सोना से पोर्टफोलियो को मजबूती

सोना से पोर्टफोलियो को मजबूती
इब्राहिम पटेल
मुंबई। मुद्रा (करेंसी) के मूल्य में गति से गिरावट यह इंगित करता है कि अर्थव्यवस्था में डॉलर-आधारित फाइनेंशियल गणना करने के युग के अंत का आरंभ हो रहा है। कुछ मुद्राओं को छोड़कर, यदि निवेशक के पास करेंसी-आधारित निवेश होगा, तो यह फ्याट (मूल्यहीन) करेंसी के अलावा कुछ नहीं होगा। इस स्थिति में यदि भविष्य के खतरें से बचना होगा, तो आपके पोर्टफोलियो में मजबूत करेंसी का स्वीकार करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं होगा और यह `सोना` ही है। जब वैश्विक व्यापार में पीछे हठ हो रही है और राजनेताओं स्थानिक आर्थिक स्थितियों को अनदेखा कर रहे हैं, तब वैश्विक अर्थव्यवस्था चौराहे पर आकर खड़ी है। कुछ सेंट्रल बैंक, जैसे यूरोपीय सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ जापान, भारतीय रिजर्व बैंक और बैंक ऑफ इंग्लैंड जैसी अनगिनत बकें, अभी भी ब्याज दरों पर दबाव बनाते हैं, वह उनकी अर्थव्यवस्थाओं में परिलक्षित होता है।
दिसंबर में केवल यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने क्वांटिटेटीव ईज़िंग (राहत पैकेज) कार्यक्रम को रद्द कर दिया था। अमेरिकी फेडरल रिजर्व और पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने 2018 से वित्त नीति को कसना शुरू कर दिया है। संभावना यह भी है कि दुनिया की केंद्रीय बैंकों का ऐसा ट्रेंड अधिक जटिल हो जाएगा। संयोग देखिए, ऐसी नकारात्मक व संरक्षात्मक व्यापार ऋण नीति सायकल 1929 में निर्माण हुई थी। उसके बाद मंदी का सिकंजा अधिक मजबूत हो गया था। व्यापार में आने वाली बाधाओं ने देश में आने वाले पूंजी प्रवाह को अस्तव्यस्त कर ड़ाला है, जिसने बजट में डेफिसीट पैदा की है। विशेष रूप से अमेरिका के बचत करने वालों के पास सरकारी बांड में पैसा रोकने के लिए फाजल (अतिरिक्त) पैसा ही शेष रहने नहीं दिया है। खराब स्थिति तो अब आने वाली है, जब विदेशी निवेशकों भी डॉलर और डॉलर-आधारित डेट फंड में निवेश ही नहीं करेंगे, इसके अलावा वे अचानक ऐसे फंड को भी वापिस खिंच लेंगे।
अमेरिकी ट्रेजरी के नवीनतम टीआईसी (ट्रेजरी इंटरनेशनल कैपिटल) डेटा से पता चलता है कि दिसंबर और जनवरी में 257.2 अरब डॉलर का निवेश वापस ले लिया गया था। इतना ही नहीं, 2019 में अमेरिकी ट्रेजरी में ऐसा फंड घाटा 1 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगा। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों भी नए सिरे से एसेट्स बेचने के लिए आएंगे, तब उसे भी भुगतना होगा। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की पिछले सप्ताह की बैठक में ऐसी स्थिति का उल्लेख किया गया था। फेड ने 2019 और 2020 में मोनिटरी पॉलीसी में कठिन नियोजन और कमजोर विकास की आगाही भी कर दी थी।
पिछले महीने में सोने की कीमतों में 3 प्रतिशत की गिरावट आई, तब सटोरियों का ऐसा मत था कि, सोना की तेजी की एक सायकल अब खत्म हुई है। मजबूत होते अमेरिकी डॉलर, चीन अमेरिका के बीच की बातचीत में प्रगति, शेयर की बढ़ती कीमत के संयुक्त प्रभाव से सोना के भाव को 11 महीनों की ऊंचाई से वापिस फिरने के लिए मजबूर किया था। 11 अप्रैल के भाव 1399 डॉलर की ऊंचाई पर पहुंचा था तत्पश्चात जनवरी में 73.3 टन गोल्ड ईटीएफ में होल्डिंग था, जो फरवरी में घटकर 71.8 टन रह गया । 

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