रुपया रिकार्ड निम्न स्तर से 6 प्रतिशत मजबूत होने से सरकार खुश

साल के अंत तक तलवार की धार पर रुपया/डॉलर की होगी कसौटी 
इब्राहिम पटेल 
मुंबई। डॉलर के सामने रुपया गुरुवार को रु. 69.95 छूने से, नवंबर एंड तक में देढ़ ही महीने में छह प्रतिशत मजबूत होने की घटना 2015 के बाद पहली बार दर्ज हुई। अमेरिकी फेडल रिजर्व के चेयरमैन जेरेमी पोवेल ने एक आकार्यजनक निवेदन में कहा था कि हम अब ब्याज दर वृद्धि के बारे में धीमा रुख अपनाएंगे, नतीजतन ऊभरती अर्थव्यवस्थाओं में राहत की भावना फैली थी। दो महीनों के बाद सेंसेक्स एक ही दिन में 1.5 प्रतिशत बढ़ा था। नीचे कच्चे तेल के भाव ने भी रुपया को मजबूत होने में मदद की है। शुक्र और शनिवार को अर्ज़ेंटीना में मिलनेवाली जी-20 बैठक में जिनपिंग-ट्रम्प डीनर डीप्लोसी में ट्रेड वॉर के बारे में अच्छा प्रतिसाद आएगा, ऐसा आशावाद भी बढ़ा है।
11 अक्टूबर को रुपया 74.48 के ऑल टाईम रिकॉर्ड लॉ दर्ज हुआ था, उसके बाद गुरुवार तक 6 प्रतिशत मजबूत हुआ है। इमर्जिंग मार्केट की करेंसी मजबूत होने की दो मुख्य वजहों कच्चा तेल और अमेरिकी ब्याज दर थी, यह दोनों अब सानाउकुल स्थिति में आ गए है। अब प्रमुख चिंता का विषय केवल यूएस-चीन ट्रेड वॉर है। इस संदर्भ में अब दोनों देशों के नेताओं जब इस विषय पर शनिवार को मिलेंगे, उसके चलते, घटना बहुत ही हाई-टेंशनवाली बन गई है। अमेरिकी फेड ने, अपने डॉलर ट्रेड के संदर्भ में बहुत ही सकारात्मक चरण जाहिर कर दिया है। सिंगापुर के एक करेंसी विश्लेषक ने कहा कि अब साल के अंत तक करेंसी बाजार में डॉलर तलवार की धार पर चलेंगा।
यदि डॉलर कमजोर होगा तो भारत और चीन जैसे देशों की करेंसी ट्रेडिंग खेल में वापिस आ सकती है, शायद यह घटना अब सोने की चमक (भाव) भी बढ़ा सकती है। कच्चे तेल की भाव गिरावट ने तो भारत की करंट और फिस्कल डेफिसीट, दोनों की चिंताएं हल्की कर ड़ाली है। 4 अक्टूबर को कच्चे तेल के भाव प्रति बैरल 86.74 डॉलर हुए तब बढ़ती ऑईल इंपोर्ट कोस्ट ने, कमजोर हो रहे रुपए के बारे में भारत सरकार की हवा बंद हो गई थी। बेशक, नसीब से उसके बाद अब तक में कच्चे तेल के भाव 31 प्रतिशत घटकर 59.70 डॉलर हुए है। कच्चे तेल के भाव 1 डॉलर बढ़े या घटे, भारत की करंट एकाउंट डेफिसीट में समानांतर 1.5 अरब डॉलर की घटबढ़ होती है।
करेंसी बाजार की मर्चंट (ऑफसोर) मार्केट में फरवरी से ही हाजिर और वायदा में डॉलर की मांग 9 से 14 अरब डॉलर जितनी व्यापक रहती थी, लेकिन इंटर बैंक मार्केट में यह ट्रेंड अपेक्षाकृत सकारात्मक था और डॉलर की आपूर्ति भी अधिक थी। `रूपी फॉर अ टर्न अराउंड` नामक स्टेट बैंक के इकोरेप अध्ययन रिपोर्ट में बुधवार को बताया गया था कि विशेष रूप से अगस्त से इंटर बैंक मार्केट के मर्चंट बैंक सेगमेंट में डॉलर की ऑवर सप्लाय कम होने लगी थी। इस घटना से यह साबित होता है कि करेंसी बाजार में रुपया कमजोर होगा। ऑईल मार्केटिंग कंपनियों के लिए रिजर्व बैंक ने स्पेशल विंडो खोलनी चाहिए और 4000 से 4500 लाख डॉलर की मांग को पूरा करना चाहिए।
भारतीय रुपया अब के बाद आनेवाले घरेलू जीडीपी, राजकोषीय घाटे (फिस्कल डेफिसीट), अमेरिकी जीडीपी और यूएस फेड मिनिट्स के आंकड़े जैसी घटनाओं पर निर्भर रहेगा। करेंसी डीलरों कहते हैं कि रिजर्व बैंक ने ओपन मार्केट ओपरेशन के लिए दिसंबर में अतिरिक्त रु.40,000 करोड डालने की घोषणा की उसके साथ ही केंद्र सरकार 2018-19 के वित्तीय वर्ष के फिस्कल डेफिसीट लक्ष्य पर मुकम्मल रहेगी, ऐसी खबर आने के बाद भारत के 10 वर्षीय बेंचमार्क बांड का यील्ड 0.09 प्रतिशत गति से घटकर 7.17 प्रतिशत हुआ था। राजनीतिक क्षेत्र में ऐसी अटकलें जल्दी से फैल रही है कि वर्तमान में आयोजित होनेवाले पांच राज्यों के चुनाव नतीजों 2019 के संसदीय चुनावों का दिशादौर तय करेगा।

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