फ्यूजिबल इंटरलाइनिंग पर 12 प्र.श. व सामान्य कपड़े पर

पांच प्र.श. जीएसटी से बढ़ी असमान स्पर्धा
ट्रिब्यूनल के विपरीत फैसले से उलझन बढ़ेगी : चीन से आयात हो रहे इंटरलाइनिंग में गलत डिक्लेरेशन व अंडर इन्वोइसिंग
देवचंद छेड़ा
मुंबई । कपड़े पर जीएसटी की दर पांच प्र.श. है जबकि एचएसएन कोड 5903 के अंतर्गत इंटरलाइनिंग पर 12 प्र.श. जीएसटी लागू है। इसमें चेन्नई ट्रिब्यूनल ने मदूरा कोट्स के केस में व दिल्ली हाईकोर्ट के 21 जनवरी 2019 के फैसले के कारण उद्योग में उलझन बढ़ी है और सभी स्पष्टता का इंतजार कर रहे है।
इंटरलाइनिंग का उपयोग खासकर शर्ट की कालर, कफ, पट्टी बेल्ट होल में हो रहा है। इसमें एसडीपीई का उपयोग छोटे-छोटे दर्जी करते है। ये जीएसटी के उपर डय़ूटी क्रेडिट का लाभ नहीं ले सकते हø। इससे वे डय़ूटी नहीं भरे हुए माल को लेने के लिए प्रेरित होते है। इससे सीटीए इंटरलाइनिंग पर लागू जीएसटी की दर 12 प्र.श. से घटाकर पांच प्र.श. करने की सरकार से मांग की है।
इंटरलाइनिंग में संगठित क्षेत्र में रुबी मिल, आशिमा मिल, मदुरा, कोटस मिल और तलरेजा ग्रुप है। बाम्बे डाइंग और स्टडर्ड मिल अब उत्पादन में नहीं है, लेकिन उसकी सुविधाओं का तलरेजा ग्रुप ने अधिग्रहण कर लिया है। बाकी भारत में 80% बाजार हिस्सा विकेद्रित क्षेत्र के हाथ में है। इसके अलावा चीन से इंटरलाइनिंग की डम्पिंग काफी होती है। चीन के मालों में अंटरइंवाइसिंग और गलत डेक्लेरेशन की मात्रा अधिक है।
जीएसटी का अमल जुलाई 2017 से शुरू हुआ तब से इंटरलाइनिंग पर 12% जीएसटी लगती है। इसके बावजूद 19-6-2018 के कस्टम ट्रिब्यूनल के साउथ जोनल बेंच ने मदुरा कोट्स के केस में दिए गए आदेश के तहत मुदरा कोट्स 5% जीएसटी भरती है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा 21 जनवरी, 2019 में दिए गए अंतरिम आर्डर में टैक्स रेट 12% से घटाकर 5% किया नहीं है, लेकिन इस बारे में स्पष्टीकरण न होने तक 7% फर्क जीएसटी आथारिटी के पास अलग एकाउंट में जमा करने के लिए कहा है। इसकी आगामी सुनवाई 9 अप्रैल, 2019 को शुरू की जाएगी। वहां तक इंटरलाइनिंग के बारे में व्यापार उद्योग में अस्पष्टता जारी रहेगी।
इस समय प्रमाणिक रूप से 12% जीएसटी भरने वाले को माल महंगा पड़ता है जबकि विकेद्रित क्षेत्र में जो इकाइयां कर चोरी करती है, उनके माल और चीन के आयातित माल सस्ते पड़ते है। इस अनुचित स्पर्धा को रोकने और जीएसटी की निश्चित दर के बारे में स्पष्टता करने की संगठित क्षेत्र के उद्योगों ने मांग की है।   

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