मैन-मेड टेक्सटाइल उद्योग का होगा कायाकल्प

मैन-मेड टेक्सटाइल उद्योग का होगा कायाकल्प
हमारे प्रतिनिधि
मुंबई । कृत्रिम तरीके से निर्मित एवं उससे बने टेक्सटाइल की मांग बढ़ने से मैन-मेड टेक्सटाइल उद्योग का कायाकल्प होने की संभावना पैदा हुई है। खास तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने के बाद मानव-निर्मित धागे की कीमतें तयकर पाना अधिक आसान हो गया है। वस्तुत: कृत्रिम धागा बनाने का इकलौता कच्चा माल कच्चा तेल ही है।
कच्चे तेल के दाम 1 फरवरी के बाद से लगातार 60 डालर प्रति बैरल से उपर चल रहे हø। इससे कृत्रिम धागे, टेक्सटाइल उत्पादकों को लंबे समय के लिए अपने उत्पादों के दाम तय करने में सहजता हुई है। इससे मानव निर्मित धागा एवं टेक्सटाइल निर्माताओं को बड़ी राहत मिली है। ये निर्माता नवंबर 2016 में नोटबंदी होने और फिर जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से ही भारी दबाव में थे। सरकार के इन क्रांतिकारी कदमों के पहले कृत्रिम धागे के कारोबार का बड़ा हिस्सा नकद में ही लेनदेन करता था। लेकिन नोटबंदी एवं जीएसटी आने के बाद नकद लेनदेन लगभग गायब ही हो गया।
टेक्सटाइल उद्योग के अनुसार फिर से मांग निकलने से मानव-निर्मित धागे एवं कपड़े का कारोबार रफ्तार पकड़ रहा है। कच्चे तेल के दाम में उठापटक होने से दिसंबर तिमाही काफी अस्थिर रही। लेकिन उसके बाद कच्चा तेल काफी हद तक स्थिर रहने से कृत्रिम धागे एवं कपड़े के कारोबार में भी स्थिरता आई है।
इस टेक्सटाइल की मांग में आई तेजी का असर निर्माताओं के शेयरों में भी देखने को मिला है।
भारत के मानव-निर्मित टेक्सटाइल निर्माता वैश्विक बाजार का बड़ा हिस्सा हासिल करने की होड़ में लगे हुए हø। इन धागों के सबसे बड़ा उत्पादक चीन में मजदूरी की लागत बढ़ गई है। टेक्सटाइल उद्योग का मानना है कि चीन में मजदूरी लागत 1,100 डालर प्रति माह के स्तर तक जा पहुंची है जबकि भारत में यह लागत 200 डालर ही है।
यह स्थिति भारतीय धागा उत्पादकों के लिए काफी अनुकूल है। इस मौके को भुनाने के लिए मानव-निर्मित धागा एवं टेक्सटाइल बनाने वाली कंपनियां अपनी क्षमता का विस्तार कर वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। फिलाटेक्स इंडिया ने 275 करोड़ रु. का निवेश करने की योजना बनायी है।
जमीन की सीमित उपलब्धता एवं कीमतों में अस्थिरता के कारण कपास का अधिक उत्पादन नहीं हो पाता है। ऐसे में भारतीय वर्ष बाजार के वर्क्ष 2015 तक 300 अरब डालर तक पहुंचने के लिए जरूरी है कि कपास के साथ-साथ मानव-निर्मित धागों पर भी जोर देने की जरूरत है।

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