गेहूं व चावल की भंडारण लागत बढ़ी

गेहूं व चावल की भंडारण लागत बढ़ी
गरीब परिवारों को लेकर पीडीएस से अनाज का आवंटन बढ़ाने पर विचार 
हमारे संवाददाता
देश के सरकारी पुल में गेहूं व चावल का पर्याप्त भंडार बना हुआ है।जिस अनाज भंडारण की लागत काफी बढ रही है।जिससे अब इस अनाज के भंडारण की लागत को घटाने की कवायद तेज कर दी गई है।जिसके तहत केद्र सरकार की तरफ से टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम्स (टीपीडीएस) में गरीब परिवारों को लेकर अनाज का आवंटन बढाने पर गंभीरता पूर्वक विचार कर रही है।जिसको लेकर आगे अमलीजामा पहनाए जाने की उम्मीद बढ गई है।ऐसे में देश के गरीब परिवारों को सस्ती कीमत पर अधिकाधिक अनाजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। 
दरअसल केद्र सरकार की तरफ से टीपीडीएस योजना के तहत 15 मार्च 2019 से शुरु हो रहे सरकारी खरीददारी के नए मौसम से पहले पुराने अनाज के स्टॉक घटाने की विशेष चाहत है।जिसके तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को लेकर केद्रीय पुल के चलते अनाज खरीदने वाली सरकारी एजेंसी फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के पास गेहूं और चावल का कुल स्टॉक 4.77 करोड़ टन से अधिक हो चुका है।यह फरवरी में 2013 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है जो कि तब 6.63 करोड़ टन हो गया था।जिसको लेकर केद्रीय खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की तरफ से कहा गया है कि जिन कल्याणकारी योजनाओं में गरीब परिवारों को सब्सिडी रेट पर अनाज वितरित किए जाते है जिसमें चावल व गेहूं का आवंटन 3-5 किलो बढाने पर विचार किया जा रहा है।जिससे सरकारी गोदामों में बढ रहा अनाज भंडारण कम होगा।जिससे गेहूं की नई खरीददारी में काफी सहूलियत होगी जो कि मध्य प्रदेश में 15 मार्च 2019 से सरकारी खरीदी शुरु होगी।वैसे तो इस समय सरकारी राशन की दुकानों से प्रत्येक गरीब व्यक्ति को लेकर प्रत्येक महीने 5 किलो अनाज दी जाती है।वहीं अंत्योदय योजना के तहत गरीब परिवारों को प्रत्येक महीने 35 किलो अनाज दिया जाता है।जिसमें 3 रुपए किलो चावल,2 रुपए किलो गेहूं और 1 रुपए किलो की दर से मोटे अनाज दिया जाता है।ऐसे में केद्र सरकार की तरफ से यदि टीपीडीएस के माध्यम से अनाजों का आवंटन बढाया जाता है तो कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रत्येक महीने 8-10 रुपए किलो अनाज दिया जाएगा। वहीं अंत्योदय परिवार को प्रत्येक महीने 40 किलो अनाज मिलेगा।जिसको लेकर एफसीआई के पास यह जरुरत पूरी करने को लेकर पर्याप्त अनाज का भंडारण है।चूंकि अब अनाज भंडारण का घटाना इसलिए आवश्यक है कि  एफसीआई को लेकर भंडारण की लागत प्रत्येक वर्ष बढ रही है।चूंकि 2017-18 के तहत अनाज भंडारण पर 3610 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।वहीं 2018-19 में यह रकम 4538 करोड़ रुपए हो गई।जिसके तहत 2018-19 में इसकी लागत 5201 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।ऐसे में किसी कल्याणाकारी योजना को लेकर भंडाकरण को घटाना बिल्कुल उचित कदम है।उल्लेखनीय है कि देश में इस समय  अनाज भंडारण क्षमता लगभग 8.8 करोड़ टन होने का अनुमान है।जिसमें से लगभग 7.5 करोड़ टन कवर्ड है और 1.3 करोड़ कवर्ड एरिया प्लिंथ है।ऐसे में 7.5 करोड़ टन कवर्ड स्टोर में से लगभग 4 करोड़ टन क्षमता का उपयोग सिर्फ चावल को लेकर होगा।ऐसे में कवर्ड एरिया प्लिंथ स्टोरेज का उपयोग गेहूं के भंडारण को लेकर होगा।वैसे चावल को खुली जगह पर नहीं रखा जाता है क्योंकि बारिश और रमी से इसको काफी नुकसान होने की आशंका रहती है।ऐसे में एफसीआई के अधिकारी की तरफ से कहा जा रहा है कि पंजाब में खरीदे गए गेहूं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा कवर्ड एरिया प्लिंथ में रखा गया है जिस पर बारिश और मौसम का आंशिक असर होता है।हालांकि इस बार गेहूं की खरीददारी अािधिक होगी जिससे गेहूं बारिश के दायरे में आने की आशंका है।

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