ग्राहकी सीमित, ग्रीष्मकालीन सीजन की तैयारी जोरों पर

ग्राहकी सीमित, ग्रीष्मकालीन सीजन की तैयारी जोरों पर
हमारे संवाददाता
नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल ने उन उद्योगों को आपरेशन न करने के निर्देश दिये है जो इफ्युलेंट प्लांट के नियम पूरे नहीं करते और जिनमें प्राइमरी ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है। एनजीटी ने लूणी नदी के प्रदूषण युक्त होने का कारण वस्त्र उद्योग को मानकर टेक्सटाइल इंडस्ट्री से हुए लूणी नदी के नुकसान के लिए राज्य सरकार पर तीन करोड़ रुपयों का जुर्माना लगाया है जिसे एक माह के भीतर सरकार को केद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में जमा करवाने है। इसके साथ ट्रिब्युनल ने सरकार से एक्शन प्लान समय सीमा सहित मांगा है कि नदी के प्रदूषण रोकने के लिए कैसे काम किया जाएगा और इसके लिए दस करोड़ रुपयों की गारन्टी देने के आदेश दिये है। राष्ट्रीय हरित ट्रिब्युनल ने बालोतरा, जसोल व विठूबा की औद्योगिक वस्त्र इकाइयों को ही लूणी नदी के प्रदूषण का जिम्मेवार मानकर जुर्माना लगाया है। स्थानीय उद्यमियों व ट्रस्ट ने नवीनतम स्थिति के संदर्भ में विवरण फेक्ट के साथ प्रस्तुत किया बताया जाता है, परंतु उस पर गौर नहीं किया गया।
कुल मिलाकर एजीटी ने जो आदेश दिया उससे उद्यमी हतप्रभ है। उद्योग चलाने के लिए उद्यमियों द्वारा पालना मजबूरी है। उनका कहना है कि देश व्यापी एक नियमों की पालना के अभाव में उनकी लागत बढ़ने से उनका औद्योगिक विकास अवरुद्ध होता चला जा रहा है। इस क्षेत्र के कभी कृषक कहे जाने वाले स्वयं अब उद्यमी है। वे व्यावसायिक रूप में वस्त्र उद्योग में अपना योगदान कर रहे है।
एनजीटी ने स्पष्ट तौर पर टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज का निस्तारित जल प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लूणी नदी में नहीं जाने के आदेश दिये है। नदी पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने, सूर्य की रोशनी से गन्दे पानी व स्लज सुखाने हेतु नवीनतम तकनीक प्रयुक्त करने आदि निर्देश है। इसके साथ वस्त्र उद्योग के रसायनिक प्रदूषित जल से किस प्रकार कैसे कृषि भूमि लूणी नदी की खराब हुई उसका आकलन मेडिकल, कृषि और पर्यावरण विभाग टीम रूप में देगी। इससे आहत कृषकों को हर्जाना के बारे में चित्र प्रस्तुत हो सकेगा।
बाजार में भले ही ग्राहकी सीमित हो, परंतु उद्यमी आगे सीजन व होली के अवकाश के दौरान श्रमिकों के गृह ग्रामों में कूच करने के संदर्भ में अधिकतम उत्पादन लेने का व्यग्र है। फिलहाल चुनावी माहौल व देश व्यापी अन्य कारणों से तेजी को तरजीह नहीं है, परंतु आगे गर्मी की सीजन को देखते हुए तेजी का अनुमान गलत नहीं लगता।
स्थापित और गुणवत्ता युक्त संस्थानों के पास आज भी काम की कमी नहीं है। उनके उत्पाद उनकी ब्रान्ड इमेज के कारण होट केक की तरह बिक रहे है। उन्हें आफर के अनुसार माल चालानी में विलंब हो रहा है। इसके लिए व्यापारियों की उत्पादनों को सुनना पड़ता है।
बालोतरा लघु उद्योग मंडल समिति को वार्षिक आम सभा कई सत्रों में चलकर सम्पन्न हुई। उद्यमियों की उपस्थिति के साथ उनकी समस्याओं का सदस्यों व पदाधिकारियों द्वारा निस्तारण से आम सभा को उपयोगिता गरिमापूर्ण बनी।

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