कपड़ा-परिधान : घरेलू व निर्यात मांग रहेगी बेहतर

कपड़ा-परिधान : घरेलू व निर्यात मांग रहेगी बेहतर
रमाकांत चौधरी
नई दिल्ली- । ालू वित्त वर्ष के प्रथम तिमाही में भारतीय कपड़ा एवं परिधान का घरेलू सहित निर्यात मांग बेहतर रहने की संभावना है।जिसको लेकर केद्र सरकार की तरफ से पिछले कुछ वर्ष़ों से कपड़ा व परिधान क्षेत्र को लेकर नीतिगत फैसले लिए गए है।जिसके तहत आगे कपड़ा व परिधान के उत्पादन से लेकर विपणन व निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुख बनेगा।जिससे कपड़ा व परिधान क्षेत्र में रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे।जिससे कपड़ा व परिधान क्षेत्र के सहारे देश की अर्थव्यवस्था का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
दरअसल देश के कपड़ा व परिधान क्षेत्र में घरेलू स्तर पर अनेक कारकों के चलते कपड़ा व परिधान के उत्पादन से लेकर विपणन के मार्चे पर आगे सकारात्मक रुख बना रहेगा।जिसके तहत एक तरफ घरेलू स्तर पर अगले ग्रीष्मकालीन व वैवाहिक मौसम सहित अगले रमजान माह व ईद पर्व को लेकर अगले ढाई महीने कपड़ा व परिधान में थोक कारोबारी गतिविधियों की चाल बेहतर रहेगी।वहीं लोकसभा चुनाव के चलते देश के प्रमुख राजनैतिक दलों के बीच इस बार अच्छी खासी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।ऐसे में राजनैतिक दलों की तरफ से अपनी जीत सुनिश्चित करने को लेकर चुनाव प्रचार प्रसार अभियान में अंदरखाने मनमाफिक धनराशि खर्च करने से गुरेज नहीं कर रहे है।ऐसे में चुनाव प्रचार प्रसार में देश के युवा वर्ग चाहे वह ग्रामीण क्षेत्र से हों अथवा शहरी क्षेत्र से हें जोरशोर से लगे हुए है और उन्हें मनमाफिक चुनाव प्रचार प्रसार में शरीक होने को लेकर धनराशि मिल रही है।जिससे इन युवाओं की तरफ से खुले बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं की खरीदी बढेगी।जिससे रुपए की तरलता सुनिश्चित सुनिश्चत होगी।वहीं देश के ग्रामीण क्षेत्र में रबी फसलों की कटाई का कार्य जोरशोर से चल रहा है।जिसके तहत रबी फसल उपज को उचित मूल्य पर बेचने का सिलसिला चल पड़ा है।जिसमें केद्रीय व राज्य सरकारों की तरफ से रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में खरीदी जोरशोर से कर रहे है।जिससे किसानों के समक्ष कृषि धन की उपलब्धता बढेगी।जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की तरफ से अपने बेटा व बेटियों के वैवाहिक कार्यक्रम अच्छे से निष्पादित करेंगे।जिसमें खाने पीने से लेकर कपड़ा व परिधान की खरीदी करनी पड़ेगी।जिसमें स्वभाविक है कि अच्छी खासी धनराशि खपत करनी पड़ेगी।ऐसे में तमाम हालातों के चलते पिछले कुछ अर्से से कपड़ा व परिधान के क्षेत्र में रुपए  की जटिल को लेकर चल रही रस्साकसी में व्यापक रुप से बदलाव आएगा और घरेलू बाजार में रुपए की तरलता कमोबेश सुधार की ओर अग्रसर होगा।इसके साथ ही भारतीय मौसम विभाग की तरफ से ताजा भविष्यवाणी की गई कि अलनीनो को लेकर अब गलतफहमी एक तरह से समाप्त हो गई है और इस वर्ष देश में अच्छी मानसून की बारिश होगी।जिससे अगले खरीफ फसलों को लेकर अभी से सकारात्मक माहौल बन गया है।जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आगे उत्साहजनक माहौल रहेगा।जिससे कपड़ा व परिधान का आगे कारोबारी गतिविधियां बेहतर चलेगी।वहीं कपड़ा व परिधान के निर्यात मोर्चे पर चालू तिमाही में सकारात्मक संकेत मिल रहे है। जिसके तहत पिछले कुछ वर्ष़ों के तहत कपड़ा व परिधान के उत्पादन से लेकर विपणन व निर्यात के मोर्चे को लेकर केद्र सरकार की तरफ से नीतिगत फैसले किए गए है।जिसके तहत अब सुधार के स्पष्ट संकेत प्राप्त हो रहे है।ऐसे में भारतीय निर्यातकों की तरफ से ऐसे नीतिगत फैसले का लाभ उठाते हुए वैश्विक स्तर पर उभरते हुए बाजारों वाले देशों पर भारतीय कपड़ा व परिधान के निर्यात को लेकर विशेष फोकस किए जा रहे है।जिसके तहत रोड शो करके भारतीय कपड़ा व परिधान के निर्यात को बढावा देने को लेकर भरसक प्रयास किए जा रहे है।जिसमें पिछले कुछ अर्से के तहत कपड़ा व परिधान के निर्यात मोर्चे पर नए ऑर्डर प्राप्त हो रहे है।ऐसे में आगे इन वैश्विक स्तर के उभरते हुए देशों के बाजारों में भारतीय कपड़ा व परिधान के निर्यात को अधिकाधिक बढावा देने का भरपूर प्रयास किया जा रहा है ताकि आगामी दिनों में निर्यात नई ऊंचाई को छू सकेगी।जिससे देश में कपड़ा व परिधान के निर्यात से विदेशी मुद्रा अर्जित करने में काफी हद तक मदद मिलेगी।जिससे स्वभाविक है कि भारतीय कपड़ा व परिधान के निर्यात व्यापार को लेकर आगे सुनहरा अवसर आने की संभावनाएं परिलक्षित हो रही है।जिससे इस क्षेत्र में रोजगार के नये आयाम कायम होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को विशेष रुप से बढावा मिलेगा।  

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