अमेरिकी संसद का नोपेक कानून कच्चे तेल में मचाएगा उथलपुथल

अमेरिकी संसद का नोपेक कानून कच्चे तेल में मचाएगा उथलपुथल
उत्पादन कटौती करार पर पुर्नविचार के लिए अप्रैल 17 और 18 को ओपेक बैठक वियेना में मिलेगी
इब्राहिम पटेल
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (संसद) ने पिछले सप्ताह नोपेक या नो ऑइल प्रोड्यूसिंग एंड एक्स्पोर्टिंग कार्टेल्स एक्ट 2019 कानून जारी करके ज्यूडिसरी कमिटी को भेज दिया और अब संसद के दोनों गृहों में संयुक्त मतदान के लिए रखा जाएगा। संबंधित वैश्विक व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय आइल कंपनियों जिसे इस कानून से नुकसान होनेवाला है, उनका विरोध अनदेखा करके यदि यह प्रस्ताव कानून बन जाएगा तो, जो ओपेक सदस्य देशों ने कच्चे तेल के भाव फिक्सिंग की प्रवृत्ति शुरू करेंगे उनके खिलाफ अमेरिकी सरकार कानूनी कारवाई करने का हक्कदार बन जाएंगे। अमेरिकी संसद का नोपेक कानून कच्चे तेल में उथल-पुथल मचाएगा। आइल कंपनियों ने और उनके लॉबी ग्रूपों ने तो प्रत्याघातित्मक के रूप में कह दिया है कि ऐसा करने से अमेरिकी कंपनियों की पोल खूल जाएगी और अमेरिकी सरकार के संबंधों में दुनिया के सामने खराब होंगे। 
ऐसे विफल प्रस्तावों पिछले 20 सालों में अमेरिकी संसद के समक्ष लगातार आए थे, लेकिन वर्तमान प्रस्ताव पसार हो जाने के संयोग उज्ज्वल है। क्यूंकि लंबे समय से राष्ट्रपति ट्रम्प ओपेक के ऐसे नकारात्मक वलण से सख्त नाराज है। कार्गो ट्रेकिंग सर्वेयर केप्लर के मतानुसार पिछले महीने ओपेक देशों में से अमेरिका की ओर बहता कच्चे तेल का प्रवाह पिछले पांच सालों में सबसे कम था। अन्य एक इंटेलिजेंस कंपनी का कहना है कि पर्सियन गल्फ से अमेरिका की ओर जाने वाला कच्चा तेल दिसंबर की तुलना में जनवरी में 36 प्रतिशत घटा था जो अगस्त की तुलना में 60 प्रतिशत कम दिखलाता है। 
शुक्रवार को अमेरिकी रिग काउंट एजेंसी बाकर ह्यूजिस ने कहा था कि 8 फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में आइल रिंग की संख्या 7 बढ़कर 854 हुई थी, यह दर्शाता है कि अमेरिका प्रति दिन औसतन 119 लाख बैरल कच्चा तेल निकालता है, उसमें अधिक वृद्धि हुई थी। ओपेक प्लस देशों ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति घटाने के लिए 2017 से लगातार उत्पादन कटौती की है। वर्तमान कांट्रैक्ट के मुताबिक वह प्रति दिन 12 लाख बैरल की उत्पादन कटौती कर रहा है, जो कांट्रैक्ट जून में खत्म हो जाएगा। यह कांट्रैक्ट के बारे में पुर्नविचार करने के लिए 17/18 अप्रैल को ओपेक बैठक वियेना में मिलेंगी। 
एनर्जी इंफोर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक व्यापारी अनुमान से 13 लाख बैरल अधिक बढ़ा था। वेनेज़ुएला पर अमेरिका व्यापार प्रतिबंधों और ओपेक द्वारा उत्पादन कटौती को ध्यान में रखते हुए इस सप्ताह कच्चे तेल का वायदा छोटी घटबढ़ के साथ टकराएगा। चीन अमेरिका के बीच का व्यापार टकराव और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में गतिशीलता का अभाव, मांग पर प्रभाव ड़ालेगा, इसे देखते हुए भाव पर दबाव बना रहेगा। शेयर बाजार में भाव गिरावट की आशंका और मजबूत डॉलर भी कच्चे तेल के भाव पर प्रभाव खड़ा करेगी। तेजड़ियों की प्रमुख समस्या यह है कि एक ओर आपूर्ति कमी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है, लेकिन मांग कमजोर है। 
पिछले महीने इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने कहा था कि मांग वृद्धिदर स्थगित हो जाने की संभावनाओं को देखते हुए इस साल औसतन भाव एक साल पहले की तुलना में नीचे रहेंगे। अब हमे गुरुवार के पूर्वानुमान तक इंतेजार करना होगा, उसके आधार पर पता चलेंगा कि भाव का दिशादौर क्या होगा। इस महीने अब तक भाव प्रमाण में शांत रहे है, जो मांग के लिए सकारात्मक माना जाता है, लेकिन अर्थव्यवस्थाओं के लिए इह घटना नकारात्मक मानी जा रही है। अब यदि तेजड़ियों जनवरी बॉटम से बाजार में दाखिल हुए होंगे तो वह भाव को ऊपर ले जाने के लिए प्रयास करेंगे।

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