खाद्यतेलों में मांग के अभाव से मंदी

खाद्यतेलों में मांग के अभाव से मंदी
हमारे संवाददाता
हाजिर बाजार में विगत् हप्ते से ऊंचे भाव पर खरीदी समर्थन कमजोर रहा । मांग में कमी आई होने से गत् हप्ते सोया और पामतेल मंदे रहे । विश्व वायदा बाजार में पामतेल उत्पादक देशों मं पामतेल का उत्पादन बढ़ने और केंद्रीय सरकार द्वारा खाद्यतेल के आयात शुल्क को 10 से 5 प्रतिशत करने से मंदी का असर आया बताते है। रुपये की मजबूती और गर्मी में पामतेल के आयात के बढ़ने के आसार से आगे तेलों में मंदी की ही धारणा बताई जा रही है । गत् हप्ते मलेशियन वायदा बाजार की केएलसीई में मंदी रही उधर शिकागो सोयातेल वायदा भी गत् हप्ते अधिक ऊंचा नहीं उठा पाया होने से वायदा बाजारों में भी खाद्यतेलों पर गिरावट का असर रहा ।  सोयातेल गत् हप्ते 755-757 रु. तक नीचे तक आ गया था । पामतेल मुंबई 600 रु. और इंदौर का भाव 645 रु. तक होना बताया गया । सोया पामतेलों में गहरा रही मंदी से सोया उद्योगों की तिलहनों में लेवाली कम रहने से सोयाबीन, सरसों के भाव दबे हुए बताए जा रहे है । इंदौर कृषि मंडी में सोयाबीन की आवक 1200 बोरी की होना बताई जा रही थी और सोयाबीन नीचे उतरते हुऐ 3675-3700 रु. और सरसों भाव भी लगभग 3800 रु. तक होना बताए जा रहे थे । सोयाखली में निर्यात मांग का अभाव बताया जा रहा होने से भी सोयाबीन भाव नहीन उठ रहे बताए जा रहे है । व्यापारिक क्षेत्रों से मिली खबरों के अनुसार भारत और अमेरिका की स्थिति आगे आने वाले चुनावों के मद्देनजर अभी महंगाई कंट्रोल में ही रहने की धारणा है । कृषि जगत् का माना है कि  वैसे तो देश में पिछला और अगला वर्ष दोनों ही मौसम की अनुकूलता के करण कृषि उत्पादन का बेहतर वर्ष रहा है । उनके अनुसार इस वर्ष ठंड भी अनुकूल रही इससे रबि की फसल भी बेहतर हुई है और आगे गर्मी अधिक गिरने की संभावना से हो सकता है बरसात भी अच्छी होगी । बाजार जनता विश्लेषकों का मानना है कि आगे गर्मी का मौसम है और भारी आयातित पामतेल की खपत आयातक, उद्योगपति-उत्पादक, व्यापारीगण मिलकर ऊंचे भाव में  निकालकर भारी मुनाफा वसूली देशभर में करेंगे । सरकार भी डद्योगपतियों-व्यापारियों के साथ कदमताल करती रही है  जिससे कि पदार्थ़ों पर गिरते भाव कंट्रोल कारना है । विभिन्न खाद्यतेलों की भारत में भरमार है । मूंगफली तेल, सोयातेल, सरसें तेल, तिल्ली तेल, कपास्या तेल और खोपरा तेल की अलग-अलग राज्यों में खपत है और सोयातेल में ऊंचे भाव पर भारत में इतनी मांग है नहीं है । वही पामतेल का भारी आयात होकर स्टॉक और तेलों के घालमेल में पड़ा बताया जा रहा है । एनसीडीएक्स वायदा में 3725 से 3775 रु. मार्च-अप्रेल तक भाव रहे । प्लांटों की सोयाबीन खरीदी 3650 से 3700 रु. तक  क्वालिटी रही । अन्य तिलहनों में सरसों और कपास्या पर अधिक तेजी नहीं थी । बहरहाल, इंदौर खाद्यतेल में गत् हप्ते मूगंफली तेल 937 से 980 रु., मुंबई मूंगफली तेल  950 रु., गुजरात लूज 940 रु. और राजकोट तेलिया 1510 रु. के भाव रहे । इंदौर सोया रिफाइंड 755 से 757 रु., इंदौर साल्वेंट 720 से 725 रु., मुंबई सोया रिफाइंड 750 रु., मुंबई पाम 605 रु., इंदौर पामतेल 640-645 के भाव रहे । इंदौर कपास्या तेल 710 रु. और राजस्थान सरसों कच्चीघानी 870 रु. का भाव रहा। 

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