किसानों ने फल, सब्जी और दूध पर एमएसपी दिलाने की गुजारिश

किसानों ने फल, सब्जी और दूध पर एमएसपी दिलाने की गुजारिश
किसान समन्वय समिति ने विभिन्न दलों को सौंपा 18 सूत्रीय मांगपत्र 
हमारे संवाददाता
अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति ने लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत अजमा रही विभिन्न दलों से अपने चुनावी घोषणा पत्रों में दूध,फल और सब्जियों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने की मांग को शामिल करने की अपील की है।जिसके तहत स्वामीनाथन समिति ने इस बारे में अपने अहम सुझाव दिए थे।जिसको लेकर किसान समन्वय समिति ने 18 सूत्रीय मांग पत्र को देश के विभिन्न राजनैतिक दलों को सापी गई है।
दरअसल अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति की तरफ 14 मार्च 2019 को नई दिल्ली में सम्मेलन आयोजित की गई थी।जिसमें किसानों के प्रतिनिधियों की तरफ से एक बार फिर राजनैतिक दलों से किसानों के ऋण माफ करने की मांग उठाने की अपील की गई है।जिसको लेकर कहा गया है कि इल राजनैतिक दलों को अपने घोषणा पत्रों में इसे शामिल किया जाए।जिसको लेकर कहा गया है कि देश के 80 प्रतिशत किसानों के ऋण राष्ट्रीयकृत बैकों के है।जिसके तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर किसानों के प्रतिनिधियों की तरफ से कहा गया है कि इसका लाभ किसानों के बजाय बीमा कंपनियों को मिल रहा है।जिसको लेकर इस योजना के नियमों में संशोधन करने की जरुरत है।जिसके तहत प्रत्येक किसान को एक इकाई माना जाए।ऐसे में इस योजना में पशुओं और आग से होने वाले नुकसान को भी शािमल किया जाए।वहीं बीमा प्रीमियम का पूर्ण भुगतान सरकार को करने का नियम होना चाहिए।किसानों को लेकर न्यूनतम आय सुनिश्चित की जाए।जिसको लेकर किसानों को प्रति एकड़ जमीन पर 10 हजार रुपए की अतिरिक्त आय सहायता देश के सभी किसानों को दी जाए।लघु व सीमांत किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रति माह कम से कम पांच हजार रुपए की पेंशल दी जाए।खेती की जंगली सूअर और अन्य अवारा पशुओं से बचाने को लेकर विस्तृत कार्य योजना बनाई जाए।गन्ना किसानों के भुगतान में बिलंब होने की दिशा में ब्याज सहित भुगतान की पक्की व्यवस्था होनी चाहिए।टय़ूबवेल से सिंचाई करने वाले किसानों को मुफ्त बिजली आपूर्ति किया जाए।किसानों को सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत सांप काटने और अन्य कृषि मशीनरी से होने वाली दुर्घटना में जान गंवाने वाले किसानों के परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा दी जाए।कृषि मशीनरी को जीएसटी से मुक्त किया जाए।वहीं देा की खेती पर कृषि उत्पादों के आयात से पड़ने वाले विपरीत प्रभावों को देखते हुए इस पर रोक लगाई जाए।जिन वस्तुओं का उत्पादन घरेलू स्तर पर नहीं होता है सिर्फ उसी का आयात किया जाए।कृषि के काम आने वाले 10 वर्ष पुराने वाहनों पर लगने वाले प्रतिबं को रोक दिया जाए।इस मौके पर किसान समन्वय समिति के सभी सदस्यों ने अपनी बातें रखी।जिसमें भारतीय किसान यूनियन, कर्नाटक राज्य रायता संघ,तमिलगा विवासैयागल संघ,आदिवासी गोत्र महासभा और दक्षिण भारत के कई और किसान संगठन शामिल रहे हं।

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