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पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट – वैश्विक आतंकी घोषित करने के प्रयास को चीन ने फिर से कामचलाऊ ब्रेक मारा वह अब चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुद्दा बना है तथा आरोप-प्रत्यारोप लग रहे है! हालांकि पाकिस्तान की तरह चीन भी अलग पड़ गया है। देखना यह है कि अब अमेरिका आतंकवाद के मुद्दे पर चीन के खिलाफ किस तरह का कदम उठाता है। सामान्य रूप से रक्षा और विदेश नीति के बारे में राष्ट्रीय एकता होनी चाहिए। राष्ट्र का हित सर्वोपरि हो परंतु बालकोट में आतंकवादी हमले का हमने जवाब दिया उसके बाद चुनाव के कारण राजनीति सर्वोपरि बन गई है। मसूद अजहर एक बार फिर आतंकवादी घोषित होने से बच गया, उसकी खुशी कांग्रेस को क्यों है? भाजपा और नरेद्र मोदी को सफलता नहीं मिली उसकी खुशी है! लेकिन कांग्रेस की खुशी से पाकिस्तान की खुशी दुगुनी होती है उसकी परवाह नहीं है!
भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमला किया उसके बाद भारत में उत्सव हुआ। अभिनंदन सकुशल वापस आए उसकी खुशी हुई और मजबूत सरकार का विश्वास हमें हुआ। अब चीन के कारनामों के कारण कांग्रेस कहना चाहती है कि भारत सरकार मजबूत नहीं है! चीन के ब्रेक के कारण खुश होता है, हमारा विपक्ष और हर्षित होता है पाकिस्तान। हमारे हवाई हमले के बारे में शंका और प्रश्न उठाने वाली कांग्रेस पर आलोचना की बौछार हुई (कांग्रेस प्रवक्ता-सोनियाजी के करीबी श्रीमान वडक्कन देश के हित विरोधी कांग्रेस के रुख के खिलाफ विरोधकर कांग्रेस से त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल हुए है) उसके बाद कांग्रेसी नेता डैमेज कंट्रोल करने के लिए प्रयास कर रहे थे, ऐसे में चीन का तिनका हाथ में आया! कांग्रेस के प्रवक्ता ने मोदी पर प्रहार किया कि चीन के सामने मोदी चुप क्यों है? गुजरात में साबरमती के रिवर फ्रंट पर चीनी नेता को झुला झुलाकर मनपसंद भोजन कराया! डोकलाम के बाद चुप क्यों रहे? पाकिस्तान में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है उसका विरोध क्यों नहीं किया आदि-आदि।
भाजपा के प्रवक्ता ने कांग्रेस को जवाब दिया है कि डोकलाम के समय राहुल गांधी नई दिल्ली में चीनी राजदूत से मिलने क्यों गए थे? कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए चीन की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाया और चीनी नेता भी राहुल गांधी का काफी सम्मान करते है तो राहुल गांधी क्यों चीन को नहीं समझाते कि भारत का समर्थन करो...? भारत का हित दिल में है? या पाकिस्तान का?
भाजपा के प्रवक्ता ने तो नया धमाका किया है कि अमेरिका ने जब सुरक्षा समिति की स्थायी सदस्यता भारत को आफर की तब नेहरू ने आगे बढ़कर चीन के नाम की सिफारिश करने की उदारता दिखाई। आज नेहरू के निर्णय की यूएस- भारत को कीमत चुकानी पड़ रही है! यह जानकारी कांग्रेस के शशी थरूर द्वारा लिखित पुस्तक में है!
यूनाइटेड नेशंस में अजहर के खिलाफ भारत की शिकायत का अमेरिका, यूके, फ्रांस ने समर्थन किया और जर्मनी के अलावा पोलेंड, बेल्जियम, इटली, बांग्लादेश, मालद्वीप, भुटान, गीनी, जापान और आस्ट्रेलिया ने समर्थन किया- चीन और पाकिस्तान को इन देशों की परवाह न हो लेकिन भारत के मुख्य विपक्ष- जो सत्ता प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है- भारत के हित पर विचार न करें?
भारत पर पाकिस्तानी आतंकी हमले के बाद विश्व की प्रतिक्रिया देखकर चीन ने भी `तटस्थता' रखी और आतंकी को खुला समर्थन नहीं दिया- हमारे नेताजी ने उस पर गौर क्यों नहीं फरमाया?  

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