की बंपर पैदावार के बावजूद  भाव दोनो का 20-25 रु. उपर ही है। माल संस्कृति में सरकार के दखल नहीं होने से दालों का भाव 120 से 140 रु. तक देखने में आया है जबकि खुले बाजार में दाले 70-90 रु. भाव तक होना देखी गई है । उपोक्ताओं की वाकपटुता के अनुसार थोक दालो का व्यापार 5000-7000 रु. के बीच है । अधिकांश दलहन 4000-6000 रु. है जबकि माल संस्कृति में 95-130 रु. का भाव है । काबुली चना डालर का भाव तो 110 रु. के उपर ही है । जबकि थोक भाव 5000-6000 रु. का है । देशभर में दालें पर उपभोक्ता मांग में भारी गिरावट है । जाहिर है कि खपत कम होने और आवक अधिक होने से स्टॉक बढ़ रहा है । मालों में कमोडिटी का भारी स्टॉक जमा है।  माल संस्कृति की महंगाई की आड़ में शहर प्रत्येक खेरची व्यापारी भी उसी लीक पर चलने लगा है । दूसरी तरफ खपत को बढ़ाने के लिये ऊंचा व्यापार जगत् मीडिया का सहारा लेकर मिल गत, पैदावार या स्टॉक की कमी की हवा को फैलाकर भावों को ऊंचा करने की कवायद कर रहे है ।

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