रूस में गेहूं की कमी भारत के लिए गुड न्यूज

1000 लाख टन गेहूं की रबी फसल लेकर बाजार में उतरने की तैयारी :
शिकागो मर्क़ेंटाइल एक्सचेंज में गेहूं वायदा इस महीने पांच प्रतिशत बढ़ा
इब्राहिम पटेल  
मुंबई। जनवरी के प्रारंभ से वैश्विक गेहूं बाजार में पूंजी प्रवाह, 2018 के प्रारंभ में था उसकी तुलना में अधिक गति से बढ़ रहा है। इसकी वजह से फरवरी आते-आते बड़ी तेजी का आशावाद बढ़ा है। यूक्रैन और रूस द्वारा निर्यात अंकुशों की संभावनाएं बढ़ जाने से, रूसी गेहूं के भाव चार साल की नई उंचाई पर पहुंच गए है। रूस में निर्यातक गेहूं की कमी दिखने लगी है। यह घटना प्राथमिक चरण पर भारतीय गेहूं के लिए गूड न्यूज़ है। एक सरकारी अधिकारी ने पिछले सप्ताह कहा था कि भारत ऑल टाईम हाई 1000 लाख टन गेहूं की रबी फसल लेकर बाजार में उतरेगा। 
भारत में इस साल अब तक गेहूं की रबी कटाई 8 लाख हेक्टेयर घटकर 296 लाख हेक्टेयर में हुई है। 2017-18 में भी 997 लाख टन रिकॉर्ड उत्पादन हुआ था। उत्तर गोलार्ध में जैसे-जैसे सर्दियाँ आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे अगले तीन महीनों में गेहूं फसल के सामने जोखिम बढ़ जाएगा। जो भाव को ऊपर रखने में और बड़ी उथलपुथल सर्जित करने में सहाय करेगा। शिकागो मर्क़ेंटाईल एक्सचेंज में गेहूं वायदा इस महीने पांच प्रतिशत बढ़ा है, जो जनवरी 2018 के 6 प्रतिशत के नजदीक है। इस दौरान वर्तमान रफ वेदर गेहूं की आपूर्ति को अधिक कमजोर कर ड़ालेगा, वैसा ड़र है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि रूस अपने गेहूं पर पकड़ मजबूत करेगा तो, यह बाजार के गति देनेवाले नए मुद्दों को जोड़ेंगे। 
2015-16 में रूस रिकॉर्ड गेहूं फसल के साथ निर्यात बाजार में दाखिल होकर 2017-18 में 410 लाख टन निर्यात करके अमेरिका को पिछे छोड़ नंबर वन निर्यातक देश बन गया था। इस ओर अब यूक्रैन भी 2018-19 में मीलिंग और पशुआहार के गेहूं की समानांतर निर्यात द्वारा अंकुश रखेंगे। 18 जनवरी तक यूक्रैन ने कमिट किए सौदों की 80 प्रतिशत मीलिंग गेहूं की निर्यात कर ड़ाली है। पिछले साल के मध्य में निर्यात बाजार में भारी प्रतिस्पर्धा जमी थी, इसलिए उत्तर अमेरिका में अधिक कार्गो रवाना हुए थे। उसके बाद ब्लैक-सी के देशों में आपूर्ति कमी का साम्राज्य सर्जित हुआ था। नतीजतन अमेरिका और रूसी गेहूं के बिच का भावान्तर गति से शिकूड़ गया था। 
उसके बावजूद आज भी अमेरिका की तुलना में रूसी गेहूं सस्ते हैं और एफओबी धोरण से भावान्तर अब 15 डॉलर ही रहा है, जो अगस्त में प्रति टन 50 डॉलर था। अक्टूबर के प्रारंभ से रूसी गेहूं के भाव 10 प्रतिशत बढ़े है, जबकि अमेरिका के 6 प्रतिशत। रूस में विशेष रूप से पोर्ट नजदीकी टर्मिनल बाजारों में स्थानीय भाव बढ़े है। इसी वजह से हैंडी-साइज जहाज में 12.5 प्रतिशत प्रोटिन वाले गेहूं के भाव पिछले एक महीने में बढ़कर 246.5 डॉलर हुए है। 
पिछले दो दशक में गेहूं की वैश्विक निर्यात बढ़ते दर से बढ़ रही है, 2018-19 में निर्यात, 1998-99 में 1010 लाख टन की थी, वह 177 प्रतिशत बढ़कर 1790 लाख टन अनुमानित है। यह एक संपूर्ण बाजार है, यह कोई भी तरीके से स्थिर भी नहीं है। 2018-19 में वैश्विक अधिशेष 2642 लाख टन का अनुमानित है, जो बाजार के लिए बोझरूप है, लेकिन इनमें से 47 प्रतिशत स्टाक चीन के पास पड़ा है और यह निर्यात बाजार में नहीं आनेवाला है। अच्छी खबर यह है कि इस साल अंतिम (एंडिंग) स्टाक 4 प्रतिशत घटने की संभावना है। 

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