शेयर बाजार के घटने से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट अनिवार्य

हमारे संवाददाता
मुंबई। कमजोर अमेरिकी जोब डेटा ने, वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं और कच्चे तेल की मांग गति से घट रही है, उसकी पोल खोल डाली है। अमेरिकी निर्माण और अन्य उत्पादकीय क्षेत्रों में फरवरी में केवल 20,000 नौकरियों का सर्जन हुआ। पिछले सप्ताह यह रिपोर्ट आने के बाद अमेरिकी शेयर बाजार के साथ कच्चे तेल में भारी गिरावट आई थी। शेयर बाजार में इंडेक्स शेयर में सामिल भी ऐसे शेयर के भाव जिस तरह घट रहे है, उसे देखते हुए, इस चरण पर एनर्जी के भाव घटना अनिवार्य हो गया है। संक्षेप में कहेंगे तो अल्पावधि में कच्चे तेल में मंदड़ियों का हाथ ऊपर रहने वाला है।
क्रूड ऑइल का वायदा अभी रोल ओवर पिरियड में से गुजर रहा है, अगर सर्वांगी रूप से देखने जाएंगे तो विश्लेषकों के मुताबिक ब्रैट क्रूड ऑइल के भाव 62.50 डॉलर तक घटने की उम्मीद रख सकते है। यूरोपीय अर्थव्यवस्था लगातार कमजोरी के समय में से गुजर रहा है, वैसा निवेदन, पिछले सप्ताह यूरोपीय केंद्रीय बैंक के प्रमुख मारियों द्राधी ने दिया, उसके बाद फाइनेंशियल मार्केट में भी शांति छा गई है। भारत और चीन सहित के एशियाई देशों का विकास दर धीमा हो रहा है, ऐसे रिपोर्ट लगातार आ रहे है, तब अमेरिका और यूरोप में भी अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही होने की खबर आने लगी है। डॉलर टर्म में चीन का फरवरी में व्यापार, तीन सालों में सबसे अधिक कमजोर, पिछले साल की तुलना में 21 प्रतिशत घटा था, आयात भी 5.2 प्रतिशत घटी थी।
हालांकि, फरवरी में चीन की क्रूड ऑइल आयात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 21.6 प्रतिशत बढ़कर प्रति दिन 102.7 लाख बैरल हुई थी। यह चौथी बार चीन की मासिक क्रूड ऑइल आयात, प्रति दिन 100 लाख बैरल को पार कर गई है। इस दौरान, ईआईए के आंकड़े दर्शाते है कि वेनेझुएला से अमेरिका में क्रूड ऑइल की आयात, 1 मार्च को खत्म हुए सप्ताह में घटकर प्रति दिन केवल 83,000 बैरल रह गई थी, जो पूर्व के सप्ताह में 2.08 लाख बैरल की थी। लेकिन यदि क्रूड ऑइल बाजार में भाव की घटी हुए उथल-पुथल को देखेंगे तो उसके लिए, बाजार में कंई फंडामेंटल्स कारण अस्तित्व में है। जैसे कि आंतरप्रवाह में बदलाव, अल्पावधि की शेल कूए की उत्पादन सायकल में वृद्धि, ओपेक और अन्य उत्पादक राष्ट्रों के साथ रूस की (भागीदारी) मित्रता में देखी जा रही खटाई और अमेरिका की विदेश नीति के लक्ष्यों को सिद्ध करने, अधिक से अधिक देशों पर क्रूड ऑइल व्यापार नियंत्रणोन कोलागू करना शामिल है।
अब यह कहने का कोई मतलब नहीं बनता कि भाव की अफरातफरी बढ़ी है या घटी है, या ट्रेडरों के मुनाफे के महत्त्व के मुद्दे क्या है? लेकिन हा, बाजार की वर्तमान नई वास्तविकता को इस बारे में समझना बहुत जरूरी है। 2014 से अब तक में भाव, 1 जून, 2014 को 109 डॉलर से घटकर 1 जनवरी, 2016 को 34.75 डॉलर का तल स्थापित किया था। उसके बाद अब क्रूड ऑइल की अफरातफरी किस मुद्दे पर कितनी भूमिका निभाई है और उसका बाजार पर क्या प्रभाव होगा? उसका पृथ्थकरण आवश्यक है। 2014 से पहले के पिछले चार सालों में वार्षिक धोरण से भाव की औसत अस्थिरता प्रति बैरल 30.27 डॉलर की थी, लेकिन 2014 के बाद के चार सालों में इस अफरातफरी घटकर वार्षिक औसत 20.50 डॉलर रह गई है। जो लोग 60 से 100 डॉलर की वार्षिक औसत भाव की उम्मीद लगाकर बैठे है, उसे समझ लेना है कि 20 डॉलर की भाव औसत रहने की संभावना अधिक देखी जा रही है। 2018 के आखरी चरण में जब क्रूड ऑइल के भाव 86 डॉलर से पचास डॉलर के नीचे नाट्यात्मक रूप से घटे, उसकी वजह से चौथी तिमाही में 30 दिनों के वॉलेटाइल इंडेक्स डेटा के आधार पर अब ऐसी नीची (कम) अफरातफरी की अवधारणा का जन्म हुआ है।

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