122 एमएम एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट को बनाने का काम अंतिम चरण में

70 किलोमीटर मार करेगा पहला स्वदेशी रॉकेट 
हमारे संवाददाता
कानपुर । देश का पहला ऐसा स्वदेशी रॉकेट बनाने में आइआइटी कानपुर डीआरडीओ की मदद करेगा जिसकी क्षमता 70 किलोमीटर तक कार करने की होगी।इस 122 एमएम एक्सटेंडेड रेंज रॉकेट को बनाने का काम अंतिम चरण में है।इसकी डिजाइन में खामियां दुरुस्त करने को लेकर डीआरडीओ के तहत आने वाले अर्मामेंट रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (एआरडीई) ने एक टीम गठित की है।जिसको लेकर टीम के चेयरमैन आइआइटी कानपुर के एयरोस्पेस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.के.घोष को बनाया गया है।
प्रोफेसर घोष ने कहा कि अभी तक इस प्रकार के रॉकेट देश में नहीं बनते ह।इन्हें रुस से मंगाकर असेंबल किया जाता है।15 किलामीटर ऊंचाई एवं 40 से 70 किलोमीटर दूर तक मार करने वाला यह पहला स्वदेशी रॉकेट होगा।इसका डिजाइन बनाया जा रहा है जो कि डिजाइन अभी तेयार किया गया है उसमें कुछ खामियां सामने आई है।इन्हें दुरुस्त करने को लेकर टीम बनाई गई है।इस रॉकेट की डिजाइन इस तरह से बनाई जा रही है कि लक्ष्य को भेदने में इसमें अपार क्षमता अपार होगी।इतनी रेंज के रॉकेट बनाने की तैयारी काफी समय से चल रही है।इस प्रोजेक्ट पर दो वर्ष तक काम चलेगा।इस दोनों प्रयोगशाला से लेकर खुले मैदान तक में परीक्षण किया जाएगा।

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