चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य प्रति किलो रु. दो बढ़ाने का ऐलान

चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य प्रति किलो रु. दो बढ़ाने का ऐलान
गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में चीनी मिलों को मिलेगी सहूलियत : उपभोक्ताओं को चुकानी होगी चीनी की खरीद पर अधिक कीमत
हमारे संवाददाता
पिछले काफी अर्से से लागत मूल्य से कम दर पर चीनी की बिक्री हो रही थी।जिससे घरेलू चीनी उद्योग के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से चीनी उद्योग को राहत प्रदान करने की घोषणा की गई है।जिसके तहत चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में दो रुपए किलो की वृद्वि की गई है जो कि 29 रुपए किलो से बढकर 31 रुपए किलो की गई है।ऐसे में केद्र सरकार के इस प्रावधान के बाद खुले बाजार में चीनी की बिक्री किसी भी हाल में 31 रुपए किलो से नीचे नहीं जा सकेगी।जिससे स्वभाविक है कि अब उपभोक्ताओं को चीनी खरीदी करने पर अधिक कीमत चुकानी होगी।
दरअसल पिछले काफी अर्से से घरेलू बाजार में चीनी का स्टॉक लगातार बढने से चीनी की कीमत घट रही है।जिससे चीनी मिलों को नुकसान उठारना पड़ रहा था।जिससे चीनी के निर्यात पर दबाव की बाध्यता के बावजूद अधिकतर चीनी मिलों ने चीनी का निर्यात नहीं किया है।जिससे भी चीनी मिलों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो रखा है।जिससे घरेलू चीनी उद्योग पर गन्ना किसानों का 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान हो रखा है। जिसको लेकर घरेलू चीनी मिलों का तर्क था कि 29 रुपए किलो चीनी की बिक्री करने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिसको लेकर भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) की तरफ से काफी समय से चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य 35 रुपए किलो की गुजारिश की जा रही थी।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य को लेकर यह शर्त रखी थी चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य बढोतरी के बाद चीनी मिल केद्र सरकार से सब्सिडी की मांग नहीं करेगी।जिसको लेकर जिसको लेकर कैबिनेट सचिवों की समूह की 14 फरवरी 2019 को नई दिल्ली में एक अहम बैठक हुई थी।जिसमें चीनी बिक्री करने को लेकर चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपए किलो से बढाकर 31 रुपए किलो कर दी गई है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से चीनी उद्योग की अर्से पुरानी मांग पर ही यह फैसला लिया गया है।ऐसे में स्पष्ट रुप से माना जा रहा है कि इससे गन्ना किसानों को बकाया भुगतान में चीनी मिलों की विशेष सहूलियत मिल जाएगी।बहरहाल इस फैसले से खुले बाजार में चीनी की कीमत बढेगी जिससे स्वभाविक है कि आम उपभोक्ताओं को चीनी की खरीदी पर अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष केद्र सरकार की तरफ से जून में चीनी उद्योग के समक्ष आर्थिक तंगी को दूर करने को लेकर 7000 करोड़ रुपए की पैकेज की घोषणा थी और चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 29 रुपए किलो निर्धारित की गई थी।जिसको लेकर केद्र सरकार के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से भी चीनी मिलों को गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान को लेकर 4000 करोड़ रुपए ऋण देने की घोषणा की गई थी।जिसके बावजूद चीनी मिलों की तरफ से किसानों के गन्ना बकाये का भुगतान करने में असफल रही है।जिसको लेकर पिछले दिनों देश की चीनी मिलों की अग्रणी संगठन भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा था कि जनवरी के अंत में गन्ने का बकाया लगभग 20,000 करोड़ रुपए है।ऐसे में देखना यह होगा कि क्या चीनी मिलें अब गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान कर पाएगी जिसको लेकर केद्र व राज्य सरकारों के समक्ष विशेष रुप से उत्सुकता लगी हुई है।

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