रुपए की गिरावट के लिए घरेलू की तुलना में वैश्विक कारण अधिक जिम्मेदार

रुपए की गिरावट के लिए घरेलू की तुलना में वैश्विक कारण अधिक जिम्मेदार
इब्राहिम पटेल  
मुंबई। करेंसी बाजार में रुपया की धोबी पछाड़ के लिए घरेलू मुद्दों की तुलना में वैश्विक कारण अधिक जिम्मेदार है। रेटिंग एजेंसी के रेटिंग ने भी इस बात को प्रमाणित करते हुए कहा था कि चीन अमेरिका के ट्रेड वॉर में रुपया की अच्छी खासी धुलाई हुई है, उसके साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों का भी प्रभाव रुपया को कमजोर करने में देखा गया है। 2018 का साल शुरू होने के साथ ही यह गिरावट शुरू हुई थी। गुरुवार को इंट्रा-डे में डॉलर के सामने रुपया एक चरण पर 73.92 बोला गया था। इस साल रुपया की 15 प्रतिशत धुलाई के साथ एशियाई बाजार में सबसे कमजोर करेंसी साबित हुई है। इसकी वजह से बाजार में ऐसी हवा फैली है कि रिजर्व बैंक अपनी अगली पॉलिसी बैठक में ब्याज दर में अधिक वृद्धि करेगा। 
हालांकि, रुपया अकेले की ही धुलाई हुई है ऐसा नहीं है, तुर्की लीरा इस साल 40 प्रतिशत और अर्ज़ेंटीना पैसो 50 प्रतिशत फ्री फॉल घटा है। कई बैंकरों और करेंसी विश्लेषकों कहने लगे हैं कि रुपया अल्पावधि में 75 होगा। रुपया किस लिए 75 होगा उसके लिए कंई कारणों को वह देख रहे है। इन सभी में ऊंचे कच्चे तेल के भाव, करेंट एकाउंट डेफिसीट (सीएडी), फॉरेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर्स विद्रोअल्स, ऊंचे रियल इफेक्टीव एक्सचेंज रेट (रेर), मजबूत डॉलर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि आदि शामिल है। 
ब्रेंट क्रूड ऑईल का मौजूदा भाव 86.15 डॉलर प्रति बैरल है। वर्ष के प्रारंभ में भाव 66.57 डॉलर थे, वह अब तक में 28 प्रतिशत बढ़ा है। भारत अपनी कुल क्रूड ऑइल मांग का 81 प्रतिशत आयात करता है और वह अमेरिका एवं चीन के बाद का तीसरे नंबर का सबसे बड़ा आयातक देश है। एक ही साल में क्रूड ऑइल के भाव 100 डॉलर होने का पूर्वानुमान तो अधिक भयावह है। 4 नवंबर से अमेरिका का इरान पर लगने वाला व्यापार प्रतिबंध, 2019 में भाव को 100 डॉलर की ऊंचाई पर ले जाने के लिए मजबूर करेगा। ऊंचे कच्चे तेल के भाव भारत की सीएडी घाटा को अधिक ऊपर ले जाएगा, उसे देखते हुए भारत के लिए यह बूरी खबर है। 
वर्तमान वित्तीय साल की पहली तिमाही में सीएडी चौड़ी होकर 15.8 अरब डॉलर की हुई थी, जो ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (जीडीपी) का 2.4 प्रतिशत हिस्सा थी। पिछले साल की समान अवधि में यह 15 अरब डॉलर की थी। यदि सीएडी में इसी ही तरह घाटा बढ़ता रहेगा तो यह रुपए को अधिक कमजोर करने के लिए नेतृत्व करेगा, क्यूंकि कमजोर रुपया आयात डील के भुगतान में अधिकतम उपयोग करना पड़ता है। इकोनोमिस्टो का पूर्वानुमान है कि इलेक्ट्रोनिक सामान और क्रूड की आयात बढ़ रही होने से इस साल की जीडीपी में सीएडी का हिस्सा बढ़कर 2.7 से 2.8 प्रतिशत जितना ऊंचा रहेगा। 
वैश्विक बाजार में बढ़ रहे व्यापार तनाव के बीच सीएडी अत्यधिक चौड़ी हो जाने से विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय केपिटल मार्केट में से रु.21,000 करोड़ (3 अरब डॉलर) वापिस खिंच लिए थे, जो पिछले चार महीनों में सबसे अधिक आऊटफ्लो था। ऊंचे रियल इफेक्टीव एक्सचेंज रेट आम तौर पर करेंसी बास्केट के इंडेक्स के खिलाफ देश की करेंसी की प्रतिस्पर्धात्मकता का संकेत देता है और यह मुद्रास्फीति के प्रभाव को भी एडजस्ट करता है। जुलाई में ट्रेड-बेज़ रेर वेईटेज 115.32 था। यदि आयात बेज़ वेईटेज गिनते है तो 117.10 था, जो दर्शाता है कि भारत की करेंसी 17.1 प्रतिशत ओवर वेल्यूड है। 
यूएस फेड ने ब्याज दर दो से बढ़ाकर 2.25 प्रतिशत करने के बाद करेंसी बास्केट का डॉलर इंडेक्स 10 सप्ताह की ऊंचाई 95.54 पाइंट पर पहुंचा है। ब्याज वृद्धि सीधी ही अमेरिकी ट्रेज़री यिल्ड में वृद्धि करता है और यह निवेशकों को विदेश में से निवेश वापिस खिंचकर अमेरिकी ट्रेजरी बांड में ऊंचा मुनाफा मिलने से उसमें निवेश करने के लिए आकर्षित करता है।   

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