राजस्थान में चुनाव, राजधानी में किसान रैली

चुनावी जंग का अंतिम दौर राजस्थान में है और रण मैदान राजधानी नई दिल्ली में है! हजारों किसान देशभर के लगभग 200 किसान मंडलों-संस्थाओं के प्रतिनिधि के रूप में राजधानी में आने से परिवहन प्रभावित हुआ है। 1975 से पहले और 1977 में जनता पार्टी की सरकार के पहले चौधरी चरण सिंह ने `बोटक्लब' क्लब के मैदान में किसान सभाओं का आयोजन किया था, उसकी याद ताजा कराती है। वास्तविकता है कि चुनाव की राजनीति में किसानों की समस्याएं महत्वपूर्व भूमिका अदा करती है, इस बार भी महाराष्ट्र - गुजरात में मराठा और पाटीदारों के आरक्षण आंदोलन के बाद अब किसान संसद का विशेष सत्र बुलाकर देशभर के किसानों को आखरी-संपूर्ण लोन-माफी देने की मांग कर रहे है और चाहते है कि कृषि उत्पादों का उचित प्रतिफल-भाव घोषित करने के लिए भी संसद में विधेयक पारित हो।
राजधानी में किसान सम्मेलन को मेघा पाटकर (नर्मदा आंदोलन करने वाली), योगेद्र यादव और महाराष्ट्र के राजू शेट्टी की नेतागीरी है। केद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए अनेक राहतों और सहायता का अमल शुरू किया है लेकिन चुनाव के कारण नीति विधेयक घोषणा नहीं की जा सकती। राजस्थान में मतदान के समय ही नई दिल्ली में किसान रैली आयोजित की गयी है।
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इमरान खान की मजबूरी
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत के साथ दोस्ती की बातें कर रहे है और कहते है कि पाकिस्तानी सेना, राजनीतिक पार्टियां और लोग भारत के साथ शांति चाहते है। मोदी ने नवाज शरीफ के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाया और मिलाया तब पाकिस्तानी आर्मी ने नवाज का कैसा हाल किया वह इमरान खान नहीं जानते? करतारपुर कोरिडोर की घोषणा से सिखों का राजी होना स्वाभाविक है- नवजोत सिद्धु की वाह-वाह पंजाब में होती है- जिससे भारत का प्रधानमंत्री बन जाने का उनका और इमरान का सपना उनको मुबारक। लेकिन खालिस्तानी सिख नेता को भरी सभा में गले लगाने के बाद सिद्धु कहते है कौन गोपाल-खालिस्तानी? पाकिस्तानी सेना और आईएसआई यात्रियों को खालिस्तानी पाठ पढ़ाये, जनरैल सिंह भिंडरांवाले की याद दिलाये, ऐसी पुरी संभावना है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालिया हो गई है। ट्रंप की चेतावनी और दबाव है, भारत- नरेद्र मोदी का भय है जिससे इमरान मुंह में शांति-दोस्ती का तिनका लेकर खड़े है...!

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