उत्तर प्रदेश में खादी-प्रोत्साहन हेतु कदम

लघनऊ । भारतीय समाज में खादी से संबंध तथा इसके महत्व की जागरुकता अधिक है। इसका सर्वाधिक समर्थन तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया। पर इधर के दिनों में भारत के प्रधानमंत्री ने भी खादी के उपयोग के लिए अपना अटूट समर्थन दुहराया है, तथा प्रत्येक भारतीय को खादी से बने कम से कम एक वत्र, परिधान का उपयोग करने की अपील की है, चाहे वह `रुमाल' ही क्यों न हो। इससे खादी के उपयोग, बिक्री को काफी बल मिलेगा, इस क्षेत्र में कार्य करने वाले कामगारों को रोजगार प्राप्त होंगे। वास्तव में, ग्रामोद्योग से जुड़ा यह वत्र, निर्धनों की जीविका, इनके जीवन-यापन का महत्वपूर्ण साधन है। माना जाता है, खादी भारत की आत्मा है। विगत वर्ष़ों में पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से, हमारे देश में खादी के बने परिधान उपेक्षित रहे, यद्यपि कई नेताओं ने इसके उपयोग हेतु निजी प्रयत्न भी किये।
उत्तर प्रदेश में खादी को अपने पहनने में सम्मान जनक स्थान देने तथा खादी उत्पादन एवं खादी वत्र की गुणवत्ता में वृद्धि इसे आधुनिक बनाने हेतु अनेकाअनेक कदम उठाये गये है।
प्रदेश के सभी मंडलों में खादी प्रशिक्षण केद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में कार्य़ों एवं परियोजनाओं के वेहतर क्रियान्वयन के लिए आउटसोर्स पर कंसल्टेंट तथा विशेषज्ञों की नियुक्ति भी की जायेगी।
इस प्रदेश की हस्तकला हस्तकौशल, कुटीर उद्योग एवं ग्रामोद्योग काफी प्रसिद्ध है समस्त विश्व में यहा कि निर्मित वस्तुएं पसंद की जाती रही है। किन्तु प्रोत्साहन के अभाव में ये वस्तुएं पृष्ठभूमि में चली गयी थीं। अब एक जिला एक उत्पाद' तथा खादी के प्रशिक्षण जैसी योजनाओं से खादी वत्र को अपना खोया गौरव प्राप्त होने जा रहा है।

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