अति धनवान लोगों की वैश्विक वृद्धि में सबसे आगे भारत

अरबपतियों की तादाद में 116% की वृद्धि : नाइट फ्रøक वेल्थ रिपोर्ट
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई। वर्ष 2018 से 2023 के बीच एशिया में अरबपतियों की तादाद अन्य क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा तेजी से बढ़ेगी। यह खुलासा हुआ है `द वेल्थ रिपोर्ट' के 13वें संस्करण के लिए एक्सक्लूसिव रूप से जुटाए गए आंकड़ों में। अगले चार वर्ष में इस क्षेत्र में अरबपतियों की संख्या 27% बढ़कर 1,003 तक पहुंच जाएगी। इस दौरान उत्तरी अमेरिका (17%) और यूरोप (18%) में यह बढ़ोत्तरी एशिया की तुलना में काफी कम रहेगी। तब दुनिया में कुल 2,696 अरबपति होंगे, यानी उनकी एक-तिहाई से ज्यादा आबादी एशिया में होगी।
बहरहाल, बढ़ोत्तरी की यह रफ्तार 2013 से 2018 के पिछली मापी गई अवधि की तुलना में धीमी है, जब इस क्षेत्र में अरबपतियों की संख्या 363 से बढ़कर 787, यानी दोगुनी से भी अधिक हो गई थी। भारत में 2013 से 18 के बीच अरबपतियों की संख्या 116% का इजाफा हुआ है, जबकि अगले पांच वर्ष (2018-23) में यहां 39% बढ़ोत्तरी का अनुमान है। भारत की यह गति वैश्विक और क्षेत्रीय औसत को पीछे छोड़ देती है।
2018 और 2023 के बीच एशियाई देशों में यूएचएनडब्ल्यूआई की तादाद में सबसे तेजी से वृद्धि होगी। 30 मिलियन अमेरिकी डालर या उससे ज्यादा की कुल परिसंपत्ति वालों को अल्ट्रा-हाई नेट वर्थ इंडीविजुअल माना जाता है। 59 देशों और क्षेत्रों में भावी विकास के लिहाज से शीर्ष दस देशों से 8 एशिया से है। शेष दो स्थानों पर यूक्रेन और रोमानिया है।
39% की बढ़ोत्तरी के साथ भारत आगे रहने वाला है, जबकि फिलीपींस (38%) और चीन (35%) उसके ठीक पीछे होंगे। 2019 की चुनावी अनिश्चितताओं के बावजूद, अगले पांच वर्ष में भारत की संपत्ति बढ़ने की उम्मीद है और इस दौरान नेट वर्थ वाले लोगों की संख्या बढ़कर 2,697 हो जाएगी। फिलीपींस में 2023 तक 296 यूएचएनडब्ल्यूआई होने का अनुमान है।
नाइट फ्रक एशिया पैसिफिक के रिसर्च प्रमुख निकोलस होल्ट ने कहा कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं की गति कम होने के बावजूद, एशिया में विकास की संभावनाएं मध्यम अवधि में अनुकूल बनी हुई है। जहां चीन की अर्थव्यवस्था धीमी होने का अनुमान है, वहीं भारत और फिलीपींस जैसे उभरते बाजार आने वाले वर्ष में सबसे मजबूती से तरक्की करेंगे।
निकोलस होल्ट ने आगे कहा कि अमेरिका-चीन के बीच व्यापार तनाव को लेकर अनिश्चितता, चीनी आर्थिक मंदी और प्रेक्जिट ने अगले बारह महीनों के लिए क्षेत्रीय धारणा को प्रभावित किया है। जहां इनमें से किसी भी स्थिति में गिरावट इस धारणा को और प्रभावित कर सकती है, वहीं एशिया विश्व अर्थव्यवस्था के प्रमुख विकास इंजनों में से एक बना रहेगा। नाइट फ्रक इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा कि दुनिया के 63% अल्ट्रा-हाई-नेट-वर्थ वाले लोगों ने 2018 में अपनी संपत्ति में एक तीव्र उछाल देखा, जो कि साफ तौर पर दुनिया भर में आर्थिक आशावाद को जाहिर करता है। 

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