शक्कर, नारियल में मांग घटने से मंदी

शक्कर, नारियल में मांग घटने से मंदी
हमारे संवाददाता 
इंदौर । इंदौर में मौसम का बदलाव महसूस होने लगा है। बाजार में अपेक्षित ग्राहकी का अभाव था । हालांकि व्यापारियों का मानना है कि लग्नसरा कि ग्राहकी अब बढ़ सकती है । विगत् हप्ते शक्कर का थोक भाव 3200-3250 रु. के मुकाबले 3170 रु. तक में मंदी में था । गत् हप्ते शक्कर का हालांकि खेरची भाव 35 रु. से घटकर 34 रु. तक होना बताए जा रहे थे । इंदौर में शक्कर की 7 औसत गाड़ी की आवके प्रतिदिन हो रही है। हालांकि महंगाई से किराना और दाल-दलहनों में कोई राहत नहीं थी । नारियल और खोपरा गोला में खेरची और थोक में आई कमी से मंदी रही । दोनों में ही व्यापारियें के पास स्टॉक अनबिका रह जाने से मांग में कमी का होना बताया जा रहा था । गोला 192 और बुरा 2400 से 3400 रु. भाव था वही नारियल 1500 रु. 250 भरती का भाव बताया गया है । शक्कर  मिलो के सामने इस वर्ष शक्कर का उत्पादन बढ़ने से  भरता जा स्टॉक  परेशानी का सब बन रहा है । निर्यात योजना भले सरकार द्वारा शक्कर उद्योगों को सम्हालने के लिये दी हो मगर उद्योग को विदेशी  मांग-व्यापार भी उपलब्ध होना जरूरी है। ऐसे में बढ़ता स्टॉक  घरेलु बाजार में मंदी ला सकता है । पूर्व में देश का शक्कर उत्पादन और वर्तमान उत्पादन में जीम-आसमान का अंतर आने लगा है । जनता की वाक पटूता कह रही है कि देश में उत्पादनों की कमी नहीं थी मगर शक्कर भाव पर कई प्रपंच बनकर भाव बढ़ने की कवायद उत्पादकों द्वारा बनती रहती है । उनके अनुसार इसके पीछे शक्कर उद्योगों की सेहत कह लो या फिर बढ़ते उत्पादन पर भाव को एक स्तर तक सम्हालना कह दो । इस कोशिश में आम जनता पर महंगाई का भार तो बनता ही है । इथेनाल के उत्पादन पर अब शक्कर उत्पादन बढ़ना ही है। उद्योगों को मालेसेस और ईथेनॉल दोनों तरफ से फायदा मिलना ही है । गत दैनंदिनी उपयोगों की वस्तुओं में दो पर राहते थी तो चार पर महंगाई असीम थी और अनुपात में महंगाई ही का अनुभव उन्हें हुआ । बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास जिस कदर स्टॉक भरा हुआ है इससे लगता है देश में कीचन मसाला उत्पादनों भी कोई कमी नहीं है। जनता के अनुसार  सट्टे में सटॉक अनुसार भावों को तेजी दी रही है । सस्ते का स्टॉक आर भाव पर अंध कमाई जनता से । देश का पैसा इस कदर जनता का बाहर जा रहा है । इस वर्ष सट्टे में किराना घटकों में जीरा, हल्दी, धनियां, राई, गरम मसाला घटक, भाव की में भारी ऊंचाई रही । वैवाहिक सीजन शुरू हो जाने से आगे किराना के भावों में किसी भी प्रकार से मंदी की संभावना सभी घटकों में नहीं बताई जा रही है । साबुदाना की वर्तमान में कोई अधिक मांग नहीं है, मगर भाव पूर्ववत् ही बने हुए रहे । थोक बोरी का भाव 3600 से 5150 रु. तक विभिन्न क्वालिटी का था । वरलक्ष्मी का भाव बोरे से 4550 रु. और पैकिंग एक किलो का 5400 रु. भाव था । सच्चा मोती लुज बोरी 4850 था और पैकिंग एक किलो में 5630 रु. था । हल्दी कांडी थोक में 137 रु. और 139 रु., किलो था। खेरची में इनका भाव 160 रु. 260 रु. क्रमश: था । जनता विश्लेषकों के अनुसार देश किराना घटकों का अधिक उत्पादन है उसी अनुसार भाव बढ़ते जा रहे है बजाए घटने के । यह एक व्यापारिक सट्टे का ट्रेंड हो गया है कि अधिक उत्पादन पर अधिक तेजी बनाई जाए जिससे सट्टे के अवसर अधिक बढ़ सके । त्योहारी सीजन खत्म होने से नारियल आर गोला की मांग घटती जा रही है । कालीमिर्च, जीरा और अन्य मसाला घटक पूर्ववत् बने रहे।

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