``महा-युद्ध'''' शुरू

लोकसभा के चुनावी जंग की शुरुआत हो चुकी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के महामंत्रियों और अन्य पदाधिकारियों से महायुद्ध के लिए तैयार हो जाने का आह्वान किया है। गरीबों और पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए न्यूनतम आय की योजना का विवरण शीघ्र तैयार हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी `डरपोक' हø, मेरे साथ सार्वजनिक में चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है ऐसा भी राहुल गांधी कहते हø। पदाधिकारियों की बैठक में प्रियंका गांधी ने भी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नवजीवन के लिए कुछ भी करने की तैयारी बताई है।
दूसरी ओर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने कांग्रेस पर भारी आक्रामक प्रहार कर भाजपा - एनडीए का उत्साह तथा आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने `कांग्रेसमुक्त' भारत की हिमायत की थी उसे याद दिलाकर प्रधानमंत्री ने कांग्रेस शासन के पंचावन वर्ष की तुलना एनडीए के पंचावन महीने के साथ की और गरीब-पिछड़े वर्ग के लिए वचन ही नहीं - ठोस कदम उठाने की जानकारी दी। राहुल गांधी पर सीधा आरोप लगाया कि भारतीय वायुसेना को कमजोर करना चाहते हø। किस विदेशी कंपनी के हाथ में खेल रहे हø?
नरेद्र मोदी ने कांग्रेस पर आक्रमण केद्रित किया है। महागठबंधन को `महामिलावट' का नाम देकर - पिछले तीस वर्ष में भारत ने ऐसी सरकारों का शासन देख लिया है ऐसा कहते हुए कांग्रेस के साथ सीधी लड़ाई-महायुद्ध - होने की घोषणा कर दी है।
संसद की दोनों गृहों की संयुक्त बैठक के समक्ष राष्ट्रपतिजी द्वारा दिए गए अविभाषण की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने वर्तमान लोकसभा में अंतिम भाषण देकर नई लोकसभा में भाजपा-एनडीए का बहुमत और सरकार होगी ही ऐसा विश्वास व्यक्त किया है। अब यह `महायुद्ध' - महाभारत के कुरुक्षेत्र में शुरू हो रहा है।
ममता बनर्जी ने महागठबंधन के लिए काफी प्रयास किया है। कर्नाटक से लेकर कोलकाता तक - बीस-बीस नेताओं को हाथ उठाकर खड़ा रखा है। हाल में सीबीआई के नाम पर लोकतंत्र बचाओ-संविधान बचाओ - शोर शराबा हुआ। कांग्रेस ने शुरुआत में समर्थन देने के बाद विचार बदला। मार्क्सवादियों के दबाव के कारण ममता के साथ रहना संभव नहीं है। इसके बावजूद अब नई दिल्ली में फिर से प्रयास होने वाला है।
कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद के एक मात्र दावेदार हø राहुल गांधी। महागठबंधन में ममता के अलावा अन्य नेताओं का स्वप्न है तब भाजपा में नीतिन गडकरी और अब नीतीशकुमार का नाम भी उछला है अथवा चर्चा में है। राहुल के बाद अब सोनियाजी ने भी नीतिन गडकरी के कामकाज की प्रशंसा की है - यद्यपि राजनीति में ऐसे दांव और दिखाने के दांत पर आश्चर्य नहीं है। चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे `नकली समाचार' और उसकी चर्चा चलती ही रहेगी। परंतु वस्तुत: जनमानस पर उसका प्रभाव पड़ेगा?

© 2019 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer