2018-19 में चीन का रुई उत्पादन अनुमान

2018-19 में चीन का रुई उत्पादन अनुमान
59.4 लाख टन से बढ़कर 60.4 लाख टन
हमारे संवाददाता
मुंबई। अमेरिका और चीन के बीच की व्यापार कुश्ती ने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को प्रभावित करके रूई (कॉटन) बाजार में अनिश्चितता पैदा की है। बुधवार को यूएस कॉटन वायदा बावन सप्ताह की बॉटम 69.68 सेंट प्रति पाउंड (454 ग्राम) बोला गया। चीन ने अमेरिकी रुई आयात पर शुल्क लागू करने की घोषणा की उससे पहले 11 जून की ऊंचाई से यह वायदा अब तक में 14 प्रतिशत लुढ़का है। भारत और अमेरिका में फसल कमजोर आने के बावजूद भाव घटे है। व्यापार टकराव के कारण, कच्चे तेल के भाव नीचे चले जाने से पॉलिएस्टर यार्न के भाव कॉटन यार्न के साथ प्रतिस्पर्धा में ऊतरे है। 
नए पूर्वानुमान कहते हैं कि अन्य निर्यातक देशों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने से अमेरिका व्यापार की हिस्सेदारी कम हो गई है। इसके बावजूद, 2018 के रुई फसल वर्ष में अमेरिका की निर्यात 150 लाख गांठ के साथ सबसे बड़ा निर्यातक होने की प्रतिष्ठा बरकरार रहेगी। 25 प्रतिशत आयात शुल्क के साथ, चीन ने 2018 के विपणन वर्ष (मार्केटिंग वर्ष) में अन्य देशों जैसे ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, भारत में से वैकल्पिक खरीदारी बढ़ाई थी। चीन और मैक्सिको के बाद वर्ष 2018 में वियतनाम बड़ा आयातक के रूप में उभरा है। इस सप्ताह चीन के कृषि मंत्रालय द्वारा जारी मासिक फसल रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में रुई उत्पादन के पूर्व के अनुमान 59.4 लाख टन से बढ़कर 60.4 लाख टन होने की संभावना है। चीन के 2018-19 के रुई आयात अनुमान भी 15 लाख टन से बढ़ाकर अब 16 लाख टन रखा गया है।  
चीन का रुई उपयोग और उत्पादन के बीच का अंतर अभी 130 लाख गांठ (प्रत्येक 218 किलो) का है। 2018 में अधिशेष स्टॉक भी घटकर सामान्य स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। यदि चीन और अमेरिका के बीच व्यापार विवाद को हल किया जाता है, तो 2019 में चीनी मिल का उपयोग बढ़कर 414 लाख गांठ होने का अनुमान है। अमेरिका का इस साल का रुई फसल क्षेत्र 130 लाख एकड़ रखा गया है। यदि प्रति एकड़ यिल्ड (उत्पादकता) 840 पाउंड की मानी जाए, तो उत्पादन का अनुमान 219 लाख गांठ से बढ़कर अब 227 लाख गांठ रखा जा रहा है। 
यूएस नेशनल कॉटन काउंसिल ने 2019 के फसल वर्ष का अमेरिकी मिल उपयोग का अनुमान 32.4 लाख गांठ लगाया है। भारत की रुई आयात 80 प्रतिशत बढ़ने की संभावना भारतीय व्यापारियों ने रखी है। वह मानते हैं कि पिछले साल 15 लाख गांठ की आयात हुई थी, वह इस साल बढ़कर 27 लाख गांठ होगी। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2018-19 की रुई फसल 330 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वर्ष में 365 लाख गांठ के रिकॉर्ड स्तर पर था। 
अमेरिकी बुवाई क्षेत्र में वृद्धि हो रही है, उसके साथ ही ब्राजील ने भी रुई में पूंजी निवेश बढ़ाया है। मातो-ग्रासो क्षेत्र में दूसरी फसल के रूप में रुई बुवाई क्षेत्र 33 प्रतिशत जितना बढ़ा है। ब्राजील एसोसिएशन ऑफ कॉटन प्रोड्यूसर्स का अनुमान है कि बुवाई क्षेत्र बढ़कर 14 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। 2019 में वैश्विक रुई उत्पादन का अनुमान 70 लाख गांठ बढ़कर 1255 लाख गांठ रखा जा रहा है, जो 2011 के बाद का यह एक नया रिकॉर्ड होगा। 2019 का वैश्विक मिल उपयोग बढ़कर 1265 लाख गांठ होने का अनुमान है, हालांकि साल के अंत का स्टॉक 13 लाख गांठ घटने की संभावना है।

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