बिटकाइन में 37% की गिरावट के बाद भी निवेशक सोने के प्रति नहीं होंगे आकर्षित

इब्राहिम पटेल 
मुंबई । क्या बिटकॉईन की तुलना में सोना अधिक मुनाफ़ा देनेवाला पूंजी निवेश है? निवेशकों की ओर से यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है। यदि हम 2011 से भाव का आकलन करते हैं तो सोना के भाव 1900 डॉलर से 40 प्रतिशत घटकर 1230 डॉलर हुआ है, वह अभी भी नरमी का रूख रखता है। इससे विपरीत पिछले सात सालों में बिटकॉईन 30 डॉलर से 13,700 प्रतिशत के ऊछाल के साथ सोमवार को 3715 डॉलर हुआ था। वैसे देखा जाए तो सोना के भाव हाल ही में बढ़े है बिटकॉईन के बड़े पैमाने पर घटने के बावजूद, दोनों के बीच संबंध परस्पर विरुद्ध दिशा के है। पिछले एक साल की मंदी बाजार और कुछ महीनों में दुनिया की जानीमानी डिजीटल करेंसी बिटकॉईन 75 प्रतिशत घटकर नए मेल्टिंग स्टेज पर पहुंच गई है।
हालही के कुछ ही दिनों में बिटकॉईन के भाव 35 प्रतिशत लुढ़के है। यदि पिछले साल के 19500 डॉलर के सर्वोत्तम स्तर से देखते है तो क्रिप्टो करेंसी की यह भाव गिरावट, अभूतपूर्व मानी जाती है। यदि लंबी अवधि का विचार करते हैं तो, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की कड़ी नीतिया, कमजोर विकास दर की चिंताएं, डॉलर की घटने की मोमेंटम और निवेशकों का अमेरिकी ट्रेज़री की ओर अधिक आकर्षण सोना को समर्थनरूप बना रहेगा। पिछले सप्ताह सोना 0.70 प्रतिशत बढ़कर दो सप्ताह की ऊंचाई पर पहुंच गया था। कमजोर डॉलर के समर्थन पर सोना 1230 डॉलर के नजदीक रेंजबाउंड हुआ है।
क्रिप्टो करेंसी को साईड पर रखते है तो भी कच्चे तेल की गति से भाव गिरावट ने निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स में से हल्के हो जाने के लिए मजबूर किया है। मांग की तुलना में ऑईल की आपूर्ति गति से बढ़ रही है, उसके सामने मांग भी घट रही होने से बिकवाली की ताकत बढ़ गई है। दो सबसे बड़े उपभोक्ता देशों चीन और अमेरिका के बीच के ट्रेड वॉर ने अनिश्चितताओं को उजागर किया है। इसके बावजूद यदि सोना का वार्षिक भाव को देखते है तो यह पिछले साल नहीं बढ़े थे। जबकि क्रिप्टो करेंसी मार्केट में आज तक पांचवी बार रिकॉर्ड डाऊनफॉल करेक्शन देखा गया था। वास्तव में जनवरी से सोने के भाव 1360 डॉलर से घटकर 1230 डॉलर हुए है।
यदि दोनों एसेट्स के डेटा का अवलोकन किया जाए तो दोनों के बीच कोई सकारात्मक या नकारात्मक सहसंबंध ही नहीं है। यहां कहने का मतलब यह है कि क्रिप्टो करेंसी में बड़ी-बड़ी गिरावट आई होने से सोने के भाव बढ़े है, ऐसा कहना व्यापक रूप से अयोग्य माना जाएगा। देखने जाएंगे तो सोना की तुलना में क्रिप्टो करेंसी में निवेशकों ने करोड़ो रुपए खो दिए है। लेकिन सोना के भाव भी घटे है, यह उसके अलग आंतरप्रवाह की वजह से घटे है। यदि सोना और बिटकॉईन का लंबी अवधि का ट्रेंड का अभ्यास करते हैं तो 2009 में खोज़ किए गए बिटकॉईन ने सोना चमक को फीका कर दिया है। बिटकॉईन के वर्तमान भाव ट्रेंड को देखकर यदि कोई ऐसी दलील करता है कि बिटकॉईन 3000 डॉलर के अंदर ऊतर जाएगा तो उसका लाभ सोना को मिलेगा, तो यह गलत बात है।
अमेरिकी संसद के माजी सांसद रोन पोल ने किए एक सर्वे के आधार पर कहा था कि 22 से 37 साल के अधिकतम युवा निवेशकों ने अमेरिकी डॉलर और सोना की तुलना में लंबी अवधि के निवेश के रूप में बिटकॉईन की पसंदगी प्रथम करते है। ऐसे नवयुवा निवेशकों सोना की बजाय बिटकॉईन को पसंद करते है, उसमें उनका उद्देश भी स्पष्ट है, फाइनेंशियल बाजार का नया ट्रेंड भी डिजीटलाईजेशन की ओर अधिक आकर्षित है। अब सोना की खरीद-बिक्री में बड़ी वित्तीय संस्थानों और बैंकों ही सक्रिय रही है, जबकि युवा निवेशकों ऐसी पसंदगी नहीं करते, ऐसा नए कई अभ्यास में स्पष्ट मालूम हुआ है। लेकिन लंबी अवधि में तो फाइनेंशियल टेक्नोलोजीस (फिन्च), ब्लोकचीन और क्रिप्टो जैसी टेक्नोलोजी ही टिकाऊ भविष्य रखते है।

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