दाल-दलहनों में अधिक तेजी नहीं

दाल-दलहनों में अधिक तेजी नहीं
हमारे संवाददाता 
 खेरची दाल-दलहनों के विक्रेताओं पर शासन-प्रशासन का कोई चेक और देख-रेख नहीं होने से बेतहाशा भाव लगाकर खेरची व्यापारी आम उपभोक्ता को सबसे ज्यादा वे लूट रहे है । गत् हप्ते आंखन देखी एक जींस दूकान पर एक उपभोक्ता की बहस व्यापारी के साथ देखी गई जिसमे व्यापारी काबुली चना तृतीय श्रेणी का 80 रु. का भाव पर बेच रहा था जिस पर बहस हो रही थी । उस दिन काबुली चना थोक मंडी में निम्न किस्म वाला 5300 रु. और अच्छे वाला बेस्ट में 6300-6500 रु. का भाव था । खेरची में डालर काबुली चने का भाव खुले बाजार में 95 रु. और माल संस्कृति में 120 से 130 रु. के उपर भाव रहे थे । अर्थात 30-40 प्रतिशत की अंधी कमाई का लाभ लिया जा रहा था । खाद्यसामग्रियों पर खेरची का धंधा पूर्व में तक 5 से 10 प्रतिशत तक पर होता था । वर्तमान में यही हाल अन्य खाद्यसामग्रियों में भारी ऊंचे भाव पर चल रहा है । अर्थात खेरची विक्रेता व्यापारी उद्योगपतियों की श्रेणी में आ गये है । ऐसा लगता है व्यापारियों की नीति सरकारी नीति से ज्यादा पावरफूल है । अर्थात थोक व्यापारी खेरची वालो से उपर के भाव बेचने की टिप्स देता है जिससे भाव ऊंचे बने रहे ।  जनता की महंगाई से खेर नहीं है । सरकार की नीति और स्थानीय शासन की स-सुस्ती ने मिलकर आम उपभोक्ता की कमर तोड दी है । सरकार को zचाहिये कि हाजिर व्यापार के रेट पर कोई ठोस नीति बनाकर दैनंदिनी भाव की उपर-नीचे  पर अंकुश रखे । खेरची व्यापारी ऊंचे और नीचे दोनों भाव  भारी कमाई कूटता है । नीचे के भाव आने पर वह ऊंचे भाव की खरीद  बताता है  जबकि होता नहीं है और नीचे के भाव की खरीद पर यदि वायदा या हाजिर व्यापार भाव बढ़ता है तो तुरंत बताता है कि आज भाव बढ़ गया । 
स्थानीय संयोगितागंज मंडी में ऊंचे भाव पर दालों में मांग कमजोर बताई जाने लगी है इससे दाल मिलों की मांग कमजोर रहने से दलहनों में भाव उतरने लगे है ।  उपभोक्ता मांग का दालों में उपरी भाव पर बेहद अभाव बताया जा रहा है । ऊंचे भाव रहने से सरकारी गोदामों में स्टॉक दलहन तिलहनों का बढ़ गया है । सरकारी स्टाक का माल छूटने से दलहन दालो में मंदी रही है । एमएसपी से नीचे आऐ भावों पर बिक्री बढ़ने से  इससे अन्य स्टाकिस्ट भी माल छोड़ने पर मजबूर रहे बताए जा रहे है । पिछले एक माह में दलहन -तिलहनों पर कोई 150-200 रु. तक की थोक में कमी होना बताया जा रहा हे । हालांकि इस मंदी का असर खेरची में अधिक नहीं आया है । महाराष्ट्र मंडीयों में और म.प्र. की इंदौर मंडी में नई मूंग की मांग होना बताते है । इंदौर मंडी मूंग का भाव 5500 से 5600 रु. तक होना बताया गया । व्यापारियों के अनुसार नई स्टेज की आवक होना बताई जा रही है । मिलों की मांग में कमी रहने से चने में मंदी रही । चना कांटा  गत् हप्ते मंदी में 4050 रु. तक आ गया । व्यापारिक क्षेत्रों से मिली खबर के अनुसार पिछले मौसम के अनुसार आगामी फसलों को अच्छा लाभ मिलने की आशा है इससे व्यापारियों की मनोवृत्ति में परिवर्तन आया होने से दलहनों में धारणा कमजोरी की बताई जा रही है । चना श्रेणी अनुसार 4050 से 4175 रु., म.प्र. का चना 4000 रु. तक था । काबुली चना डॉलर में भारी आवक 3000-4000 हजार बोरियों की ओर निर्यात मांग नहीं होने से भाव में लगातार मंदी का टोन बना हुआ है । काबुली चना विभिन्न श्रेणी में भाव 5200 से 6400 रु. तक बताए गये । कुछ राज्यों में दालों की मांग अधिक निकलने से मसूर 3925 रु. तक होना बताया जा रहा था। उड़द म.प्र.  की 4000-4100 रु., महाराष्ट्र उड़द 4300 से 4700 रु.  का भाव बताया गया।  तुवॉर म. प्र . की 4600 से 4800 रु. और महाराष्ट्र तुवॉर 5250 से 5400 रु. तक बताई जा रही थी । दालों में लोकल एवं दिसावरी मांग कमजोर चल रही बताते है । चना दाल 5000 से 5100 रु. बेस्ट बोल्ड का भाव 5450 रु. बताया गया । तुवॉर दाल फूल 6400 रु. ओर मार्के वाली का भाव 7100 से 7500 रु. बताया गया । मूंग दाल 6000 और बोल्ड में 6500 रु. मसूर दाल 4950 से 5000 रु. तक भाव बताये गये उड़द दाल 5100 से 5200 रु. । इन भावो पर भी लेवाल कमजोर बताये जाए रहे है ।

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