रुपया मजबूत होकर स्थिर होगा

रुपया मजबूत होकर स्थिर होगा
डॉलर के सामने रु. 74.60 तक कमजोर होने का ड़र
इब्राहिम पटेल 
मुंबई। महीनों तक करेंसी बाजार में रुपया ने घूमर-घूमर करने के बाद, अब अल्प से मध्यावधि में स्थिरता प्राप्त करने जा रहा है। वैश्विक निवेशकों का लगातार बहता प्रवाह, घरेलू एसेट्स में निवेशकों का बढ़ता विश्वास, सीमा पर स्थापित आंशिक शांति, घट रहे कच्चे तेल के भाव एवं स्थानिक शेयर्स और करेंसी में जोखिम लेने का आकर्षण, इन सभी कारणों एक साथ कारणों एक साथ सपाटी पर उभरे केद्रक स्थिर सरकार बनने का बढ़ता आशावाद और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की धीमी गति से भी डॉलर को भारत की ओर प्रवाहित किया है। इसलिए रिजर्व बैंक ने लंबी अवधि के लिए बैंकों को फंड उपलब्ध करने के लिए, तीन साल की मुद्दत के पांच अरब डॉलर के फॉरेन एक्सचेंज स्वैप लीलाम को रोकने की हट सप्ताह घोषणा की।
पिछले लगातार पांचवे सप्ताह से मजबूत हो रहा रुपया, एक साल की ऊंचाई पर पहुँच जाने से असमंजस में आ गई रिजर्व बैंक को यह कदम लेने के लिए मजबूर किया है, ऐसा भारतीय करेंसी डीलरों का मानना है। वैसे देखा जाए तो भारत की ओर बढ़ते अधिकतम डॉलर प्रवाह को अटका कर रुपया को मजबूत होते रोकने के लिए रिजर्व बैंक की यह बाजार मध्यस्थता ही है। 8 फरवरी की रु.70.90 की बॉटम से रुपया अब तक में 2.5 प्रतिशत मजबूत हुआ है। यदि रुपया अधिकतम मजबूत हो जाएगा तो, एक ओर धीमी हो रही अर्थव्यवस्था और निर्यात कमी दोनों क्षेत्र के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी होने की संभावना बढ़ जाएगी।
नई व्यवस्था में, भारतीय बैंकों खुद अब रिजर्व बैंक के साथ मिलकर ओक्शन प्रक्रिया द्वारा निश्चित किए गए प्रीमियम से डॉलर स्वैप (खरीद-बिक्री) ऑफर कर सकता है। वैसा करने से ऋण लेने वाले के लिए हेजिंग कॉस्ट में भी अच्छी खासी गिरावट होगी। यदि आप भारत के शेयर और डेट मार्केट में आ रहे पूंजी प्रवाह को देखेंगे तो मालूम होगा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 3.13 अरब डॉलर के शेयर्स खरीदे ह और डेट बाजार में 1 अरब डॉलर की बिक्री की है। पिछले गुरुवार को एक ही दिन में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने रु.1482.99 करोड़ भारतीय बाजार में डाले थे। इस तरह विदेशी वित्तीय प्रवाह ने रुपया को मजबूत होने के लिए प्रेशर खड़ा किया है।
हालांकि, रिजर्व बøक रुपया को मजबूत होते रोकने के लिए लगातार डॉलर खरीद कर बाजार मध्यस्थी भी करती है। 2018 में भारतीय रुपया 8.48 प्रतिशत घटकर 9 अक्टूबर को रु. 74.48 लाइफ टाईम बॉटम के साथ सबसे खराब स्थिति में था, 13 से 27 फरवरी के दौरान पुलवामा हमले के बाद रुपया ने 0.62 प्रतिशत की कमजोरी दिखलाई थी, लेकिन उसके बाद फरवरी अंत तक 0.72 प्रतिशत की मजबूती हांसिल कर ली थी। शुक्रवार को रुपया इंट्रा-डे में रु. 68.91 तक मजबूत हो गया था। बेशक, मोर्गन स्टेन्ली ने अपने क्लायंटों को भेजी नोंध में कहा था कि आने वाले महीनों में डॉलर और ब्रिटिश पाउंड के सामने रुपया कमजोर होने की संभावना है, इसलिए इंडियन रुपी बेचने की सलाह दी थी।
मोर्गन स्टेन्ली कहते है कि कंई वजहों ऐसी है, जिस से नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड बाजार में अगले तीन महीनों में डॉलर के सामने रुपया रु. 74.60 तक कमजोर होने का डर है। मुद्रास्फीति दर नीचा रहने की संभावना उज्ज्वल है, ऐसा कहकर रिजर्व बैंक ने फरवरी में ब्याज दर घटाए थे। करेंसी बाजार के लिए ब्याज दर में कमी यह नकारात्मक घटना है, क्यूंकि दो देशों की करेंसी के बीच के भाव अंतर को घटाता है, या करेंसी बाजार की स्थिति को कमजोर कर देता है। करेंसी ट्रेडर्स अब मार्च के मुद्रास्फीति के दरों का आकलन करेगा, जिसके आधार पर रिजर्व बैंक की अप्रैल पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दर में कमी की संभावनाओं का निर्धारण होगा। फरवरी का कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स (मुद्रास्फीति), जनवरी के 1.97 प्रतिशत से बढ़कर 2.57 प्रतिशत हुआ था।

© 2019 Saurashtra Trust

Developed & Maintain by Webpioneer