चीनी मिलों को रु.12,900 करोड़ का अतिरिक्त रियायती कर्ज मिलेगा

चीनी मिलों को रु.12,900 करोड़ का अतिरिक्त रियायती कर्ज मिलेगा
क्षमता विस्तार हेतु रु. 2600 करोड़ का रियायती कर्ज देने का फैसला
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । केद्र सरकार की तरफ से एथनॉल उत्पादन को बढावा देने को लेकर वित्तीय संकट से जूझ रही चीनी मिलों को 12,900 करोड़ रुपए का अतिरिक्त रियायती कर्ज उपलब्ध कराने की 7 मार्च 2019 को घोषणा की गई।इसके अतिरिक्त शीरा आधारित एकल डिस्टलरी लगाने अथवा क्षमता विस्तार को लेकर 2600 करोड़ रुपए का अलग से रियायती कर्ज मुहैया कराने का फैसला किया है।
प्रधानमंत्री श्री नरेद्र मोदी की अध्यक्षता में केद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक में यह निर्णय लिया गया।इससे वित्तीय संकट से जूझ रही चीनी मिलों को राहत पहुंचेगी।हालांकि केद्र सरकार की तरफ से इससे पहले जून 2018 में चीनी मिलों को पांच वर्ष की अवधि को लेकर रियायती दर पर 4400 करोड़ रुपए का कर्ज उपलब्ध कराया गया था जिसमें 1332 करोड़ रुपए की ब्याज सहायता देने की घोषणा की गई।जिसको लेकर केद्रीय खाद्य मंत्रालय की तरफ से  अभी तक छह हजार करोड़ रुपए के कर्ज को लेकर चीनी मिलों को 114 आवेदनों की मंजूरी दे चका है।हालांकि उन्हें 13400 करोड़ रुपए रियायती कर्ज के आवेदन मिले हø।जिसको लेकर केद्रीय वित्त मंत्री ने केद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक के बाद कहा कि केद्र सरकार की तरफ से एथनॉल का उत्पादन बढाने को लेकर अतिरिक्त राशि की मंजूरी दी है।जिसके तहत यह अतिरिक्त कोष दो श्रेणियों 2790 करोड़ रुपए और 565 करोड़ रुपए में होंगे।उन्होंने कहा कि यह अतिरिक्त कोष चीनी क्षेत्र की दिक्कत को दूर करने के केद्र सरकार के प्रयासों का हिस्सा है।उन्होंने कहा कि चीनी मिलों के समक्ष  कुछ दिक्कते है और गन्ना किसानों का बकाया देनदारी है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से चीनी मिलों की आय बढाने का प्रयास कर रही है।जिसके तहत रियायती दर पर कर्ज देने से गन्ना किसानों का बकाया कम करने में मदद मिलने के बारे में उन्होने कहा कि इसका तत्काल कोई फायदा नहीं होगा बहरहाल लंबे समय में इसका असर देखने को मिलेगा।उल्लेखनीय है कि चालू विपणन वर्ष में फरवरी तक चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का बकाया 20 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंच चुका है।जिसको लेकर चीनी मिलों तथा शीरा आधारित एकल डिस्टलरी को मिली ब्याज सहायता का भुगतान प्रति वर्ष छह प्रतिशत या बकों की वाणिज्यक कर्ज की ब्याज दर के 50 प्रतिशत की दरों में जो भी कम होगी उसी दर से भुगतान किया जाएगा।जिसको लेकर केद्रीय आर्थिक मामलों की सीमिति की तरफ से जून 2018 में इन्हीं शर्त़ों पर योजना को मंजूरी दी थी।जिसको लेकर केद्र सरकार का मानना है कि चीनी मिलों को रियायती दर पर कर्ज मिलने से उनकी नगदी स्थिति में सुधार होगा।जिससे चीनी मिलों में बनने वाले एथनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जा रहा है।इससे देश का पेट्रोलियम आयात कम करने में मदद मिलेगी।        

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