हाल की बारिश से गन्ने की पेराई विलंबित

हाल की बारिश से गन्ने की पेराई विलंबित
इस माह के दूसरे पखवाड़े से शुरू होने की उम्मीद 
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । नया चीनी उत्पादन एवं विपणन वर्ष 2018-19 (अक्टूबर-सितम्बर) पहली अक्टूबर का आगाज हो चुका है।बहरहाल पिछले दिनों बारिश होने के चलते गन्ने की पेराई होने में बिलम्ब हुई है।ऐसे में चालू मौसम में गन्ने की कटाई व पराई शुरु होने में लगभग एक पखवाड़े का समय लगेगा यानि चालू माह के दूसरे पखवाड़े से शुरु होने की उम्मीद है। 
देश की सरकारी चीनी मिलों का संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) के प्रबंधक निदेशक प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि इस वर्ष गन्ने की फसल अधिक होने के चलते चीनी मिलें गन्ने की पेराई जल्द शुरु करने वाली थी बहरहाल पिछले दिनों हुई बारिश के चलते गन्ने की कटाई व पेराई पूर्व नियोजिक समय पर शुरु नहीं हो पाई है।उन्होंने कहा कि कनार्टक में गन्ने की पेराई जल्द शुरु होती है बहरहाल वहां भी इस वर्ष पद्रह अक्टूबर के बाद ही चीनी मिलों का संचालन शुरु होगा।वहीं महाराष्ट्र सरकार ने 20 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरु करने का निर्णय किया है।उन्होंने कहा कि चालू मौसम के आरंभिक दो महीने में मिलें कच्ची चीनी यानि रॉ शुगर के उत्पादन पर जोर देगी क्योंकि कच्ची चीनी निर्यात की गुंजाईश है।उन्होंने कहा कि सफेद चीनी मिलों के गोदामों में काफी स्टॉक बचा हुआ है और फिलहाल खपत को लेकर सफेद चीनी की कमी नहीं है।जिसकों लेकर एक तरफ सरकारी चीनी उद्योग संगठन (एनएफसीएसएफ) की तरफ से कहा गया है कि पिछले वर्ष का चीनी के बकाया स्टॉक 100 लाख टन से अधिक है।वहीं निजी चीनी मिलों का अग्रणी संगठन इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) की तरफ से कहा गया है कि चालू मौसम 2018-19 में 350 लाख टन से अधिक चीनी उत्पादन होने की संभावना है।देश में चीनी की वार्षिक खपत 250-255 लाख टन है।ऐसे में अगले वर्ष चीनी का भंडार घरेलू खपत की तुलना में काफी अधिक है।ऐसे में चीनी के उत्पादन अधिशेष को विदेशों में खपाने को लेकर केद्र सरकार ने पिछले महीने चीनी उद्योग को उत्पादन में वित्तीय अनुमान और निर्यात को लेकर ढुलाई व संचालन लागत में सहायता की घोषणा की गई थी।उन्होंने कहा कि केद्र सरकार का यह हालिया कदम बेहद स्वागत योग्य है और इससे मिलों को चीनी निर्यात में होने वाले घाटे को पाटने में मदद मिलेगी।केद्र सरकार चालू मौसम 2018-18 को लेकर गन्ने के लाभकारी मूल्य (एफआरपी में 13.88 रुपए क्विंटल की दर से चीनी मिलों को राहत प्रदान करने का फैसला किया है।यह राशि सीधे किसानों के खाते में जमा की जाएगी। इसके अतिरिक्त निर्यात को लेकर चीनी की ढुलाई व अन्य संबंधित खर्च पर 1000 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति टन की दर से वित्तीय मदद की घोषणा की गई है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से चीनी मिलों को दी जाने वाली इस वित्तीय मदद का एक ही मकसद है कि देश से चीनी का निर्यात सुनिश्चित हो ताकि गन्ना किसानों को बकाये का भुगतान समय पर हो सकेगा।    

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