भाजपा आक्रामक बन रही है

लोकसभा के चुनावी जंग के लिए भाजपा और कांग्रेस की छावनियां सुसज्ज हो रही हø। कांग्रेस की वॉर कैबिनेट की मीटिंग हुई और प्रदेश समितियों की समीक्षा की गई। भाजपा की राष्ट्रीय समिति का दो दिवसीय अधिवेशन रामलीला मैदान में शुरू हुआ और अध्यक्ष अमित शाह ने एनडीए की सहयोगी पार्टियों के साथ भाजपा की बहुमत वाली सरकार बनने का दृढ़ विश्वास व्यक्त किया है। फरवरी में बजट सत्र मात्र दो सप्ताह का होगा, उसके दौरान और बाद में सरकार `अच्छे दिन' की अनुभूति करने वाले कदम घोषित करेगी। ऐसा लगता है कि विशेष ध्यान गरीबी की रेखा नीचे के परिवारों और मध्यम वर्ग पर होगा। जीएसटी में राहत और सवर्ण़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ा है। जीएसटी में दी गई राहत-मुक्ति सीमा में वृद्धि का लाभ भाजपा के परंपरागत वोट बैंक-व्यापारी वर्ग का मिलेगा। इसके साथ ही देशभर के किसानों को तेलंगाना की योजना जैसी नकद सहायता का लाभ देने की शुरुआत होगी। राजनीतिक मोर्चे पर राफेल के बारे में कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया है। अब कांग्रेस द्वारा इटालियन हेलीकाप्टरों के लिए किए गए सौदों का विवरण बाहर आएगा। माल्या और नीरव मोदी जैसे भगेड़ों की सम्पत्ति जप्त होने की जानकारी दी जाएगी। संक्षेप में भाजपा अब रक्षात्मक नहीं आक्रामक बनेगी। सीबीआई के आलोक वर्मा के केस में कांग्रेस को भारी झटका लगने के बाद भाजपा का उत्साह बढ़ा है।
सीबीआई के आलोक वर्मा को रुखसद मिली और उनके ठेकेदार कांग्रेस पार्टी का हाथ कमजोर हो गया है! सीबीआई के विवाद में राजनीति लाने का कांग्रेस का प्रयास विफल हो गया है। इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस का `राज-खेल' प्रकाश में आया। आलोक वर्मा को अवकाश पर उतार देने के सरकार के निर्णय के बाद कांग्रेस ने नरेद्र मोदी पर जोरदार प्रहार किया। मोदी सरकार पर नियंत्रण रखने वाली संस्थाओं की सत्ता खत्म कर रहे है ऐसा आरोप लगाया गया और सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को फिर से कुर्सी पर बैठाया तब उत्सव मनाया गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच का ``नियुक्त-समिति'' को निर्देश दिया और सात दिन का समय दिया लेकिन नरेद्र मोदी ने अविलंब समति की मीटिंग बुलाई प्रमाण बताया और सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सिकरी को भी भरोसा हो गया कि सरकार का निर्णय उचित है।
जीएसटी कासिल ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए वार्षिक टर्नओवर की न्यूनतम सीमा बढ़ाकर दुगुनी 40 लाख रु. की, उससे 60 प्र.श. करदाता जीएसटी के जाल से बाहर निकल सकेंगे। कम्पोजिशन स्कीम के लिए वार्षिक टर्नओवर की सीमा 1 करोड़ रु. से बढ़ाकर 1.50 करोड़ रु. की गई है। कम्पोजिशन स्कीम का लाभ लेने वाले व्यापारियों को हर तीन महीने पर टैक्स भरना पड़ेगा लेकिन रिटर्न वर्ष में एक बार भरना होगा। सेवा क्षेत्र को भी राहत दी गई है। 50 लाख रु. तक के टर्नओवर वाले सर्विस प्रोवाइडर को कम्पोजिशन स्कीम का लाभ मिलेगा उनको मात्र 6 प्र.श. टैक्स भरना होगा।
जीएसटी कासिल के निर्णय से छोटे-मध्यम व्यापार उद्योगों को भारी राहत होगी। इस क्षेत्र को लोन एक घंटे में मंजूर करने की घोषणा प्रमाण है कि सरकार उन्हें कितना महत्व दे रही है।
जीएसटी लागू होने के बाद सबसे अधिक तकलीफ छोटे और मध्यम उद्योगों को हुई थी। उनकी शिकायत थी कि जीएसटी के कारण उनका कारोबार अस्तव्यस्त हो गया है। ऐसी स्थिति में सिर्फ 8 दिन में लोन मंजूरी की घोषणा के बाद जीएसटी की मुक्ति सीमा 1 अप्रैल 2019 से दुगुनी करने का निर्णय इस क्षेत्र के लिए काफी लाभदायी होगा। समीक्षा के बाद जीएसटी दर उल्लेखनीय घटी है जिसके कारण ग्राहक उपयोग की अनेक चीजें सस्ती हो गयी है।
मध्यम वर्ग के लिए बनने वाले मकानों पर जीएसटी दर 12 प्र.श. से घटाकर 5 प्र.श. हो तो बिल्डरों और खरीददारों को भारी राहत मिलेगी। कन्ट्रक्शन उद्योग में भी सुधार आएगा। जीएसटी कासिल व्यवहारिक दृष्टि से विचार कर कर प्रणाली के अमल को और वास्तविक बनाए तो जीएसटी का लाभ पूरा मिलना शुरू हो सकेगा।''

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