ओएनजीसी कायाकल्प के लिए सुसज्ज

अगले दो दशकें में तेल से अधिक गैस खोज व वितरण पर होगा ओएनजीसी का फोकस
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । तेल एवं गैस क्षेत्र की सरकारी कंपनी ऑयल एवं नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) अपना कायाकल्प करने का मसौदा तैयारर कर रही है।जिसके तहत ओएनजीसी अगले दो दशकों में न सिर्फ दुनिया की एक महत्वपूर्ण ऊर्जा कंपनी बनने का लक्ष्य रखा है बल्कि इसके माध्यम से वह कच्चे तेल पर भारत की मौजूदा निर्भरता को कम करने में भी अहम भूमिका निभाना चाहती है।
ओएनजीसी के चेयरमैन व मैनेंजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) शशि श्ंाकर ने ऐलान किया है कि ओएनजीसी विजन 2040 तैयार कर रही है।जिसे विजन 2040 को अभी कंपनी के पंबंधन की तरफ से गठित एक सतिति तैयार कर रही है जिसे केद्र सरकार की मंजूरी के बाद सार्वजनिक किया जाएगा।इसे तैयार करने में जुट अािधिकारियों की तरफ से कहा जा रहा है कि दुनिया के एनर्जी सेक्टर में जिस तरह से बदलाव आ रहा है उसे देखते हुए अगले दो दशकों में ओएनजीसी की गतिविधियों का केद्र कच्चा तेल नहीं बल्कि गैस होगा।कंपनी की सब्सिडियरी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (ओवीएल) की इसमें अहम भूमिका होगी क्योंकि वह एलएनजी टर्मिनल लगाएगी।यह एनएनजी टर्मिनल देश या विदेश में हो सकता है।वैसे तो ओवीएल ईरान में एक एनएनजी टर्मिनल लगाने की योजना पर पहले भी विचार कर रही थी जिसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। बहरहाल अधिकारी की तरफ से कहा जा रहा है कि भारत नियंत्रित चाबहार पोर्ट के पास अपना एनएनजी टर्मिनल एक बढिया विकल्प हो सकता है।जिसको लेकर कहा जा रहा है कि केद्र सरकार जिस तरह से भारत को दुनिया का एक प्रमुख रिफाइनिंग हब के तौर पर विकसित करती चाहती है जिसमें भी ओएनजीसी की अहम भूमिका होगी और यह विजन 2040 तक एक अहम हिस्सा होगा।वैसे तो ओएनजीसी ने डेढ वर्ष पहले एक अन्य सरकारी तेल कंपनी एचपीसीएल में 51.11 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी है जबकि एमआरपीएल नाम की एक रिफाइनिंग सब्सिडियरी है।जिसकी मौजूदा क्षमता 1.5 करोड़ है जिसे 2.5 करोड़ टन वार्षिक किया जा रहा है।ओएनजीसी की योजना दो दशकों में पूरे रिफाइनिंग कारोबार को एक कंपनी के तहत लाने की है।चूंकि पेट्रो-रसायन कारोबार को लेकर भी कंपनी की बेहद महत्वाकांक्षी योजना है।जिसके तहत ओएनजीसी की दो सहायक इकाइयों ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) और ओएनजीसी मøगलोर पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (ओएमपीएल) के कारोबार के बीच अगले पांच वर्ष़ों में काफी हद तक समन्वय हो जाएगा जिससे इनके एकीकरण की राह भी आसान होगी।वैसे तो विजन 2040 के माध्यम से ओएनजीसी दो दशक बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने में अपना योगदान देगी।

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