नई मशीनरी के निर्णय का लाभ पुरानी यूनिटों को भी मिलना चाहिए

कपड़ा उद्योग को बचाने के लिए तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत: उद्यमी'
हमारे प्रतिनिधि
सूरत/ अहमदाबाद। राज्य सरकार द्वारा घोषित की गई नई टेक्सटाइल नीति से नए निवेशकों को फायदा होगा, लेकिन कपड़ा की स्थापित इकाइयों को किसी भी तरह का प्रत्यक्ष लाभ या प्रोत्साहन न मिलने से यहां के कपड़ा उद्योग में निराशा है। अभी तक महाराष्ट्र के नवापुर के साथ सूरत को स्पर्धा करनी पड़ती थी, लेकिन अब शहर में ही एक यूनिट को दूसरी के साथ स्पर्धा करनी होगी। कपड़ा उद्योग को उबारने के लिए तत्काल आक्सिजन देना जरूरी हो गया है।
दक्षिण गुजरात चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख हेतल मेहता ने कहा कि नई मशीनरी के निर्णय का स्वागत है। पुरानी मशीनरीवाली यूनिटों को भी लाभ मिलना चाहिए। नई कपड़ा नीति का किसी भी तरह से स्वागत नहीं है। वर्किंग कैपिटल का मुद्दा ही पूरा कपड़ा नीति से उड़ा दिया गया है।
फीआस्वी के चेयरमैन भरत गांधी ने भी घटी बिजली दर का लाभ सिर्फ नई इकाइयों को दिए जाने के बारे में नाराजगी व्यक्त की है।
पांडेसरा विवर्स एसोसिएशन के प्रमुख आशीष गुजराती ने कहा कि सूरत में 6.5 लाख पावरलूम्स है, उनको बिजली दर में कमी का लाभ देने के स्थान पर सरकार नई मशीन स्थापित करने वालों को लाभ देना चाहती है। सरकार के तत्काल आक्सिजन न देने पर कपड़ा उद्योग को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
टेक्सटाइल प्रोसेस हाउस के प्रमुख और उपप्रमुख - मस्कती महाजन अहमदाबाद के नरेश शर्मा ने कहा कि सब्सिडी हेतु नई इकाई रखने के लिए कहा गया है, लेकिन अब कांट्रैक्ट सिवाय कारीगर-मजदूर रखना लाभप्रद नहीं है।
पावरलूम डेवलपमेंट एंड एक्सपोर्ट काउन्सिल के पूर्व चेयरमैन भरत छाजेड़ ने कहा कि स्पिनिंग और जीनिंग में कोई राहत नहीं दी गई है। पुरानी यूनिटों को कोई राहत नहीं दी गई है।
गुजरात चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के अनुसार, नीति का मिश्र असर होगा क्योंकि उम्मीद से पालिसी कमजोर है। घरेलू चेम्बर और ट्रेड मंडलों की राय को ध्यान में नहीं लिया गया है। ग्रीनफिल्ड यूनिट के लिए 35 लाख रु. की सहायता बहुत कम है। वीविंग के लिए ब्याज में सहायता नहीं दी गई है।

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