कांग्रेस प्रधानमंत्री पद का दावा छोड़ेगी?

लोकसभा के चुनाव परिणाम घोषित होने में मात्र गिने-चुने दिन बचे हø तब कांग्रेस के नेता त्रिशंकु लोकसभा होने का विश्वास व्यक्त कर रहे हø और सरकार बनाने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। कांग्रेस के सिनियर नेता अन्य क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क कर रहे हø। सिनियर नेता गुलाम नबी आजाद ने तो अन्य दावेदारों को सार्वजनिक में भरोसा भी दिया है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री पद का दावा नहीं करेगी। प्रधानमंत्री पद का मुद्दा विपक्ष के समझौते और सरकार के गठन में अवरोध नहीं बनेगा। गौरतलब है कि ऐसा भरोसा सोनियाजी के नाम पर उनकी ओर से दिया जा रहा है। आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्राबाबू नायडू चुनाव परिणाम से पहले ही विपक्ष के नेताओं की बैठक बुलाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन विपक्ष में मुख्य-बड़ी पार्टी के रूप में कांग्रेस और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रूप में सोनिया गांधी ने विपक्षी नेताओं की बैठक परिणाम आने के बाद 23 मई को बुलाई है। इस प्रस्तावित बैठक में मायावती, अखिलेश यादव और ममता दीदी उपस्थित नहीं रहेंगी, ऐसी हवा फैलाने के बाद गुलाम नबी आजाद का निवेदन-आया है जो इन तीनों नेताओं के लिए आमंत्रण के समान है। प्रधानमंत्री पद की दोनों महिला दावेदारों को सोनियाजी के नाम पर आश्वासन दिया गया है।
सोनियाजी ने इन तीनों नेताओं को लिखित आमंत्रण भेजा है या नहीं उसके बारे में  गुलाम नबी ने खुलासा नहीं किया है। संभावना ऐसी है कि गुलाम नबी के निवेदन की प्रतिक्रिया कैसी आती है उसकी प्रतीक्षा करने के बाद ही लिखित आमंत्रण भेजा जा सकता है।
इसी बीच कांग्रेस के प्रवक्ता सूरजेवाला ने ऐसी स्पष्टता की है कि सबसे बड़ी पार्टी के रूप में कांग्रेस के नेता- राहुल गांधी योग्य उम्मीदवार हø उसके बावजूद कांग्रेस हाईकमांड आखरी निर्णय लेगा।
कांग्रेस के नेता- गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल से लेकर पी. चिदम्बरम तक के विश्वास से कह रहे है कि नरेद्र मोदी को बहुमत नहीं मिलेगा और वे दूसरी बार प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे। जबकि नरेद्र मोदी को विश्वास है कि ``फिर से मोदी सरकार'' आएगी। सर्वसामान्य सर्वेक्षण ऐसा है कि प्रधानमंत्री तो मोदी ही बनेंगे। इस आमने-सामने के विश्वास से एक बात निश्चित है कि परिणाम का सटीक पूर्वानुमान नहीं हुआ है। अब एक्जिट पोल पर सबकी नजर है।
कांग्रेस के नेताओं ने अलग-अलग क्षेत्र बांटकर स्थानीय नेताओं से संपर्क-समझाने की शुरुआत की है। कमलनाथ उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के मित्र होने से काम पर लगे हø। अहमद पटेल मायावती को समझा रहे हø। मायावती, ममता और अखिलेश यदि सोनियाजी की बैठक में हाजिर रहने के लिए तैयार हों तो उसमें प्रधानमंत्री के मुद्दे पर चर्चा होगी और कांग्रेस  की बैठकों को देखते हुए यदि सर्वसम्मति राहुल गांधी के नाम पर हो तो फिर प्रश्न नहीं रहता। ऐसा माना जाता है कि अन्य नेता के नाम पर सर्वसम्पति न मिलने पर आखिरकार राहुल गांधी का नाम सर्वमान्य बनेगा।
पश्चिम बंगाल में मतदान के अंतिम चरण से पूर्व ममता दीदी द्वारा ``हिंसा'' कार्ड अजमाने के बाद मायावती-चंद्राबाबू-अहमद पटेल आदि उनके समर्थन में आए हø। ममता ने जिस भाषा का उपयोग किया है- मोदी निकलो-देश में से भगाओ-वह मतदाताओं के लिए ही नहीं- बल्कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं को विश्वास दिलाने के लिए है कि मोदी के सामने मात्र ममता ही आक्रामक बन सकती है...
अब मुख्य आधार किसे कितनी सीट मिलती है उस पर है। त्रिशंकु लोकसभा में भी भाजपा-एनडीए को ज्यादा बैठक मिल जाने पर राष्ट्रपति उनको ही सरकार बनाने के लिए आमंत्रित और समय दे सकते हø तथा विपक्ष शोरगुल मचाएगा। गौरतलब है कि मोदी ने हमेशा भाजपा के बहुमत के बारे में एनडीए के साथ बहुत बड़े बहुमत का विश्वास दर्शाया है। साथ ही तेलंगाना के केB. चंद्रशेखर राव और आंध्रप्रदेश के जगनमोहन रेड्डी तथा उड़ीसा के नवीन पटनायक के साथ संबंध `अच्छा' है और जरूरत प्रतीत होने पर उनसे संपर्क किए जाने की संभावना है।   

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