कपास उत्पादन 11% घटकर 328 लाख गांठ रहने का अनुमान

कपास उत्पादन 11% घटकर 328 लाख गांठ रहने का अनुमान
जून के बाद कपास की कीमत में और वृद्धि होने की संभावना
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली । 2018-19 के कपास वर्ष के तहत कुल कपास का उत्पादन 11 प्रतिशत घटकर 328 लाख गांठ रहने का अनुमान है।जिसको लेकर कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) की तरफ से 7 मार्च 2019 को कहा गया है कि देश के कई उत्पादक क्षेत्रों में कम बारिश के चलते चालू कपास मौसम क zतहत कपास उत्पादन में गिरावट का अनुमान है।ऐसे में इस वर्ष जून के बाद कपास की कीमत में और बढोतरी होने की संभावना है।
सीएआई के अध्यक्ष अतुल गनात्राप ने कहा कि पिछले कपास वर्ष 2017-18 में कपास का कुल उत्पादन 365 ल6ख गांठ हुआ था।हालांकि चालू कपास फसल वर्ष के तहत देश के कई उत्पादक क्षेत्रों में कम बारिश के चलते कपास के उत्पादन में गिरावट का अनुमान है।उन्होंने कहा कि इस वर्ष लगभग 123 लाख हेक्टेयर में कपास की बोआई हुई है।जिसके तहत गुजरात जैसे राज्यों में 28 प्रतिशत बारिश की कमी रही है।वहीं इस वर्ष कर्नाटक,तेलंगाना और महाराष्ट्र में भभ बारिश की कमी रही ह।,ऐसे में इन कपास उत्पादक क्षेत्रों में से अधिकांश में तीसरी या चौथी बार कपास फसल को नहीं लिया जा सकेगा।वैसे तो आमतौर पर भारत में किसान चार से पांच बार पौधों से कपास चुनते है।उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र और तेलंगाना की सरकारों की तरफ से किसानों को 31 दिसम्बर 2018 तक कपास के पौधों को हटाने का निर्देश दिया था ताकि पिंक बॉल कीड़े की समस्याओं से बचा जा सकेगा।उन्होंने कहा कि पिछले फसल वर्ष के 15 लाख गांठ की तुलना में चालू फसल वर्ष में कपास का आयात 70 से 80 प्रतिशत बढकर 27 लाख गांठ होने का अनुमान है।उन्होंने कहा कि यदि घरेलू बाजारों में जून के बाद कपास की दरों में वृिद्व होती है तो आयात लक्ष्य प्राप्ति के आसपास ही होगा।वहीं जून 2019 के बाद भारत में कपास की कमी को देखते हुए कपास की दरों में और बढोतरी होने की संभावना है।इस समय कपास की कीमत 42000 रुपए प्रति गांठ है जो कि न्यूनतम समर्थन मूल्य 41000 रुपए प्रति गांठ है।उन्होंने कहा कि कपास का आयात मुख्य रुप से अमेरिका और अफ्रीकी देशों से होगा क्योंकि ऑस्ट्रलियाई और ब्राजील के कपास स्टॉक बिक चुके है।उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्ष के 69 लाख गांठों की तुलना में इस बार कपास निर्यात 27 प्रतिशत घटकर 50 लाख गांठ रहने की संभावना है।उन्होंने कहा कि हम इस मसले पर बंगलादेश व्यापार संघ और स्पिनर एसोसिएशन के साथ यथाशीघ्र एक समझौता पर हस्ताक्षर करने की योजना बना रहे हø।जिससे बंगलादेश को होने वाले निर्यात में 30 प्रतिशत वृद्वि होने की संभावना बनेगी जो कि हमारा सबसे बड़ा आयात देश है।पिछले वर्ष बंगलादेश को 20 लाख गांठ कपास का निर्यात किया गया था।वहीं चीन को निर्यात भी पिछले वर्ष 8 लाख गांठ से बढकर 15-20 लाख गांठ कपास निर्यात हो गया है।उन्होंने कहा कि चीन में कपास की उपज 335 लाख गांठ की होती है।बहरहाल चीन में कपास की खपत 570 लाख गांठ की है।जिसको लेकर चीन कपास की मांग और खपत के अंतर को पाटने को लेकर कपास का आयात करता है।वैसे तो इस बार अमेरका और चीन के बीच व्यापार युद्व से भारत को कोई फायदा नहीं हुआ है क्योंकि कारोबारी ऊहापोह की स्थिति में है।बहरहाल यदि लंबे समय में इस परिदृश्य सेरत को लाभ होने की संभावना है।वहीं भारत पाक के बीच ताजा तनाव के बावजूद पाकिस्तान को कपास निर्यात अधिक प्रभावित नहीं होगा।उन्होंने कहा कि भारत पिछले वर्ष पाकिस्तान को 8 लाख गांठ कपास निर्यात किया था।वहीं इस वर्ष पाकिस्तान को 6.5 लाख गांठ कपास का निर्यात किया जा चुका है औश्र मॉजूदा भारत-पाक के तनाव कम होने पर कपास का शेष निर्यात किया जाएगा।  

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