प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में सूखे जैसे हालात

प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में सूखे जैसे हालात
हमारे संवाददाता
देश में दलहन उत्पादक प्रमुख राज्यों में सूखे के चलते चना जैसी प्रमुख दलहन फसल का रकबा लगभग साढे नौ लाख हेक्टेयर तक घट गया है।ऐसे में चालू रबी फसल मौसम में दलहनों की कुल बोआई तेजी से पिछड़ रही है।जिससे केद्र सरकार के समक्ष चिंताएं बढ गई है।जिसको लेकर पिछले दिनों केद्रीय कृषि मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक हुई थी जिसमें चालू रबी फसल मौसम के तहत दलहनों की बोआई को लेकर गहन समीक्षा की गई।बहरहाल केद्रीय कृषि मंत्रालय को अभी भी चने की बोआई में सुधार होने का भरोसा है।
दरअसल देश के दलहन उत्पादक राज्य महाराष्ट्र के 26 जिलों के 151 ब्लॉक में सूखे जैसे हालात पैदा हो रखे ह।वहीं कर्नाटक के 23 जिलों के 86,आन्ध प्रदेश के 296,गुजरात के 51 और झारखंड के 191 ब्लॉक के अतिरिक्त उड़ीसा के नौ जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जा चुके ह।जिसके तहत देश में दलहन की खेती में बड़ी हिस्सेदारी इन्हीं राज्यों की है।जिसको लेकर केद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में चालू रबी फसल मौसम के तहत विभिन्न फसलों की बोआई को लेकर समीक्षा की गई।जिसके तहत सूखाग्रस्त राज्यों से प्राप्त सूचना के तहत कुछ जगहों पर नमी बढाने को लेकर खेत भरकर बोआई की कोशिश की जा रही है।ऐसे में आन्ध्र प्रदेश में 93 हजार,गुजरात में एक लाख,कर्नाटक में 2.29 लाख,मध्य प्रदेश में 1.12 लाख और महाराष्ट्र में 3.83 लाख हेक्टेयर तक क्षेत्रफल में चने की बोआइढ कम हुई है।जिसको लेकरइ केद्रीय कृषि मंत्रालय की इस बैठक में दलहन की बोआई को बढाने के अंतिम प्रयास करने  और इसकी भरपाई करने को लेकर आगामी खरीफ फसल मौसम में दलहन फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने का फैसला किया गया।वैसे तो चालू रबी फसल मौसम में ज्वार फसल की खेती का रकबा भी नौ लाख हेक्टेयर घट गया है।ऐसे में अब ग्वार की बोआई का समय भी समाप्त हो चुका है।वैसे तो चालू फसल मौसम की प्रमुख फसल गेहूं की बोआई का रकबा और उत्पादकता बढाने को लेकर राज्यों से कहा गया है कि वह किसानों को हर संभव मदद मुहैया कराएं।जिसके तहत बिजली की आपूर्ति बढाने और फसल सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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