जीनिंग, स्पीनिंग इकाइयों को नहीं मिलेगा प्रोत्साहन

गुजरात की नई टेक्सटाइल पॉलिसी'
लोन पर ब्याज में 6 प्र.श. तक की सब्सिडी भी समाप्त'
हमारे संवाददाता
सूरत। गुजरात की नई टेक्सटाइल पालिसी में जीनिंग, स्पीनिंग इकाइयों को प्रोत्साहन नहीं मिलेगा तथा लोन पर ब्याज में 6 प्र.श. तक की सब्सिडी भी समाप्त कर दी गई है। गुजरात सरकार की कपड़ा नीति की सूरत सहित दक्षिण गुजरात के वीवर्स आदि बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन इस पॉलिसी के प्रावधान देख कर खोदा पहाड़ व निकला चुहिया वाली कहावत चरितार्थ हुई है, प्राप्त जानकारी के अनुसार गुजरात सरकार ने नई पॉलिसी के तहत नई इकाई स्थापित करने वाले कपड़ा उद्यमी अथवा विवर आदि को लोअर टेंशन कनेक्शन के लिए 3 रु. व हायर टेंशन कनेक्शन लेने वाले को 2 रु. प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलेगी, यह नीति 4 सितंबर 2018 से 2023 तक लागू रहेगी, फेडरेशन ऑफ दक्षिण गुजरात विवर एसोसिएशन( फोगवा) के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि अन्य राज्य सरकारों की जो टेक्सटाइल्स पॉलिसी बनी है उससे वहां की इंडस्ट्रीज का उत्साह बढ़ा है, लेकिन गुजरात सरकार की पॉलिसी से हमें कोई बल मिलता नही दिखता, अन्य राज्यों की तरह गुजरात सरकार को भी राहत देनी चाहिए, जीरावाला बिजली दरों में राहत के लिए हमारी मांग जारी रहेगी, फोगवा के ही अन्य पदाधिकारी श्री मयूर गोलवाला के अनुसार नई इकाइयों के लिए राहत दर पर बिजली मिलने से पुरानी इकाइयां प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक पाएगी, गोलवाला ने कहा कि सूरत के तमाम विस्तारों में करीब 5.50 लाख पुरानी मशीनें संचालित है , अत: नई इकाइयों को जब घटी दर पर बिजली मिलेगी व पुरानी इकाइयां बढ़े हुए दामों में बिजली खरीद कर उत्पादन लेंगी तो उनका प्रतिस्पर्धा में टिकना मुश्किल ही है, अत: सरकार को इस प्रावधान पर पुन : चिंतन करना चाहिए, यह उल्लेखनीय हैं कि महाराष्ट्र में गुजरात की तुलना में पावरलूम इकाइयों के लिए बिजली दरें काफी कम है इस कारण अनेक इकाइयां गुजरात से सटे महाराष्ट्र के नवापुर विस्तार में स्थापित हो गई है, बिजली सब्सिडी की मांग नही स्वीकारे जाने से या यूं कहें कि दरों में कमी न होने से निटिंग, वीविंग व प्रोसेसिंग इकाइयों में महाराष्ट्र की इकाइयों से प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी, हालांकि नई इकाइयों के लिए गुजरात सरकार द्वारा घोषित की गई बिजली दरों से पावरलूम इकाइयों के पलायन अलबत्ता रुक जाएगा, सरकार की इस पॉलिसी में सूक्ष्म, लघु एंव मध्यम दर्जे की इकाइयों के लिए ब्याज सब्सिडी 6 प्रतिशत तय की गई है, पॉलिसी में लोन पैमेंट डिसब्रसमेंट अवधि में छूट तथा 30 लाख तक कि सब्सिडी नए निवेशकों के लिए घोषित की है, हालांकि व्यापारियों व विवरों का मानना है कि नए निवेशकों के कदम अब महाराष्ट्रा में पावरलूम उद्योग स्थापित करने से थम सकते है व गुजरात मे ही ये उद्यमी उद्योग स्थापित कर सकते है, बस मलाल पुरानी इकाइयों को बिजली में छूट नहीं देने की शेष रहेगी, गौरतलब है कि बिजली की दरें गुजरात का हवाला देकर कम कराने हेतु फोगवा व फियासवी दोनों संगठनों द्वारा किया गया था, फोगवा की ओर से कई बार सुझाव भेजे भी गए कि महाराष्ट्र सरकार की लचीली टेक्सटाइल्स पॉलिसी के चलते अनेक पावरलूम इकाइयां समीपवर्ती महाराष्ट्र के नवापुर में स्थापित हो रही है, इस पॉलिसी पर प्रतिक्रिया देते हुए साउथ गुजरात प्रोसेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जितुभाई वखारिया ने कहा कि टेक्सटाइल्स उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है अत: बिजली दरें कम होनी चाहिए माना कि महाराष्ट्र जितनी राहत न दें पाए लेकिन उससे आधी दर पर गुजरात सरकार राहत दें, हम इस सम्बंध में गुजरात सरकार का ध्यान आकर्षित कराएंगे, लक्ष्मीपति समूह के प्रबंधक संजय सरावगी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि टेक्सटाइल्स उद्योग को प्रोत्साहन देने हेतु गुजरात सरकार की नीति अन्य राज्यों की तरह लचीली होनी चाहिए थी लेकिन सरकार इसमें चूक गई, सरावगी ने कहा कि टेक्सटाइल्स प्रेसिंग उद्योग में बिजली लागत 35 प्रतिशत के करीब है, तथा वीविंग उद्योग में कपड़े को जो ट्विस्ट किया जाता है, उसमें बिजली की लागत ज्यादा है, सरकार को बिजली सब्सिडी बढ़ानी चाहिए थी।

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