ओएनजीसी के ऑयल एवं गैस फील्ड्स को बेचने की योजना ठंडे बस्ते में

ओएनजीसी के ऑयल एवं गैस फील्ड्स को बेचने की योजना ठंडे बस्ते में
हमारे संवाददाता
नई दिल्ली-ऑयल एण्ड नेचुरल गैस कंपनी (ओएनजीसी) की नौ बड़ी ऑयल एवं गैस फील्ड्स को निजी और विदेशी कंपनियों को शेयर बेचने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई है।जिसको लेकर केद्र सरकार के भीतर ही इस प्रस्ताव का भारी विरोध हुआ जिसके बाद अंतत: इसे टालना पड़ा है।
दरअसल नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता में गठित समिति ने पिछले वर्ष मुम्बई की मुम्बई हाई,हीरा, डी-1,वसई ईस्ट,पन्ना,असम में मौजूदा ग्रेटर जोराजन और गिलेकी फील्ड्स,राजस्थान के बाघेवाला और गुजरात के कल्लोल ऑयल फील्ड्स को निजी या विदेशी कंपनियों को स्थानांतरित करने का सुझाव दिया गया था।जिसको लेकर ओएनजीसी के साथ  सरकार के भीतर से इस प्रस्ताव का पूरजोर विरोध हुआ।ऐसे में इन ऑयल एण्ड गैस फील्ड से भारत की तेल और गैस जरुरतों का 95 प्रतिशत हिस्सा पूरा होता है।इन नौ क्षेत्रों के अतिरिक्त 149 ऑयल एवं गैस फील्ड्स को एक साथ जोड़कर उसकी नीलामी की जाएगी।जिसको लेकर ओएनजीसी की तरफ से कहा गया है कि इन ऑयल एवं गैस फील्ड्स को बेचे जाने का विरोध इसलिए किया कि इन्हें खोजने और उतपादन योग्य बनाने में उसे पिछले चार दशकों के तहत अरबों डॉलर खर्च करने पड़े है।उल्लेखनीय है कि निजी या विदेशी कंपनियां नए तेल एवं गैस ब्लॉक खोजने के बजाय ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड में हिस्सेदारी लिए जाने को लेकर दबाव बना रही है।जिसको लेकर कहा गया है कि वह नई पूंजी और प्रौद्योगिकी की मदद से इस क्षेत्रों से उत्पादन बढा सकते है।पिछले दिनों केद्र सरकार की तरफ से तेल एवं गैस खोज में निजी और विदेशी निवेशक आकर्षित करने को लेकर इससे संबंधित अहम नीति में बदलाव किया है।इस नई नीति के तहत केद्र सरकार की तरफ से नए कर एवं कम खोजे गए क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन उत्पादन पर संबंधित कंपनी से लाभ में हिस्सा नहीं मांगेगी।ऐसे में प्रत्येक तरह के बेसिन को लेकर एक समान अनुबंध वाली दो दशक पुरानी नीति में बदलाव करते हुए नई नीति में अलग अलग क्षेत्रों को लेकर अलग अलग नियम बनाए गए है।जिसके तहत पहले से उत्पादन वाले क्षेत्रों और नए क्षेत्रों को लेकर नियम अलग अलग होंगे।

© 2019 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer