अल्युमिनियम कंपनियों की सितंबर तिमाही बिक्री पर असर

अल्युमिनियम कंपनियों की सितंबर तिमाही बिक्री पर असर
सस्ते आयात से स्वदेशी उद्योग को झटका 
भुवनेश्वर। मजबूत मांग और उत्पादन बढ़ने के बावजूद अल्युमिनियम कंपनियों की स्थानीय बिक्री सितंबर में पूरा होने से तिमाही अवधि के दौरान मंद रहा। अमेरिका-चीन के ट्रेडवार के कारण आयात बढ़ा। इसका अधिक असर तीन प्रायमरी-अल्युमिनियम उत्पादक कंपनी-हिन्डाल्को इंडस्ट्रीज, वेदांत और सरकार के अधीन नेशनल अल्युमिनियम कंपनी (नाल्को) की बिक्री पर पड़ा। इन कंपनियों की स्थानीय बिक्री मात्र 3.56 प्र.श. बढ़ी।
देश में अल्युमिनियम की मांग 2018-19 के दूसरी तिमाही अवधि में वार्षिक स्तर पर 16 प्र.श. बढ़कर 8.47 लाख टन हो गया। खपत भी 14 प्र.श. बढ़कर 16 लाख टन हो गई, लेकिन चीन और आशियन (एसोसिएशन आफ साउथ, ईस्ट एशियन नेशन्स) से सस्ते आयात के कारण स्थानीय बाजार पर भारी असर पड़ा। अमेरिका से भी आयात होते स्थानीय उत्पादकों की परिस्थिति दयनीय रही। उद्योग के सूत्रों का कहना है कि चीन से बनावटी कच्चे मालों का आयात सितंबर तिमाही में 13 गुना बढ़कर 66000 टन हो गया।
जबकि भंगार का आयात सितंबर तिमाही में वार्षिक स्तर पर 19 प्र.श. बढ़कर 6,44000 टन हो गया था, इसके कारण स्थानीय अल्युमिनियम उत्पादकों को भारी असर हुआ।
देश में अल्युमिनियम स्मेलटिंग का खर्च लगातार बढ़रहा है। कोयले का भाव भी आसमान पर है। उत्पादकों को अल्युमिनियम बनाने का खर्च प्रति टन 2000 डालर से भी अधिक आता है।
हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर सतीष पै ने कहा कि आयात में निरंतर वृद्धि और खर्च बढ़ने से स्थानीय बाजार में अधिक सप्लाई का सामना अल्युमिनियम उद्योग कर रहा है। कोयला और फर्नेस का भाव बढ़ने से खर्च बढ़ा है।

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