ऑलिव ऑयल की मांग सालाना 15 प्रतिशत बढ़ी

इब्राहिम पटेल 
मुंबई। स्पेन में जैतून तेल (ऑलिव ऑयल) का उत्पादन दिसंबर की तुलना में 33 प्रतिशत, व्यापक बढ़कर जनवरी में 14.17 लाख टन की ऊंचाई पर पहुँच गया था। जनवरी में 746.73 लाख टन ऑयलीव फ्रूट की पेराई हुई थी, जिसमें से औसत 18.98 प्रतिशत की ऑयल की प्राप्ति हुई थी। लगातार बढ़ रहे उत्पादन की वजह से स्पेन में ऑलिव ऑयल के भाव फरवरी मध्य तक पिछले साल की समान अवधी से औसत 30 प्रतिशत लुढ़के थे। स्पेन में हाल में औसत ऑलिव ऑयल के भाव प्रति लीटर 2.38 यूरो (2.68 डॉलर) बोले जा रहे है, पिछले साल समान अवधि में 3.70 यूरो (4.59 डॉलर) के भाव थे।
भारतीय खाद्य तेल बाजार में ऑलिव ऑयल की मांग का हिस्सा काफी मामूली है, लगभग 0.10 प्रतिशत जितना ही है। भारत में लगभग 95 ब्रांड बाजार में अपनी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए स्पर्धा कर रही है । 7-8 साल पहले केवल 3000 टन आयात से शुरू हुई इस बाजार में वर्तमान में लगभग 15,000 टन ऑलिव ऑयल की आयात होती है। भारतीय नागरिकों की सुखाकारी में वृद्धि होने के कारण ऑलिव ऑयल की मांग, सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। वर्तमान में, भारत में बोर्जेस एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का भाव प्रति आधा लीटर के रु. 515/525 जितने है, जबकि पतंजलि डोलेक वीटा प्योर ऑलिव ऑयल 1 लीटर प्लास्टिक बोतल के भाव रु. 1175 बोला जाता है।
स्पेन मे रिफाइंड पॉमाको ऑलिव ऑयल के भाव सबसे अधिक 42 प्रतिशत गिरकर 1.26 यूरो (1.42 डॉलर) के तल पर बैठ गए है। रॉ रिफाइंड और रिफाइंड भी 33 प्रतिशत की गिरावट के साथ क्रमश: 2.20 यूरो (2.47 डॉलर) और 2.50 यूरो (2.81 डॉलर) हुए थे। प्राकृतिक आपदाओं की वजह से इटली में उत्पादन गति से घट जाने से उसे आयात की आवश्यकता पैदा हुई। इसका सीधा फायदा ग्रीस को मिला और ग्रीस में भी भाव बढ़ने लगे है, ऐसा ग्रीस के कृषि मंत्री ने कहा था। वास्तविकता यह भी है कि इटली की घटनाओं के साथ ग्रीस में भी इस साल ऑलिव के पेड़ों की उपज (यिल्ड) कम हो गई है, इसलिए भाव को ऊपर जाने के लिए जगह बन गई है। एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का उत्पादन करने वाले लोकोनिया क्षेत्र में तो भाव प्रति लीटर 3.60 से 3.65 यूरो की ऊंचाई पर पहुंच गया है। इटली में बिनमौसम की बर्फबारी और पेड़ों को गंभीर बीमारी के कारण, किसानों को कुछ पेड़ निकालने पड़े, जिससे उत्पादन में तेजी से गिरावट दर्ज हुई। इसकी वजह से उच्च हाई क्वालिटी एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के भाव में ऊछाल आया था, जिसके चलते किसानों की किस्मत खुल गई है। ऑलिव ऑयल का उत्पादन 2017 की तुलना में अधिक घटकर 2018 में केवल 1.85 लाख टन रह गया था।
विश्व के सबसे बड़े उत्पादक स्पेन, जो सालाना 10 अरब यूरो का वॉल्यूम रखता है, उसके सामने इटालियन एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल को बड़ा प्रीमियम उपलब्ध होता आया है। फरवरी में इटालियन एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल के भाव पिछले साल के समान महीने की तुलना में 37 प्रतिशत अधिक प्रति टन 5865 यूरो और मार्केट बेंचमार्क स्पेन की तुलना में दोगुना बोला गया था। इटली से विपरीत, इस साल स्पेन में बंपर फसल हुई है और दोनों देशों के बीच का भाव अंतर, यूरोप में नई ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। पिछले पांच सालों से ऑलिव पेड़ों को लगे लाइलाज रोग, मौसम की प्रतिकूलता और कीटाणुओं के लगने जैसे त्रिविध कारणों से इटली की फसल इस साल पूरी तरह से विफल रही है, इसलिए उत्पादन का अनुमान भी अनापसनाप किए जा रहे है।

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