सोयातेल में मंदी-तेजी का रुख : सोयाबीन की आवक बढ़ी, भाव में मंदी

सोयातेल में मंदी-तेजी का रुख : सोयाबीन की आवक बढ़ी, भाव में मंदी
हमारे संवाददाता
इंदौर का वातावरण देखते हुए प्रतीत होता है कि मानसून की विदाई हो चुकी है । क्वांर मास की गर्मी तेज हो गई है खेतों से सोयाबीन की लगभग तीन-चौथाई फसल कट चुकी है । कृषि क्षेत्रों  की इस वर्ष किस्मत की पौबारह बनी हुई है । कृषि को इस वर्ष दो फायदे हुए। एक तो राजनैतिक जिसमें कृषि उत्पादनों के घटकें पर तय एमएसपी, दूसरे प्राकृतिक हुई बरसात की गति से अधिक फायदा अधिक मिला है । कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कृषकों को मिल रहे राजनैति फायदे का असर है कि इस वर्ष सोयाबीन का रकबा देशभर में कोई 7 प्रतिशत अधिक बोउनी का रहा बताया गया है ।  इससे सोयाबीन की पैदावार बढ़कर आ सकती है। खरीफ की कुल फसल सामान्य से अधिक उपज की संभावना है । गत् हप्ते सोयातेल पर कोई अधिक तेजी मंदी नहीं हुई । मगर टेरिफ बढ़ने से गत हप्ते बुधवार के मुकाबले गुरुवार को भारी तेजी में भाव 742-745 से उछलकर 748-750 रु. तक हो गये थे । अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजारों में हालांकि गुरुवार को गिरावट रही । मलेशियन केएलसीई शुक्रवार सुबह मायनस 6 चल रहा था और शिकागो सोयातेल वायदा भी मंदी में चल रहा था । व्यापारिक क्षेत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोया-पामतेल की तेजी का न बनना, सोयाबीन की अंतरराष्ट्रीय परिदृष्य में अधिक पैदावार का होना दूसरे विकसित देशों का ट्रेड-वार है । इससे बाजार व्यापार भी सहमा हुआ है । मांग का अधिक न होने के साथ ही  एक अन्य फेक्टर पेट्रो-क्रूड के बढ़ते भाव भी कई देशों में महंगाई को न बढ़ने देने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा हरा है  अगले वर्ष कई देशों में चुनावों का सीजन है । राजनैतिक पार्टिया दामन बचाने और रेवडिया बाटने में लगी है, इससे महंगाई पर भी टेढ़ी नजर है। इंदौर की थोक मंडीयों में सोयाबीन की  कोई 8000 बोरियों की दैनिक आवक शुरू  हो चुकी है । मंडियों से मिली खबरों के अनुसार हालांकि बंपर फसल और दिन-रात की जुगत वाले किसानों की जुगलबंदी से सोयाबीन भाव 3150-3200 रु. पर भी बिक रहा था । प्लांटों की खरीदी भी लगभग इसी भाव हो रही है। व्यापारिक क्षत्रों से मिली खबरों के अनुसार डालर में हो रही वृद्धि का असर देश में हो रहे आयातित माल में तेजी हो सकने की संभावना है । सोया और पाम तेल के आयात पर इसका भारी असर आ सकता । उनकी नजरों में  पामतेल उत्पादक देशो में अधिक निर्यात बायो डीजल के प्रयोग में जा रहा है । इससे वहा भविष्य में भाव वृद्धि रहेगी दूसरे देश में आयात महंगा हो रहा है । इससे खाद्यतेलों का भविष्य तेजी सूचक ही होना बताया जा रहा है । देश में इस वर्ष मूंगफली की भी पैदावार अच्छी रहेगी इससे तेल में तेजी की अधिक संभावना नहीं है । मूंगफली तेल में ताजा मांग से गत् हप्ते तेजी में रहा बताया जा रहा है ।  भाव 850 से 870 रु. तक होना बताया जा रहा था । सरसों तेल में  हालांकि भाव 845 रु. पर मजबूत ही थे । सरसों गत् हप्ते 3800 रु. से उतरकर 3650 से 3700 रु. तक होना बताई जा रही थी । विभिन्न प्लांटों सोयातेल का भाव 740-750 रु. तक रहा। गत् हप्ते इंदौर पामतेल का भाव 725-730 रु. रहा । बहरहाल इंदौर में गत् हप्ते इंदौर मूंगफली तेल 850 से 870 रु., मुंबई मूंगफली तेल 840-8745 रु., गुजरात लूज 840-845 रु. और राजकोट तेलिया 1330-1340 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड  748 से  750 रु., इंदौर साल्वेंट 710 से 715 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 745 से 748  रु., मुंबई पाम 685 रु. के भाव रहे। इंदौर पाम 720-730 रु.  इंदौर कपास्या तेल 735 रु., इंदौर सरसों तेल 845 रु. का भाव रहा।

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