इंजीनियरिंग निर्यात 2025 तक 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य

हमारे संवाददाता
चिन्नई-भारत के इजीनियरिंग निर्यात को 2025 तक तीन गुना बढाकर 200 अरब डॉलर पर पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।इस लक्ष्य को हासिल करने को लेकर केद्र सरकार और उद्योग को अनुकूल तंत्र स्थापित करने को लेकर ठोस प्रयास करने और कच्चे माल को उचित कीमत पर बनाए रखने की जरुरत है।ईईपीसी इंडिया डेलॉयट ने अपने रणनीति दस्तावेज में यह बात कही है।जिसको लेकर केद्रीय वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान ने कहा कि केद्रीय वाणिज्य विभाग और ईर्ठपीसी दस्तावेज द्वारा सुझाई गई रुपरेखा की जांच पड़ताल करेगा और संभावित अवसरों की पहचान को लेकर हर संभव प्रयास करेगा।
दरअसल इंटरनेशनल इंजीनियरिंग सोर्सिंग शो में जारी दस्तावेज में सुझाया गया है।जिसके तहत केद्रीय वाणिज्य विभाग और ईईपीसी के नेतृत्व के साथ बातचीत के आधार पर भारत का इंजीनियरिंग निर्यात 2025 तक अप्रत्याशित रुप से बढकर 200 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य रखा है जो कि 2017-18 के इंजीनियरिंग निर्यात का लगभग तीन गुना है।जिसको लेकर केद्रीय वाणिज्य सचिव अनूप वाधवान ने कहा कि ईईपीसी इंडिया डेलॉयट के अध्ययन में देश की निर्यात क्षमता को बढाने और महत्चाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के अवसरों पर प्रकाश डाला गया है।जिसको लेकर ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन रवि सहगल ने कहा कि देश के निर्यात क्षेत्र में इंजीनियरिंग निर्यात का 25 प्रतिशत योगदान है।चालू वित्त वर्ष में इंजीनियरिंग निर्यात 80-82 अरब डॉलर रहने का अनुमान है।उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग निर्यात के 200 अरब डॉलर के लक्ष्य को 2025 तक हासिल किया जा सकता है।

© 2019 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer