कपड़े की कमजोर बिक्री से धागे में मांग का अभाव

हमारे संवाददाता
आलोच्य सप्ताह में धागे के भाव पड़े हुए है। बाजारो मे  धागे का उठाव न होने से मिलों को धागा बेचने में इन दिनों कपड़ा मंडियों में धागा बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कपड़े का उठाव कम होने से कपड़ा उत्पादक भी मंदी की मार से उबर नहीं रहे है। चादरों में थोड़ा कामकाज होने से
मंडी में काम करने वाले कारोबारियों का मनोबल बना है। बाजारों में भुगतान की स्थिति सामान्य ही है।  
व्यापारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार धागे का उठाव उत्तर प्रदेश के कानपुर,  मेरठ, सरधना , मोदीनगर, मुरादनगर, पिलखुवा  हापुड, के अलावा हरियाण की अनेक कपड़ा मंडियों में इन दिनों कपड़े की कमजोर बिक्री के चलते ही कम बन रहा है। जब कपड़े का उठान नहीं सुधरेगा तब तक सूत मिलों की धागे की बिक्री में सुधार होने वाला नहीं  है। बाजारों में इन दिनों बढ़िया मिलों के धागे से कपड़ा कम ही बन रहा है। कपड़ा मंडियों में कपड़ा जो भी बन रहा है  क्वालिटी के नाम पर कुछ नहीं बन रहा है। ज्यादातर अच्छे धागे होने के बाद भी हल्की क्वालिटी के माल ही बन रहे है। 
चादर मे काम करने वाले कारोबारियों का कहना है कि इन मौसम छपाई के हिसाब से साथ नहीं दे रहा है। सुबह को छपाई की टेबिल पर काम चलता है जब तक पूरा काम भी शुरू नहीं हो पाता तब तक घटाघूम व वर्षा होने लगती है। वर्षा के चलते मालों पर छपाई भी सही ढंग से नहीं बैठती है।  इन दिनों के तैयार होने वाले मालें मे कपड़ा उत्पादकों को नुकसान हो जाता है। कपड़ा उत्पादकों का कहना है कि मंडी में इन दिनों जैसा काम होना चाहिये ऐसा काम नहीं है। महाराष्ट्र की मंडियों में काम करने वाले सप्लायरों का कहना है कि चादर में ही आर्डर है अन्य कपड़ों की आईटम मे माँग नहीं है। बाजारों में मौसम के साफ होने के बाद ही कामकाजों के चलने की व्यापारियों को आशा है।

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